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सवा साल पहले लापता हुए बच्चे अलीगढ़ में मिले
अमर उजाला फरीदाबाद
Updated Thu, 21 Nov 2013 08:54 PM IST
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शहर के सेक्टर-21ए से करीब सवा साल पहले रहस्यमय हालातों में लापता हुए भाई-बहन का बृहस्पतिवार को अपने परिजनाें से मिलन हुआ। सीआईए बड़खल टीम ने इन बच्चों को अलीगढ़ से बरामद किया है। इस संबंध में थाना एनआईटी में अपहरण का केस दर्ज किया गया था।
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पुलिस जांच में बच्चों के अपनी मर्जी से घर छोड़कर जाने की बात सामने आई है। बच्चे यहां से हरिद्वार चले गए थे। हरिद्वार में मिले नदीम उर्फ बाबा ने बच्चों को अनाथ होना जानकर सहारा दिया था। बाबा ने अपने जानकार के घर बच्चों को अलीगढ़ में रखा हुआ था। बुधवार रात अलीगढ़ से पुलिस टीम के साथ यहां पहुंचे परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बच्चे की मां उनसे गले मिलकर बिलख पड़ीं। पुलिस ने बच्चों को परिजनों के हवाले कर दिया है।
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इस तरह मिला सुराग
सीआईए बड़खल टीम के प्रभारी विमल राय ने बताया कि बच्चाें का सुराग लगाने के लिए उन्होंने अपनी टीम के साथ दिल्ली व हरिद्वार के कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान पता लगा कि दो बच्चों को नदीम उर्फ बाबा के साथ हरिद्वार में देखा गया था। पुलिस टीम बाबा की तलाश में अजमेर पहुंची। अजमेर में चार दिन की मशक्कत के बाद बाबा को खोज निकाला गया। पूछताछ मेें बाबा ने पुलिस को बताया कि एक साल पूर्व बच्चे हरिद्वार में गंगा नदी के घाट पर उसे मिले थे। बाबा ने माता-पिता के बारे में पूछा तो बच्चों ने कुछ नहीं बताया और कहा कि उनके मां-बाप मर चुके हैं। इसलिए उन्होंने उसका पालन करने का निर्णय लिया। बाबा ने बताया कि बच्चे उसके जानकार मुस्तकीम की बेटी के घर अलीगढ़ में हैं। इस पर पुलिस ने अलीगढ़ पहुंच कर दोनों बच्चों को वहां से बरामद कर लिया।
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क्या था यह मामला
सेक्टर-21ए में रहने वाला वंश बहादुर सुरक्षा गार्ड है। उसने जुलाई 2012 में थाना एनआईटी पुलिस को बताया था कि उसका 11 वर्षीय बेटा दीपक 5वीं और सात वर्षीय बेटी अंजना तीसरी कक्षा में पढ़ती है। वह पत्नी के साथ रीवा गया था। दीपक व अंजना को वह अपने भाई राजमान के पास छोड़ गया था। 9 जुलाई 2012 को दोनों बच्चे राजमान के घर से अपने घर के लिए चले थे, लेकिन वह अपने घर पर नहीं पहुंचे। 21 अगस्त 2012 को पुलिस ने वंश बहादुर की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर लिया था।
बच्चाें ने बदल दी नदीम उर्फ बाबा की जिंदगी
नदीम उर्फ बाबा भी अनाथ है। यहां से गायब हुए यह भाई-बहन हरिद्वार में बाबा के संपर्क में आए। बच्चाें के मुंह से निकली उनके मां-बाप के मरने की बात ने उसे झकझोर कर रख दिया। बिना किसी उद्देश्य के घूमते रहने वाले नदीम की सोच में बच्चों की इस बात से बदलाव आया। बच्चों को पालने के लिए उसने होटल में बर्तन तक साफ किए। दिल्ली में रिक्शा चलाया, अजमेर में पानी बेचा। बाबा ने बताया कि लखनऊ के एक अनाथ आश्रम में उसका बचपन बीता। उसे सवा साल पहले दोनों बच्चे हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर बारिश में भीगते मिले। कुछ समय बाद इन्हीं बच्चाें को हरिद्वार में गंगा नदी में पैसे तलाशते हुए देखा। बाद में वह उसकी परवरिश करने लगा। नदीम ने बताया कि बच्चों के खर्च के लिए वह प्रत्येक माह दिल्ली आकर मुस्तकीम को एक हजार रुपये देता था। बच्ची को अलीगढ़ के एक मदरसे में दाखिला दिलवा रखा था। आज बच्चों के मां-बाप से मिलने पर नदीम काफी खुश है।