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भूमि अधिग्रहण में सरकार ने किया धोखा
रेवाड़ी/सिद्धार्थ यादव
Updated Thu, 07 Nov 2013 08:43 PM IST
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हरियाणा के जिला रेवाड़ी में भूमि अधिग्रहण रोको संघर्ष समिति रेवाड़ी ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
समिति के सदस्यों का कहना है कि सरकार ने बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए उनके साथ धोखा किया है।
जमीन अधिग्रहण के लिए जारी धारा 4 का नोटिस जारी होने के बाद सरकार ने पत्र के मसौदे में परिवर्तन किया।
सरकार ने 450 एकड़ भूमि के विषय में नियम बनाया कि अधिग्रहण में केस टू केस निर्णय लिए जाएंगे।
समिति का आरोप है कि ऐसा बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है क्योंकि यहां पर कुछ बिल्डरों ने भी 70 एकड़ जमीन खरीदी है।
प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2011 को रेवाड़ी तहसील के गांव कालका, पीवरा, मांढैया कलां, कोनसीवास और झानझनवास की 450 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 4 के तहत नोटिस जारी किया था।
यूं बदला गया पत्र का मसौदा
भूमि अधिग्रहण रोको संघर्ष समिति के सदस्य एडवोकेट अजय यादव, पार्षद गुरदयाल नंबरदार, ओमप्रकाश नंबरदार, वेदप्रकाश, ब्रजमोहन और राकेश का आरोप है कि अधिग्रहण के लिए धारा 4 के नोटिस जारी होने के बाद आंदोलन होने पर किसान सीएम से मिले थे।
उन्होंने नया भूमि अधिग्रहण कानून आने तक अधिग्रहण प्रक्रिया रोकने के लिए पत्र जारी करने का आश्वासन दिया था।
वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव राजस्व तथा आपदा प्रबंधन विभाग ने 1 फरवरी 2011 के बाद भूमि अधिग्रहण के लिए जारी धारा-4 के नोटिस के बाद नया कानून आने तक धारा-6 का नोटिस जारी न करने के लिए 23 जुलाई 2011 को पत्र जारी किया था।
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उपरोक्त पत्र में बदलाव करते हुए भूमि अधिग्रहण में केस टू केस अधिग्रहण की प्रक्रिया में निर्णय लेने का 19 मार्च 2012 को पत्र जारी कर दिया था।
किसानों का कहना है कि केस टू केस प्रक्रिया में बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश रची जा रही है।
सरकारी वाटर टैंक के अधिग्रहण का भी नोटिस
समिति के सदस्यों का आरोप है कि सरकार ने धारा 4 का नोटिस जारी करते समय जमीन की वास्तविक स्थिति का आंकलन नहीं किया।
आनन फानन में जारी नोटिस में सरकार ने 1994 और 2001 में हुडा और जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा कालका में अधिगृहीत जमीन में बने वाटर टैंक के अधिग्रहण के नोटिस जारी दिए।
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समिति के सदस्यों का कहना है कि सरकार ने बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए उनके साथ धोखा किया है।
जमीन अधिग्रहण के लिए जारी धारा 4 का नोटिस जारी होने के बाद सरकार ने पत्र के मसौदे में परिवर्तन किया।
सरकार ने 450 एकड़ भूमि के विषय में नियम बनाया कि अधिग्रहण में केस टू केस निर्णय लिए जाएंगे।
समिति का आरोप है कि ऐसा बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है क्योंकि यहां पर कुछ बिल्डरों ने भी 70 एकड़ जमीन खरीदी है।
प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2011 को रेवाड़ी तहसील के गांव कालका, पीवरा, मांढैया कलां, कोनसीवास और झानझनवास की 450 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 4 के तहत नोटिस जारी किया था।
यूं बदला गया पत्र का मसौदा
भूमि अधिग्रहण रोको संघर्ष समिति के सदस्य एडवोकेट अजय यादव, पार्षद गुरदयाल नंबरदार, ओमप्रकाश नंबरदार, वेदप्रकाश, ब्रजमोहन और राकेश का आरोप है कि अधिग्रहण के लिए धारा 4 के नोटिस जारी होने के बाद आंदोलन होने पर किसान सीएम से मिले थे।
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उन्होंने नया भूमि अधिग्रहण कानून आने तक अधिग्रहण प्रक्रिया रोकने के लिए पत्र जारी करने का आश्वासन दिया था।
वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव राजस्व तथा आपदा प्रबंधन विभाग ने 1 फरवरी 2011 के बाद भूमि अधिग्रहण के लिए जारी धारा-4 के नोटिस के बाद नया कानून आने तक धारा-6 का नोटिस जारी न करने के लिए 23 जुलाई 2011 को पत्र जारी किया था।
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उपरोक्त पत्र में बदलाव करते हुए भूमि अधिग्रहण में केस टू केस अधिग्रहण की प्रक्रिया में निर्णय लेने का 19 मार्च 2012 को पत्र जारी कर दिया था।
किसानों का कहना है कि केस टू केस प्रक्रिया में बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश रची जा रही है।
सरकारी वाटर टैंक के अधिग्रहण का भी नोटिस
समिति के सदस्यों का आरोप है कि सरकार ने धारा 4 का नोटिस जारी करते समय जमीन की वास्तविक स्थिति का आंकलन नहीं किया।
आनन फानन में जारी नोटिस में सरकार ने 1994 और 2001 में हुडा और जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा कालका में अधिगृहीत जमीन में बने वाटर टैंक के अधिग्रहण के नोटिस जारी दिए।