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Fatehabad News: किडनी के इलाज के लिए पैसे जुटा सकें, इसलिए रेहड़ी पर पिता का हाथ बंटाती है अनीशा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Mar 2023 10:51 PM IST
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To raise money for kidney treatment, Anisha helps her father on street vendors
टोहाना में गोलगप्पे की रेहड़ी पर पिता के साथ काम करती अनीशा।
टोहाना। कोई भी विषम परिस्थिति इंसान के हौसले से बढ़कर नहीं है। यही संदेश दे रही है टोहाना की 16 साल की अनीशा। अनीशा की एक किडनी नहीं है। इलाज के लिए पर्याप्त पैसे जुटा सकें, इसलिए अनीशा अपने पिता की गोलगप्पे की रेहड़ी पर हाथ बंटा रही है। पिता भी दिन में 17 घंटे काम करते हैं। सुबह सब्जी की रेहड़ी लगाते हैं तो शाम को गोलगप्पे बेचते हैं। मासूम सी अनीशा पिता के साथ लोगों को गोलगप्पे परोसती है, तो हर कोई उसके हौसले को सलाम करने लगता है।
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भाटिया नगर में किराये पर रह रहे अनीशा के पिता ओमप्रकाश बताते हैं कि उनके तीन बच्चे हैं, दो बेटी व एक बेटा। मंझली बेटी अनीशा के चार साल पहले पेट में दर्द हुआ। वह उसे अस्पताल लेकर गए तो पता चला कि अनीशा की एक किडनी नहीं है। बेटी की परेशानी बढ़ी तो वह उसे दिल्ली, चंडीगढ़ के अस्पतालों में इलाज के लिए लेकर गए। अब भी चंडीगढ़ पीजीआई से अनीशा का इलाज चल रहा है। अनीशा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 11वीं में पढ़ती है। संवाद
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इलाज का खर्च अधिक, इसलिए दिन में 17 घंटे काम कर रहे पिता
ओमप्रकाश ने बताया कि उसकी बेटी के इलाज में एक महीने में करीब बीस हजार खर्च आता है। वह सुबह पांच बजे सब्जी मंडी से सब्जी लेकर आता है, जिसके बाद दोपहर दो बजे तक सब्जी बेचता है। जब घर का गुजारा चलना मुश्किल हुआ तो उसने 15 दिन पहले शाम के समय गोलगप्पे की रेहड़ी लगाने का फैसला किया। इसमें उसकी पत्नी, दोनों बेटियां व बेटा हार्दिक भी हाथ बंटाते हैं। गोलगप्पे बनाना का सामान भी बाजार से खुद अनीशा ही लेकर आती है। शाम को गोलगप्पे बेचने में मदद करती है। ओमप्रकाश ने बताया कि पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली की ओर से एक बार मदद मिली थी, जिससे बेटी का इलाज करवाया था। अगर सरकार उसकी बेटी का चंडीगढ़ पीजीआई में शीघ्र ऑपरेशन करवा दें तो उसकी बेटी भी सामान्य जीवन जी सकेगी।
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सीए बनना चाहती है अनीशा
अनीशा ने बताया कि उसकी बड़ी बहन 12वीं पास है तथा भाई कक्षा चौथी में पढ़ता है। उसने कक्षा दसवीं में 71 फीसदी अंक हासिल किए हैं, अब वह सीए बनना चाहती है।

आप भी कर सकते हैं मदद
टोहाना शहर की यह बेटी विषम परिस्थितियों में भी हौसले नहीं हार रही है। ऐसी बेटी के जज्बे को सलाम करते हुए अमर उजाला भी आह्वान करता है कि इस बेटी के सपने महज इलाज के अभाव में नहीं टूटने चाहिए। इसलिए टोहानावासी बेटी की मदद के लिए आगे आएं।
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