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मानसून से पहले मलेरिया ने पांव पसारे, 27 रोगी मिले
Updated Thu, 22 Jun 2017 03:07 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
जिला में लू के सीजन में स्वाइन फ्लू के रोगी आने से स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पांव फूले हुए हैं। अब मलेरिया के 27 रोगी सामने आ गए। इससे विभाग की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कर्मियों को रोगियों के घरों के आसपास से ब्लड स्लाइड बनाने के आदेश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के पास अब मलेरिया के रोगी आने शुरू हो गए हैं। मलेरिया के 27 रोगी मिले हैं। इनमें मंगाली एरिया के नौ, बरवाला एरिया के सात, सीसवाल एरिया के दो, हांसी एरिया के पांच, नारनौंद एरिया के दो, सिसाय और हिसार के एक-एक रोगी शामिल हैं। लू के सीजन में बारिश आनी शुरू हो गई और इसके साथ ही मलेरिया ने अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। लू की सीजन में स्वाइन फ्लू के पांच रोगी मिलने से विभाग के हाथ-पांव फूूले हुए थे कि अब मलेरिया रोगी सामने आने पर मुश्किल और बढ़ गई है।
बस अड्डे के आसपास के पीजी की टंकियां जांचीं
स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया के रोगी सामने आने पर अलग-अलग टीमें बस अड्डे के आसपास जांच के लिए भेजी। टीमों ने बस अड्डे के साथ लगते ऋषि नगर के अलग-अलग पीजी में जाकर वहां की पानी की टंकी जांची और पीजी संचालकों को हफ्ते में जरूर टंकी साफ करने की हिदायत दी। इसके अलावा उनको पीजी के आसपास पानी न खड़ा होने देने की हिदायत दी।
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मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया से ऐसे करें बचाव
1. पानी की टंकी और होदी के ढक्कन हमेशा बंद रखने चाहिए।
2. घर के आसपास गड्ढों में पानी इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए।
3. हफ्ते में एक बार कूलर खाली कर सुखाएं, नहीं तो उसमें एक
चम्मच टेमिफॉस या पेट्रोल-डीजल डालें।
4. पक्षियों के पानी के बर्तन, मनी प्लांट, फ्रिज की ट्रे और फेंगशूई
पौधे का पानी हफ्ते में जरूर बदलें।
5. हर संडे घर में रखे पानी के सभी पात्रों को साफ कर सुुुखाएं।
मलेरिया के 27 रोगी मिलें हैं। उनके घरों के आसपास कर्मियों को जांच के लिए भेजा है। ब्लड स्लाइड बनाई जा रही हैं। बस अड्डे के पास के पीजी में होदी चेक कराई गई हैं। विभाग मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया रोकने के लिए अपना काम कर रहा है।
-डॉ. जया गोयल, जिला मलेरिया अधिकारी, हिसार
...................
14 फील्ड वर्करों पर चार लाख की आबादी का मलेरिया रोकने का जिम्मा
हिसार।
शहर में स्वाइन फ्लू के पांच केस सामने आने के बाद मलेरिया ने अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। खास बात है यह है कि शहर की लगभग चार लाख की आबादी पर मलेरिया रोकने के लिए महज 14 फील्ड वर्कर तैनात हैं। 22 साल पहले इन कर्मियों की संख्या 36 होती थी। रिटायर होते-होते यह संख्या 14 रह गई। हालांकि डायरेक्टर हेल्थ ने पहले फील्ड वर्करों की डिमांड मांगी थी और तब 111 की डिमांड भेजी थी। मगर डिमांड आज तक पूरी नहीं हुई। बताया जाता है कि नगर निगम का दायरा 93 किलोमीटर है। जहां इन कर्मियों की ड्यूटी का जिम्मा है। इसके अलावा कुछ अरसे में 12 में से 7 एमपीएचडब्ल्यू रहे गए, बाकी रिटायर हो गए। एक हेल्थ इंस्पेक्टर तैनात है। इंस्पेक्टर कलेक्टर तीन थे। तीनों एक-एक कर रिटायर हो गए। इसके अलावा मलेरिया विभाग की दूसरी शाखा में अलग कर्मचारी हैं। फील्ड वर्कर और एमपीएचडब्ल्यू का समूह पानी में मच्छर मार दवा का छिड़काव करता है या लोगों को रोगों के प्रति जागरूक करता है, ताकि मच्छर पैदा न हों। यह टीम मच्छर न पनपने देने की दिशा में प्राथमिक कड़ी के तौर पर काम करती है। क्योंकि मच्छर नहीं पैैदा होगा तो ये रोग नहीं फैलेंगे। एरिया के लिहाज से मलेरिया विभाग के पास ज्यादातर श्रेणियों के कर्मचारी नहीं हैं। यही वजह है कि मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव बना रहता है। हालांकि विभाग सीजन में अनुबंध के आधार पर कर्मचारी तैनात करता है।
पंचायतों को दवा मुहैया कराई जाती हैं
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पंचायतों को मच्छर मार टेमिफॉस दवा मुहैया कराई जाती है। पंचायतें सीएचसी या पीएचसी के कर्मचारियों के सहयोग से मच्छर पनपने की संभावित जगहों पर दवा का छिड़काव कराती हैं, ताकि मच्छर का लार्वा न पनप पाए और डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया से बचाव हो सके।
स्टाफ के अभाव में विभाग पंचायतों और नगर निगम या नगर पालिका की मदद लेने लगा है। एएनएम, आशा वर्कर और अन्य कर्मियों के सहयोग से मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया रोकने की दिशा में काम किया जा रहा है। -डॉ. जेएस ग्रेवाल, सीएमओ, हिसार
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हिसार।
जिला में लू के सीजन में स्वाइन फ्लू के रोगी आने से स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पांव फूले हुए हैं। अब मलेरिया के 27 रोगी सामने आ गए। इससे विभाग की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कर्मियों को रोगियों के घरों के आसपास से ब्लड स्लाइड बनाने के आदेश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के पास अब मलेरिया के रोगी आने शुरू हो गए हैं। मलेरिया के 27 रोगी मिले हैं। इनमें मंगाली एरिया के नौ, बरवाला एरिया के सात, सीसवाल एरिया के दो, हांसी एरिया के पांच, नारनौंद एरिया के दो, सिसाय और हिसार के एक-एक रोगी शामिल हैं। लू के सीजन में बारिश आनी शुरू हो गई और इसके साथ ही मलेरिया ने अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। लू की सीजन में स्वाइन फ्लू के पांच रोगी मिलने से विभाग के हाथ-पांव फूूले हुए थे कि अब मलेरिया रोगी सामने आने पर मुश्किल और बढ़ गई है।
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बस अड्डे के आसपास के पीजी की टंकियां जांचीं
स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया के रोगी सामने आने पर अलग-अलग टीमें बस अड्डे के आसपास जांच के लिए भेजी। टीमों ने बस अड्डे के साथ लगते ऋषि नगर के अलग-अलग पीजी में जाकर वहां की पानी की टंकी जांची और पीजी संचालकों को हफ्ते में जरूर टंकी साफ करने की हिदायत दी। इसके अलावा उनको पीजी के आसपास पानी न खड़ा होने देने की हिदायत दी।
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मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया से ऐसे करें बचाव
1. पानी की टंकी और होदी के ढक्कन हमेशा बंद रखने चाहिए।
2. घर के आसपास गड्ढों में पानी इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए।
3. हफ्ते में एक बार कूलर खाली कर सुखाएं, नहीं तो उसमें एक
चम्मच टेमिफॉस या पेट्रोल-डीजल डालें।
4. पक्षियों के पानी के बर्तन, मनी प्लांट, फ्रिज की ट्रे और फेंगशूई
पौधे का पानी हफ्ते में जरूर बदलें।
5. हर संडे घर में रखे पानी के सभी पात्रों को साफ कर सुुुखाएं।
मलेरिया के 27 रोगी मिलें हैं। उनके घरों के आसपास कर्मियों को जांच के लिए भेजा है। ब्लड स्लाइड बनाई जा रही हैं। बस अड्डे के पास के पीजी में होदी चेक कराई गई हैं। विभाग मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया रोकने के लिए अपना काम कर रहा है।
-डॉ. जया गोयल, जिला मलेरिया अधिकारी, हिसार
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14 फील्ड वर्करों पर चार लाख की आबादी का मलेरिया रोकने का जिम्मा
हिसार।
शहर में स्वाइन फ्लू के पांच केस सामने आने के बाद मलेरिया ने अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। खास बात है यह है कि शहर की लगभग चार लाख की आबादी पर मलेरिया रोकने के लिए महज 14 फील्ड वर्कर तैनात हैं। 22 साल पहले इन कर्मियों की संख्या 36 होती थी। रिटायर होते-होते यह संख्या 14 रह गई। हालांकि डायरेक्टर हेल्थ ने पहले फील्ड वर्करों की डिमांड मांगी थी और तब 111 की डिमांड भेजी थी। मगर डिमांड आज तक पूरी नहीं हुई। बताया जाता है कि नगर निगम का दायरा 93 किलोमीटर है। जहां इन कर्मियों की ड्यूटी का जिम्मा है। इसके अलावा कुछ अरसे में 12 में से 7 एमपीएचडब्ल्यू रहे गए, बाकी रिटायर हो गए। एक हेल्थ इंस्पेक्टर तैनात है। इंस्पेक्टर कलेक्टर तीन थे। तीनों एक-एक कर रिटायर हो गए। इसके अलावा मलेरिया विभाग की दूसरी शाखा में अलग कर्मचारी हैं। फील्ड वर्कर और एमपीएचडब्ल्यू का समूह पानी में मच्छर मार दवा का छिड़काव करता है या लोगों को रोगों के प्रति जागरूक करता है, ताकि मच्छर पैदा न हों। यह टीम मच्छर न पनपने देने की दिशा में प्राथमिक कड़ी के तौर पर काम करती है। क्योंकि मच्छर नहीं पैैदा होगा तो ये रोग नहीं फैलेंगे। एरिया के लिहाज से मलेरिया विभाग के पास ज्यादातर श्रेणियों के कर्मचारी नहीं हैं। यही वजह है कि मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव बना रहता है। हालांकि विभाग सीजन में अनुबंध के आधार पर कर्मचारी तैनात करता है।
पंचायतों को दवा मुहैया कराई जाती हैं
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पंचायतों को मच्छर मार टेमिफॉस दवा मुहैया कराई जाती है। पंचायतें सीएचसी या पीएचसी के कर्मचारियों के सहयोग से मच्छर पनपने की संभावित जगहों पर दवा का छिड़काव कराती हैं, ताकि मच्छर का लार्वा न पनप पाए और डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया से बचाव हो सके।
स्टाफ के अभाव में विभाग पंचायतों और नगर निगम या नगर पालिका की मदद लेने लगा है। एएनएम, आशा वर्कर और अन्य कर्मियों के सहयोग से मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया रोकने की दिशा में काम किया जा रहा है। -डॉ. जेएस ग्रेवाल, सीएमओ, हिसार