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चौथे राज्य वित आयोग ने विकास के लिए सुझाव मांगा
अमर उजाला ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 21 Jan 2014 12:40 AM IST
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सरकार की ओर से प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और अर्बन लोकल बॉडीज़ को विकास कार्यों के लिए कुल राजस्व की लगभग चार प्रतिशत धनराशि उपलब्ध करवाई जाती है, ताकि ये संस्थाएं अपने क्षेत्रों में बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास के कार्य सुचारू रूप से करवा सकें।
वर्ष 2013-14 में कुल राजस्व 37 हजार करोड़ रुपये का है, जबकि टैक्स राजस्व लगभग 27 हजार करोड का है। पांच हजार करोड़ नॉन टैक्स राजस्व प्राप्त होता है, जबकि पांच हजार करोड़ की धनराशि भारत सरकार की ओर से हरियाणा सरकार को ग्रांट के रूप में मिलती है।
यह बात चौथे वित्त आयोग के चेयरमैन एलएसएम सालिंस ने लघु सचिवालय के सभागार में आयोजित चौथे राज्य वित्त आयोग की बैठक में उपस्थित पंचायती राज संस्थाओं और अर्बन लोकल बाडीज़ के प्रतिनिधियों को संबोधित करते कही।
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सालिंस ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं और अर्बन लोकल बॉडीज़ को विकास के लिए वर्ष 2011 में हुई जनगणना के आधार पर धनराशि उपलब्ध करवाई जाती है। जनगणना के अनुसार 65 प्रतिशत देहाती क्षेत्र को तथा 35 प्रतिशत शहरी क्षेत्र को विकास के लिए धन दिया जा रहा है। चूंकि वर्ष 2011 में देहात और अर्बन का जनसंख्या अनुपात 65 और 35 प्रतिशत था।
बेचनी चाहिए 500 रुपये से कम किराए वाली दुकानें : उमा
नगर परिषद की अध्यक्ष उमा सुधा ने आयोग की ओर से मांगे गए सुझाव में कहा कि अर्बन लोकल बॉडीज के सदस्यों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि वे विकास के कार्यों में तालमेल के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
बिजली निगम की ओर से परिषद को एक प्रतिशत धनराशि दी जाती है और शहर में लाइट व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर परिषद की होती है। उन्हाेंने कहा कि बेशक बिजली वितरण निगम एक प्रतिशत न दे, लेकिन यह सारी व्यवस्था वह स्वयं संभाल लें।
उन्होंने सुझाव दिया कि कमेटी के अंतर्गत आने वाली जिन दुकानों का किराया 500 रुपये या इससे कम है, उन्हें बेच देना चाहिए।
रेहड़ी वालों के लिए जगह निर्धारित हो : सुधा
राज्य वित्त आयोग के सदस्य सुभाष सुधा ने कहा कि शहर में रेहड़ी वालों को जगह और निर्धारित मापदंड के तहत फड़ दिए जाएंगे। फड़ी और रेहड़ी लगाने वाले 20 फुट सड़क छोड़कर रेहड़ी लगा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शहर में सफाई व्यवस्था और अन्य विकास कार्य बेहतर तरीके से करवाने के लिए राज्य व केंद्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट के प्रतिशत में वृद्धि करने की जरूरत है।
विकास में तेजी के लिए धनराशि में हो वृद्धि : जिप चैयरमैन
जिला परिषद के चेयरमैन प्रवीण चौधरी ने अपने सुझावों में कहा कि देहात में विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए राजस्व से मिलने वाली धनराशि में और अधिक वृद्धि करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि केरल में वहां के राजस्व की 44 प्रतिशत धनराशि विकास कार्यों के लिए खर्च की जाती है। इस प्रकार हरियाणा में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि भी बढ़ाई जानी चाहिए।
कुरुक्षेत्र में 422 गांव हैं, जिनमें ऐसे गांव भी शामिल हैं, जहां पर विकास कार्य बहुत कम हुआ है। विकास कार्यों की राशि जनसंख्या के आधार पर मिलनी चाहिए। बहुत सी पंचायतों के पास 10 हजार रुपये से भी कम की आमदनी है और ग्राम पंचायतें अपना समुचित विकास नहीं करवा सकतीं।
उन्होंने कहा कि हर ग्राम पंचायत को कम से कम 20 लाख रुपये की धनराशि विकास कार्यों के लिए अवश्य मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायतों को पौधे निशुल्क मिलने चाहिए।
पंचायती जमीन पर रोजगार धंधे स्थापित हों
चौथे वित्त आयोग के सदस्य सचिव आरबी लांग्यान और आयोग के सदस्य सुभाष सुधा के पूछे जाने पर चौधरी ने सुझाव दिया कि देहात के विकास के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों की पंचायती जमीन पर रोजगार धंधे स्थापित किए जा सकते हैं।
वर्मी कम्पोस्ट की यूनिट स्थापित करने, कूड़ा-कर्कट का सदुपयोग करने और यदि ग्राम पंचायत की जमीन किसी शहर या कस्बे के पास पड़ती है तो वहां प्रस्ताव डालकर दुकानें आदि बनाकर आय को बढ़ाया जा सकता है।
गांव में खेल मैदान, शौचालय, पानी की व्यवस्था, बस क्यू शेल्टर, कन्या भ्रूण हत्या रोकने, पानी बचाव, बिजली बचाओ अभियान के तहत काम करने वाली पंचायतों, लड़कियों की शिक्षा तथा अन्य सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पंचायतों को जिला परिषद द्वारा पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाता है।
सरकारी अनुदान का सदुपयोग हो : डीसी
जिला उपायुक्त निखिल गजराज ने राज्य वित्त आयोग के चेयरमैन एलएसएम सालिंस सहित सभी का स्वागत करते कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही जनहित की कल्याणकारी योजनाओं, परियोजनाओं, स्कीमों और नीतियों को जिला प्रशासन द्वारा प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा पहले ही संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि सरकार द्वारा दिए जाने वाली धनराशि का सदुपयोग करें।
बैठक में इन्होंने दिए सुझाव
ब्लाक समिति थानेसर की अध्यक्ष कुसुम लता ने अपने सुझाव में कहा कि विकास कार्यों के लिए धनराशि का आंबटन आबादी के हिसाब से होना चाहिए। जिस क्षेत्र में अधिक आबादी है, वहां पर विकास कार्यों के लिए अधिक पैसा दिया जाए।
इसके साथ-साथ गांव में ग्राम पंचायत की जमीन पर सरकार द्वारा छोटे-छोटे उद्योग धंधे लगाए जाएं। स्थानीय लोगों की मांग पर मार्केट बनाई जाए ताकि बेरोजगारों को रोजगार मिल सके।
बैठक में पिपली के सरपंच वीरेंद्र तलवार, हरिपुर के सरपंच करनैल सिंह, पार्षद सुरेंद्र सिंह, जालखेड़ी तथा लोहारा के सरपंच ने भी अपने-अपने सुझाव दिए।
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में राज्य वित्त आयोग के सदस्य शिवलाल कात्याल, ब्रहमपाल राणा, आयोग के सलाहकार ज्ञान सिंह काम्बोज, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी एमएस जगत, सचिव केएल बठला, एमई अक्षय कुमार, जिला परिषद के उप-प्रधान सुभाष बटहेडी, सदस्य रामकरण, चंद्रभान, सुरेश नैन और पार्षद उपस्थित थे।
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वर्ष 2013-14 में कुल राजस्व 37 हजार करोड़ रुपये का है, जबकि टैक्स राजस्व लगभग 27 हजार करोड का है। पांच हजार करोड़ नॉन टैक्स राजस्व प्राप्त होता है, जबकि पांच हजार करोड़ की धनराशि भारत सरकार की ओर से हरियाणा सरकार को ग्रांट के रूप में मिलती है।
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यह बात चौथे वित्त आयोग के चेयरमैन एलएसएम सालिंस ने लघु सचिवालय के सभागार में आयोजित चौथे राज्य वित्त आयोग की बैठक में उपस्थित पंचायती राज संस्थाओं और अर्बन लोकल बाडीज़ के प्रतिनिधियों को संबोधित करते कही।
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सालिंस ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं और अर्बन लोकल बॉडीज़ को विकास के लिए वर्ष 2011 में हुई जनगणना के आधार पर धनराशि उपलब्ध करवाई जाती है। जनगणना के अनुसार 65 प्रतिशत देहाती क्षेत्र को तथा 35 प्रतिशत शहरी क्षेत्र को विकास के लिए धन दिया जा रहा है। चूंकि वर्ष 2011 में देहात और अर्बन का जनसंख्या अनुपात 65 और 35 प्रतिशत था।
बेचनी चाहिए 500 रुपये से कम किराए वाली दुकानें : उमा
नगर परिषद की अध्यक्ष उमा सुधा ने आयोग की ओर से मांगे गए सुझाव में कहा कि अर्बन लोकल बॉडीज के सदस्यों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि वे विकास के कार्यों में तालमेल के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
बिजली निगम की ओर से परिषद को एक प्रतिशत धनराशि दी जाती है और शहर में लाइट व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर परिषद की होती है। उन्हाेंने कहा कि बेशक बिजली वितरण निगम एक प्रतिशत न दे, लेकिन यह सारी व्यवस्था वह स्वयं संभाल लें।
उन्होंने सुझाव दिया कि कमेटी के अंतर्गत आने वाली जिन दुकानों का किराया 500 रुपये या इससे कम है, उन्हें बेच देना चाहिए।
रेहड़ी वालों के लिए जगह निर्धारित हो : सुधा
राज्य वित्त आयोग के सदस्य सुभाष सुधा ने कहा कि शहर में रेहड़ी वालों को जगह और निर्धारित मापदंड के तहत फड़ दिए जाएंगे। फड़ी और रेहड़ी लगाने वाले 20 फुट सड़क छोड़कर रेहड़ी लगा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शहर में सफाई व्यवस्था और अन्य विकास कार्य बेहतर तरीके से करवाने के लिए राज्य व केंद्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट के प्रतिशत में वृद्धि करने की जरूरत है।
विकास में तेजी के लिए धनराशि में हो वृद्धि : जिप चैयरमैन
जिला परिषद के चेयरमैन प्रवीण चौधरी ने अपने सुझावों में कहा कि देहात में विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए राजस्व से मिलने वाली धनराशि में और अधिक वृद्धि करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि केरल में वहां के राजस्व की 44 प्रतिशत धनराशि विकास कार्यों के लिए खर्च की जाती है। इस प्रकार हरियाणा में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि भी बढ़ाई जानी चाहिए।
कुरुक्षेत्र में 422 गांव हैं, जिनमें ऐसे गांव भी शामिल हैं, जहां पर विकास कार्य बहुत कम हुआ है। विकास कार्यों की राशि जनसंख्या के आधार पर मिलनी चाहिए। बहुत सी पंचायतों के पास 10 हजार रुपये से भी कम की आमदनी है और ग्राम पंचायतें अपना समुचित विकास नहीं करवा सकतीं।
उन्होंने कहा कि हर ग्राम पंचायत को कम से कम 20 लाख रुपये की धनराशि विकास कार्यों के लिए अवश्य मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायतों को पौधे निशुल्क मिलने चाहिए।
पंचायती जमीन पर रोजगार धंधे स्थापित हों
चौथे वित्त आयोग के सदस्य सचिव आरबी लांग्यान और आयोग के सदस्य सुभाष सुधा के पूछे जाने पर चौधरी ने सुझाव दिया कि देहात के विकास के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों की पंचायती जमीन पर रोजगार धंधे स्थापित किए जा सकते हैं।
वर्मी कम्पोस्ट की यूनिट स्थापित करने, कूड़ा-कर्कट का सदुपयोग करने और यदि ग्राम पंचायत की जमीन किसी शहर या कस्बे के पास पड़ती है तो वहां प्रस्ताव डालकर दुकानें आदि बनाकर आय को बढ़ाया जा सकता है।
गांव में खेल मैदान, शौचालय, पानी की व्यवस्था, बस क्यू शेल्टर, कन्या भ्रूण हत्या रोकने, पानी बचाव, बिजली बचाओ अभियान के तहत काम करने वाली पंचायतों, लड़कियों की शिक्षा तथा अन्य सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पंचायतों को जिला परिषद द्वारा पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाता है।
सरकारी अनुदान का सदुपयोग हो : डीसी
जिला उपायुक्त निखिल गजराज ने राज्य वित्त आयोग के चेयरमैन एलएसएम सालिंस सहित सभी का स्वागत करते कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही जनहित की कल्याणकारी योजनाओं, परियोजनाओं, स्कीमों और नीतियों को जिला प्रशासन द्वारा प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा पहले ही संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि सरकार द्वारा दिए जाने वाली धनराशि का सदुपयोग करें।
बैठक में इन्होंने दिए सुझाव
ब्लाक समिति थानेसर की अध्यक्ष कुसुम लता ने अपने सुझाव में कहा कि विकास कार्यों के लिए धनराशि का आंबटन आबादी के हिसाब से होना चाहिए। जिस क्षेत्र में अधिक आबादी है, वहां पर विकास कार्यों के लिए अधिक पैसा दिया जाए।
इसके साथ-साथ गांव में ग्राम पंचायत की जमीन पर सरकार द्वारा छोटे-छोटे उद्योग धंधे लगाए जाएं। स्थानीय लोगों की मांग पर मार्केट बनाई जाए ताकि बेरोजगारों को रोजगार मिल सके।
बैठक में पिपली के सरपंच वीरेंद्र तलवार, हरिपुर के सरपंच करनैल सिंह, पार्षद सुरेंद्र सिंह, जालखेड़ी तथा लोहारा के सरपंच ने भी अपने-अपने सुझाव दिए।
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में राज्य वित्त आयोग के सदस्य शिवलाल कात्याल, ब्रहमपाल राणा, आयोग के सलाहकार ज्ञान सिंह काम्बोज, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी एमएस जगत, सचिव केएल बठला, एमई अक्षय कुमार, जिला परिषद के उप-प्रधान सुभाष बटहेडी, सदस्य रामकरण, चंद्रभान, सुरेश नैन और पार्षद उपस्थित थे।