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Fatehabad News: जिले में जौ फसल की नहीं सरकारी खरीद, किसानों को एमएसपी से ज्यादा मिल रहा भाव
Fri, 28 Mar 2025 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 28 Mar 2025 11:20 PM IST
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फतेहाबाद की पुरानी अनाज मंडी में खरीदकर सुखने के लिए बिछाई गई जौ कि फसल। संवाद
फतेहाबाद। जिले में इन दिनों जौ व सरसों की कटाई का काम जोरों पर है। वहीं मंडियों में भी इन फसलों की आवक इस सप्ताह से शुरू हो चुकी है। केंद्र सरकार की और से जौ और सरसों की फसल पर एमएसपी लागू है।
मंडियों में जौ फसल की एमएसपी पर खरीद नहीं की जा रहा है। इसके बावजूद भी किसानों को मंडी में जौ की फसल का एमएसपी से ज्यादा भाव मिल रहा है। इसका मुख्य कारण जिले में जौ की फसल का रकबा कम होना बताया जा रहा है। बता दें कि सरकार की ओर से 24 प्रकार की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की गांरटी दी गई है। जिसमें जौ कि फसल को भी शामिल किया गया है।
इस बार मंडियों में जौ की फसल को एमएसपी पर नहीं खरीद शुरू नहीं की गई है। हालांकि किसानों को इस बार जौ की फसल का भाव एमएसपी से ऊपर मिल रहा है। ऐसे में किसान निजी खरीदारों के पास ही फसल लेकर पहुंच रहे हैं। जौ का सरकारी समर्थन मूल्य यानी एमएसपी तो 1980 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन इस समय मंडियाें में यह फसल 2050 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रही है।
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मंडियों में अब तक करीब 400 क्विंटल जौ की फसल बिक चुकी है। इसका मुख्य कारण जौ की फसल के रकबे में कमी होना माना जा रहा है। जिले में पिछले वर्ष जहां 6550 एकड़ में जौ कि फसल की बुवाई हुई थी। वहीं इस बार जिले में 4280 एकड़ में जौ की फसल की बुवाई हुई है। ऐसे में इस बार कम उत्पादन की आशंका में निजी खरीदार भी जौ की फसल को तुरंत खरीद रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से एक अप्रैल से ही गेहूं की खरीद भी शुरू करने आदेश जारी होने की उम्मीद है।
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दो एकड़ की जौ की फसल लेकर वीरवार को अनाज में मंडी में पहुंचा था। फसल का भाव मुझे 2010 रुपये प्रति क्विंटल मिला है। सरकारी के खरीद के लिए पता किया था, लेकिन मुझे कोई सरकारी खरीदार नहीं मिला है। ऐसे में मैंने निजी व्यापारियों को अपनी फसल बेची है।
- बीर सिंह, किसान, अकांवाली
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इस बार केवल एकड़ में जौ की फसल की बुवाई की थी, जिसको मुझे दो हजार रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला है। हालांकि जौ की सरकारी खरीद करने वाला मुझे कोई व्यापारी नहीं मिला। मंडी में मुझे जौ फसल का भाव एमएसपी से ज्यादा मिला है।
- किसान पवन, जांडली कलां।
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दो दिन पहले ही जौ की फसल निकलवाई थी। जौ में नमी की मात्रा ज्यादा होने के कारण इसे 1950 के भाव से बेचना पड़ा। अगर मुझे मेरी फसल का कोई सरकारी खरीदार मिलता तो मैं इसे निजी व्यापारियों को नहीं बेचता।
- किसान जगजीत, निवासी फतेहाबाद।
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:: जौ की फसल के लिए कोई मंडी नहीं आया है। ऐसे में जौ की फसल की सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई है।
-विनीत जैन, जिला खाद्य आपूर्ति एवं नियंत्रक अधिकारी, फतेहाबाद।
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मंडियों में जौ फसल की एमएसपी पर खरीद नहीं की जा रहा है। इसके बावजूद भी किसानों को मंडी में जौ की फसल का एमएसपी से ज्यादा भाव मिल रहा है। इसका मुख्य कारण जिले में जौ की फसल का रकबा कम होना बताया जा रहा है। बता दें कि सरकार की ओर से 24 प्रकार की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की गांरटी दी गई है। जिसमें जौ कि फसल को भी शामिल किया गया है।
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इस बार मंडियों में जौ की फसल को एमएसपी पर नहीं खरीद शुरू नहीं की गई है। हालांकि किसानों को इस बार जौ की फसल का भाव एमएसपी से ऊपर मिल रहा है। ऐसे में किसान निजी खरीदारों के पास ही फसल लेकर पहुंच रहे हैं। जौ का सरकारी समर्थन मूल्य यानी एमएसपी तो 1980 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन इस समय मंडियाें में यह फसल 2050 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रही है।
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मंडियों में अब तक करीब 400 क्विंटल जौ की फसल बिक चुकी है। इसका मुख्य कारण जौ की फसल के रकबे में कमी होना माना जा रहा है। जिले में पिछले वर्ष जहां 6550 एकड़ में जौ कि फसल की बुवाई हुई थी। वहीं इस बार जिले में 4280 एकड़ में जौ की फसल की बुवाई हुई है। ऐसे में इस बार कम उत्पादन की आशंका में निजी खरीदार भी जौ की फसल को तुरंत खरीद रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से एक अप्रैल से ही गेहूं की खरीद भी शुरू करने आदेश जारी होने की उम्मीद है।
दो एकड़ की जौ की फसल लेकर वीरवार को अनाज में मंडी में पहुंचा था। फसल का भाव मुझे 2010 रुपये प्रति क्विंटल मिला है। सरकारी के खरीद के लिए पता किया था, लेकिन मुझे कोई सरकारी खरीदार नहीं मिला है। ऐसे में मैंने निजी व्यापारियों को अपनी फसल बेची है।
- बीर सिंह, किसान, अकांवाली
इस बार केवल एकड़ में जौ की फसल की बुवाई की थी, जिसको मुझे दो हजार रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला है। हालांकि जौ की सरकारी खरीद करने वाला मुझे कोई व्यापारी नहीं मिला। मंडी में मुझे जौ फसल का भाव एमएसपी से ज्यादा मिला है।
- किसान पवन, जांडली कलां।
दो दिन पहले ही जौ की फसल निकलवाई थी। जौ में नमी की मात्रा ज्यादा होने के कारण इसे 1950 के भाव से बेचना पड़ा। अगर मुझे मेरी फसल का कोई सरकारी खरीदार मिलता तो मैं इसे निजी व्यापारियों को नहीं बेचता।
- किसान जगजीत, निवासी फतेहाबाद।
:: जौ की फसल के लिए कोई मंडी नहीं आया है। ऐसे में जौ की फसल की सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई है।
-विनीत जैन, जिला खाद्य आपूर्ति एवं नियंत्रक अधिकारी, फतेहाबाद।