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स्वास्थ्यकर्मियों ने सिविल सर्जन कार्यालय पर धरना दिया
जींद/ब्यूरो
Updated Wed, 06 Nov 2013 10:15 PM IST
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बहुउद्देशीय महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बुधवार को हरियाणा के जिला जींद के सामान्य अस्पताल में सिविल सर्जन कार्यालय के सामने धरना दिया।
स्वास्थ्य कर्मचारियों ने विभाग और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिला कर्मचारियों ने सिविल सर्जन को अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा।
यूनियन की प्रांतीय चेयरमैन राजबाला शर्मा, राज्य प्रधान सुशीला ढांडा ने कहा कि महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों से संबंधित कई बार महानिदेशक और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा जा चुका है।
लेकिन सरकार बातचीत करने को तैयार नहीं है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत बहुद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं में भारी रोष है।
महिला कर्मियों के रोष को देखते हुए संगठन ने आंदोलन पर जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आगामी कड़ी में नौ नवंबर को नारनौल में स्वास्थ्य मंत्री के निवास पर धरना-प्रदर्शन के बाद तय की जाएगी।
प्रदर्शन में जिला सचिव कृष्णा देवी, कालवा से राजपति देवी, खरकरामजी से संतरो देवी, जुलाना से ऊषा लाठर, कंडेला से गुलाब कौर, उचाना से शीला लाठर, उझाना से राजबाला, सुमित्रा देवी आदि कर्मचारी नेत्री मौजूद थी।
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महिला स्वास्थ्य कर्मियों की मांगें
महिला स्वास्थ्य कर्मियों के पद की योग्यता व कार्यों को देखते हुए टेक्निकल कर्मचारी घोषित करना, बहुद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं को पंजाब, हिमाचल, चंडीगढ़, यूपी सरकारों के अधीन कार्यकर्त्ताओं की भांति 3200 और 4200 का ग्रेड पे वेतनमान देना, स्वास्थ्य विभाग में बहुद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं (एएनएम) की नियम से नियमित भर्ती करना और आरसीएच परियोजना के तहत कार्यरत महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं की सेवाओं को नियमित करना।
जनसंख्या के आधार पर ब्लॉक, तहसील व जिला स्तर पर स्वास्थ्य केंद्र खोलना, एमपीएचएस से आगे की बंद पदोन्नति नियमित शुरू करना, बहुद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं की सेवाएं कन्फर्म करना, ड्यूटी समय में महिला कार्यकर्त्ताओं की वर्दी के रूप में फिरोजी रंग को स्वीकृति प्रदान करना, सभी उपस्वास्थ्य केंद्रों पर बहुद्देशीय महिला कार्यकर्त्ताओं को हाउस रेंट देना, मुख्यालय द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं से विभागीय कार्य लेना, आरसीएच परियोजना के तहत लगे कर्मचारियों का सर्विस ब्रेक बंद करना व सभी जिलों में समय पर वेतन दिया जाए और नियमित कर्मचारी की भांति वेतन, भत्ते व सुविधाएं दी जाएं आदि शामिल हैं।
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स्वास्थ्य कर्मचारियों ने विभाग और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिला कर्मचारियों ने सिविल सर्जन को अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा।
यूनियन की प्रांतीय चेयरमैन राजबाला शर्मा, राज्य प्रधान सुशीला ढांडा ने कहा कि महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों से संबंधित कई बार महानिदेशक और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा जा चुका है।
लेकिन सरकार बातचीत करने को तैयार नहीं है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत बहुद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं में भारी रोष है।
महिला कर्मियों के रोष को देखते हुए संगठन ने आंदोलन पर जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आगामी कड़ी में नौ नवंबर को नारनौल में स्वास्थ्य मंत्री के निवास पर धरना-प्रदर्शन के बाद तय की जाएगी।
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प्रदर्शन में जिला सचिव कृष्णा देवी, कालवा से राजपति देवी, खरकरामजी से संतरो देवी, जुलाना से ऊषा लाठर, कंडेला से गुलाब कौर, उचाना से शीला लाठर, उझाना से राजबाला, सुमित्रा देवी आदि कर्मचारी नेत्री मौजूद थी।
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महिला स्वास्थ्य कर्मियों की मांगें
महिला स्वास्थ्य कर्मियों के पद की योग्यता व कार्यों को देखते हुए टेक्निकल कर्मचारी घोषित करना, बहुद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं को पंजाब, हिमाचल, चंडीगढ़, यूपी सरकारों के अधीन कार्यकर्त्ताओं की भांति 3200 और 4200 का ग्रेड पे वेतनमान देना, स्वास्थ्य विभाग में बहुद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं (एएनएम) की नियम से नियमित भर्ती करना और आरसीएच परियोजना के तहत कार्यरत महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं की सेवाओं को नियमित करना।
जनसंख्या के आधार पर ब्लॉक, तहसील व जिला स्तर पर स्वास्थ्य केंद्र खोलना, एमपीएचएस से आगे की बंद पदोन्नति नियमित शुरू करना, बहुद्देशीय महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं की सेवाएं कन्फर्म करना, ड्यूटी समय में महिला कार्यकर्त्ताओं की वर्दी के रूप में फिरोजी रंग को स्वीकृति प्रदान करना, सभी उपस्वास्थ्य केंद्रों पर बहुद्देशीय महिला कार्यकर्त्ताओं को हाउस रेंट देना, मुख्यालय द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार महिला स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं से विभागीय कार्य लेना, आरसीएच परियोजना के तहत लगे कर्मचारियों का सर्विस ब्रेक बंद करना व सभी जिलों में समय पर वेतन दिया जाए और नियमित कर्मचारी की भांति वेतन, भत्ते व सुविधाएं दी जाएं आदि शामिल हैं।