{"_id":"67030e046439cb3d040fdfc9","slug":"the-shared-bread-bank-was-closed-the-very-next-day-of-voting-fatehabad-news-c-127-1-ftb1003-123374-2024-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: चुनाव के दौरान खूब चला साझा रोटी बैंक, मतदान के अगले ही दिन हो गया बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: चुनाव के दौरान खूब चला साझा रोटी बैंक, मतदान के अगले ही दिन हो गया बंद
Mon, 07 Oct 2024 03:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 07 Oct 2024 03:54 AM IST
विज्ञापन
फतेहाबाद के जीटी रोड पर एक प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय के पास बने साझा रोटी बैंक में मतदान से प
फतेहाबाद। शहर के जीटी रोड पर स्थित एक प्रत्याशी के कार्यालय के पास बना साझा रोटी बैंक मतदान के अगले ही दिन बंद हो गया। चुनाव के दौरान पिछले 20-25 दिन से यह साझा रोटी बैंक खूब चल रहा था। यहां दिनभर पांच हजार से अधिक लोग खाना खा रहे थे लेकिन मतदान के अगले ही दिन रोटी बैंक बंद होने से शहर में चर्चाएं रही कि भोजन के नाम पर भी राजनीति कर दी गई है।
चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार में 40 लाख रुपये खर्च करने की अनुमति दी गई थी। प्रत्याशियों को अपना खर्च इसी निर्धारित राशि में दर्शाना है। इसलिए खर्च को कम दर्शाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए गए।
शहर में चर्चा है कि विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं को भोजन करवाने के लिए प्रत्याशियों ने दोपहर और शाम के लिए खाने की व्यवस्था की थी। नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही रोजाना हजारों आदमियों का खाना बनना शुरू हो गया था। इस पर रोजाना एक दिन का ही काफी खर्च आया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस प्रत्याशी ने खर्च को कम दर्शाने के इरादे से रोटी बैंक का सहारा लिया।
विज्ञापन
इस प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय के बिल्कुल साथ यह रोटी बैंक बनाया गया था। इस प्रत्याशी के कार्यकर्ताओं ने भी इस रोटी बैंक में भोजन किया। मतदान संपन्न होने के साथ ही अब रविवार को यहां से सभी प्रकार के खाद्य सामग्री और रोटी बनाने के लिए बनाए गए चूल्हे गायब हो गए। चुनाव आयोग के निर्धारित मापदंडों के अनुसार एक व्यक्ति के एक समय के खाने के रेट 90 रुपये तय किए गए थे। ऐसे में अगर प्रत्याशी रोटी बैंक का सहारा न लेता तो शायद 40 लाख रुपये का खर्च तो सिर्फ भोजन का ही हो जाता।
विज्ञापन
चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार में 40 लाख रुपये खर्च करने की अनुमति दी गई थी। प्रत्याशियों को अपना खर्च इसी निर्धारित राशि में दर्शाना है। इसलिए खर्च को कम दर्शाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए गए।
विज्ञापन
शहर में चर्चा है कि विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं को भोजन करवाने के लिए प्रत्याशियों ने दोपहर और शाम के लिए खाने की व्यवस्था की थी। नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही रोजाना हजारों आदमियों का खाना बनना शुरू हो गया था। इस पर रोजाना एक दिन का ही काफी खर्च आया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस प्रत्याशी ने खर्च को कम दर्शाने के इरादे से रोटी बैंक का सहारा लिया।
विज्ञापन
इस प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय के बिल्कुल साथ यह रोटी बैंक बनाया गया था। इस प्रत्याशी के कार्यकर्ताओं ने भी इस रोटी बैंक में भोजन किया। मतदान संपन्न होने के साथ ही अब रविवार को यहां से सभी प्रकार के खाद्य सामग्री और रोटी बनाने के लिए बनाए गए चूल्हे गायब हो गए। चुनाव आयोग के निर्धारित मापदंडों के अनुसार एक व्यक्ति के एक समय के खाने के रेट 90 रुपये तय किए गए थे। ऐसे में अगर प्रत्याशी रोटी बैंक का सहारा न लेता तो शायद 40 लाख रुपये का खर्च तो सिर्फ भोजन का ही हो जाता।