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Fatehabad News: किसान नेताओं की गिरफ्तारी नोटिस पर सभा ने जताया रोष
Thu, 26 Mar 2026 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 26 Mar 2026 11:49 PM IST
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फतेहाबाद। दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में किसान नेताओं को गिरफ्तारी नोटिस मिलने से किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। अखिल भारतीय किसान सभा ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे किसानों के साथ विश्वासघात बताया है।
सभा के अनुसार हिसार क्षेत्र से किसान नेता संदीप धीरणवास समेत कई किसानों पर हत्या सहित गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमों में अब गिरफ्तारी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इससे किसान संगठनों में रोष फैल गया है और सरकार की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं। जिला प्रधान विष्णुदत्त शर्मा और सचिव राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए थे।
आंदोलन के स्थगन के समय केंद्र और हरियाणा सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने के साथ ही किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे खत्म करने का लिखित आश्वासन दिया था। नेताओं ने आरोप लगाया कि अब पुराने मामलों में गिरफ्तारी नोटिस भेजकर उस आश्वासन की अनदेखी की जा रही है। इससे स्पष्ट होता है कि किसानों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
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किसान सभा ने चेतावनी दी कि यदि ऐसे कदम वापस नहीं लिए गए तो किसान फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे। उन्होंने मांग की कि सभी लंबित मामलों को तुरंत समाप्त किया जाए और किसानों के साथ किए गए वादों का पालन किया जाए।
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सभा के अनुसार हिसार क्षेत्र से किसान नेता संदीप धीरणवास समेत कई किसानों पर हत्या सहित गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमों में अब गिरफ्तारी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इससे किसान संगठनों में रोष फैल गया है और सरकार की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं। जिला प्रधान विष्णुदत्त शर्मा और सचिव राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए थे।
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आंदोलन के स्थगन के समय केंद्र और हरियाणा सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने के साथ ही किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे खत्म करने का लिखित आश्वासन दिया था। नेताओं ने आरोप लगाया कि अब पुराने मामलों में गिरफ्तारी नोटिस भेजकर उस आश्वासन की अनदेखी की जा रही है। इससे स्पष्ट होता है कि किसानों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
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किसान सभा ने चेतावनी दी कि यदि ऐसे कदम वापस नहीं लिए गए तो किसान फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे। उन्होंने मांग की कि सभी लंबित मामलों को तुरंत समाप्त किया जाए और किसानों के साथ किए गए वादों का पालन किया जाए।