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सफेद मक्खी का नरमा फसल पर फिर हमला
fatehabad
Updated Sat, 11 Jun 2016 11:16 PM IST
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सुरेंद्र असीजा
नरमा उत्पादक किसानों को एक बार फिर झटका लगा है। पूरे जिले में नरमा की फसल पर सफेद मक्खी ने आक्रमण कर दिया है। हालांकि, अभी तक नरमे की फसल एक-डेढ़ महीने की है, लेकिन नरमा के पौधे के पत्तों के पीछे सफेद मक्खी का असर साफ देखा जा सकता है। इस कारण किसान सांसत में हैं। वहीं, पिछले साल सफेद मक्खी के कारण खराब हुई फसल का अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। कृषि विशेषज्ञ नरमे पर सफेद मक्खी का प्रकोप होने की बात को स्वीकार कर रहे हैं।
जिले में इस बार करीब 70 हजार हेक्टेयर भूमि पर नरमा की बिजाई की गई है। जबकि 2015 में नरमा का रकबा 79 हजार हेक्टेयर था। अभी नरमे की फसल एक-डेढ़ महीने की है, लेकिन अभी से सफेद मक्खी ने हमला बोल दिया है। गांव जांडली के किसान पवन कुमार ने बताया कि पिछले सप्ताह से उसके खेत में फसल पर सफेद मक्खी का असर दिख रहे है। किसान इस सांसत में हैं कि फसल को रखें या उखाड़ें। गांव जमालपुर के ईश्वर सिंह ने बताया कि उसके खेत में नरमे के पौधे पर सफेद मक्खी का असर दिख रहा है, लेकिन अभी तक उसके समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए। बीते साल भी उसकी 75 फीसदी फसल सफेद मक्खी की भेंट चढ़ गई थी, जिसका अभी तक मुआवजा नहीं मिला है।
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सब्जियों से नरमे पर पहुंची सफेद मक्खी
सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी मुकेश महला ने बताया कि पिछले महीने तक सफेद मक्खी सब्जियां पर बैठी हुई थीं, जिसमें बैंगन, भिंडी, टमाटर, मिर्च, घीया, तोरी पर प्रमुख रूप से थी। अब यह फसल खत्म हो रही है तो सफेद मक्खी नरमे के पौधे पर आ गई। महला ने किसानों को सलाह दी कि वे अभी कीटनाशक का छिड़काव न करें। अगर ज्यादा जरूरी है तो पहला छिड़काव नीम की दवाई का किया जाए। एक लीटर प्रति एकड़ नीम की दवाई डाली जाए। अगर एक पौधे पर 6 से 8 मक्खी दिखें तो ही छिड़काव किया जाए।
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पूरे जिले में है प्रकोप
कृषि उपनिदेश बलवंत सिंह सहारण ने बताया कि पूरे जिले में इसका प्रकोप है लेकिन तेज हवा के साथ बारिश आती है तो सफेद मक्खी खत्म हो जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी प्रति पौधे पर एक-दो मक्खी का ही प्रकोप है, जबकि पिछली बारी इनकी संख्या 10-12 के बीच थी। सहारण ने कहा कि अभी इसका इतना भय नहीं है।
अभी तक नहीं मिला पिछले साल का मुआवजा
पिछले वर्ष प्रदेश भर में नरमे की फसल पर सफेद मक्खी के प्रकोप की खबरों के बाद सीएम मनोहर लाल खट्टर ने विधानसभा के पटल पर सफेद मक्खी प्रभावित फसल की गिरदावरी का एलान किया था। साथ ही उन्होंने कृषि और राजस्व विभाग को निर्देश दिए थे कि 30 सितंबर तक हर हाल में गिरदावरी की रिपोर्ट उनके पास पहुंच जाए। लेकिन अधिकारियों की ढिलाई के चलते ये रिपोर्ट बार-बार लटकती रही। अभी तक प्रदेश सरकार ने सभी प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं बांटा।
फतेहाबाद में 79 हजार हेक्टेयर भूमि की फसल हुई थी प्रभावित
2015 में फतेहाबाद जिले में कुल 79 हजार 185 हेक्टेयर भूमि पर नरमे की फसल बीजी गई थी। बरसात ना होने के कारण सफेद मक्खी का प्रकोप लगातार बढ़ता गया। बाद में कृषि विभाग ने अपने स्तर पर जो रिपोर्ट तैयार की थी, उसमें विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि जिले में सफेद मक्खी का प्रकोप बिलो ईटीएल (इकोनामिक ट्रेशहोल्ड लेवल) को पार कर गया था। सफेद मक्खी के प्रकोप के चलते फसलों की दुर्दशा से किसान इस कदर हतोत्साहित हो चुके थे कि दरियापुर, गोरखपुर, कुम्हारिया, बैजलपुर, समैण और भट्टू के कई गांवों में किसानों ने फसलें उखाड़ दी थीं।
2015 में इतना हुआ था नुकसान
25 फीसदी से कम नुकसान वाला एरिया : 65553 हेक्टेयर
26 से 50 फीसदी नुकसान वाला एरिया : 12087 हेक्टेयर
51 से 75 फीसदी नुकसान वाला एरिया : 1126
75 से ऊपर नुकसान वाला एरिया : 419 हेक्टेयर