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आश्रम में महिलाओं, पुरुषों को भ्रमित किया जा रहा
अमर उजाला
Updated Tue, 26 Dec 2017 12:14 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बाबा वीरेंद्र देव के आश्रम में आध्यात्मिक शिक्षा परोसने के नाम पर महिलाओं, युवतियों को छला जा रहा है। ज्ञान बांटने के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है। यह सनसनीखेज खुलासा सोमवार को हुआ। न्यायपीठ बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष और आशा ज्योति केंद्र के सदस्यों ने कंपिल स्थित बाबा वीरेंद्र देव आश्रम में सेवादारों और संवासिनियों के बयान लिए। हालांकि संवासिनियों ने उनको आश्रम का निरीक्षण नहीं करने दिया। पूछताछ के बाद टीम लौट आई। न्यायपीठ के अध्यक्ष ने बताया कि आश्रम में जो शिक्षा दी जा रही है, उसका कोई उपयोग नहीं है। यह सिर्फ युवतियों, महिलाओं और पुरुषों को भ्रमित करने की शिक्षा है। इस संबंध में शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
न्यायपीठ बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डा. संजीव गंगवार सोमवार को आशा ज्योति केंद्र की सुगमकर्मा ज्योति शर्मा, हिमांशी गंगवार, रेखा शर्मा और महिला होमगार्ड के साथ कंपिल स्थित आश्रम का निरीक्षण करने पहुंचे। पुलिस कर्मियों की मदद से टीम आश्रम में दाखिल हुई। टीम ने जब आश्रम का निरीक्षण करने की बात कही तो संवासिनियों ने विरोध करना शुरू कर दिया। अध्यक्ष ने आश्रम में मौजूद सेवादार और संवासिनियों के बयान लिए। अध्यक्ष डा. संजीव गंगवार ने बताया कि आश्रम में कोई नाबालिग नहीं है। सभी बालिग है। वह अपनी इच्छा से रह रही हैं। उन्होंने बताया कि आश्रम के नाम पट्टिका में विश्वविद्यालय लिखा है, वह गलत है। यहां विश्वविद्यालय जैसी कोई बात नहीं है। इस आश्रम में किसी प्रकार की उपयोगी शिक्षा नहीं दी जाती है। युवतियों, महिलाओं कौर पुरुषों को भ्रमित करने संबंधी शिक्षा के नाम पर ज्ञान दिया जाता है। जो गलत है, आश्रम के खिलाफ कार्रवाई किए जाने को डीएम, महिला आयोग और शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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न्यायपीठ बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डा. संजीव गंगवार सोमवार को आशा ज्योति केंद्र की सुगमकर्मा ज्योति शर्मा, हिमांशी गंगवार, रेखा शर्मा और महिला होमगार्ड के साथ कंपिल स्थित आश्रम का निरीक्षण करने पहुंचे। पुलिस कर्मियों की मदद से टीम आश्रम में दाखिल हुई। टीम ने जब आश्रम का निरीक्षण करने की बात कही तो संवासिनियों ने विरोध करना शुरू कर दिया। अध्यक्ष ने आश्रम में मौजूद सेवादार और संवासिनियों के बयान लिए। अध्यक्ष डा. संजीव गंगवार ने बताया कि आश्रम में कोई नाबालिग नहीं है। सभी बालिग है। वह अपनी इच्छा से रह रही हैं। उन्होंने बताया कि आश्रम के नाम पट्टिका में विश्वविद्यालय लिखा है, वह गलत है। यहां विश्वविद्यालय जैसी कोई बात नहीं है। इस आश्रम में किसी प्रकार की उपयोगी शिक्षा नहीं दी जाती है। युवतियों, महिलाओं कौर पुरुषों को भ्रमित करने संबंधी शिक्षा के नाम पर ज्ञान दिया जाता है। जो गलत है, आश्रम के खिलाफ कार्रवाई किए जाने को डीएम, महिला आयोग और शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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