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डेंगू के मच्छरों का स्वभाव बदला
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sat, 19 Oct 2013 07:57 PM IST
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जिले में डेंगू के मच्छरों ने अपने स्वभाव में परिवर्तन कर लिया है। पहले एक साल छोड़कर मार करने वाला डेंगू का मच्छर इस बार लगातार वार पर वार कर रहा है। डेंगू मच्छर के स्वभाव में आए इस बदलाव से स्वास्थ्य विभाग भी खासा चिंतित है।
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प्रदेश के मलेरिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, डेंगू का मच्छर रिसाइकिल प्रक्रिया के तहत वार करता है। एक साल इसका प्रकोप अधिक होता है तो दूसरे साल यह कमजोर रहता है।
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पिछले कई सालों से यह रिसाइकिल प्रक्रिया के तहत ही चल रहा था। आंकड़े देखें तो प्रदेश भर से वर्ष 2008 में डेंगू के 1,159 मामले मिले थे। वर्ष 2009 में यह संख्या महज 125 मरीजों तक सीमित रही। इसके बाद वर्ष 2010 में डेंगू शक्तिशाली होकर उभरा और 866 लोगों को बीमार कर दिया।
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2011 में डेंगू दोबारा कमजोर हुआ और महज 267 लोग ही इसकी चपेट में आए। स्वभाव के मुताबिक एक साल कमजोर रहने के बाद 2012 में डेंगू फिर से पूरी शक्ति लेकर वापस लौटा और 768 लोगों को बीमार कर दिया।
पिछले साल डेंगू का प्रकोप अधिक था, लिहाजा उम्मीद थी कि इस बार डेंगू का डंक कमजोर रहेगा। जिले में डेंगू के शुरुआती आंकड़ों से यह मुमकिन भी लगा। सितंबर के बाद डेंगू ने ऐसी तेजी पकड़ी है, जिससे उसके स्वभाव में आए बदलाव की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही है।
आगे चल रहा
जिले में वर्ष 2012 के अक्तूबर माह के अंत तक 225 मामले मिले थे। इस साल 18 अक्तूबर तक ही 235 मामलों की पहचान हो चुकी है। प्रदेश की तरह गुड़गांव में भी डेंगू के मच्छरों ने हमेशा रिसाइकिल प्रक्रिया का पालन किया था। इस बार डेंगू न केवल आगे चल रहा है, बल्कि उसने तेजी से डंक मारने की क्षमता भी विकसित कर ली है।
गुड़गांव में आंकड़ा
वर्ष मरीज मौत
2008 610 2
2009 100 1
2010 631 13
2011 156 3
2012 469 1
2013 अब तक 235 1