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चार महीने पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सील की थी फैक्टरी, फिर भी चलती रही

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jul 2022 11:12 PM IST
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The factory was sealed by the Pollution Control Board four months ago, yet it continued to run.
गांव नागपुर में फैक्टरी जहां रखे है पुराने टायर। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। गांव नागपुर से मढ़ रोड पर लगी टायर फैक्टरी चार महीने पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने सील कर दी थी। इसके बावजूद फैक्टरी चलती रही और इसमें टायरों से तेल निकालने का काम होता रहा। हैरानी की बात ये है कि फैक्टरी सील करने के कुछ दिन बाद ही दोबारा से काम शुरू कर दिया गया, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी।
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बता दें कि बुधवार को रतिया के गांव नागपुर में मढ़ रोड पर स्थित जैन ग्रुप एवं इंडस्ट्री के नाम से चल रही टायर से तेल निकालने की फैक्टरी में हादसा हो गया। बायलर का ढक्कन खोलने के दौरान विस्फोट होने से सात मजदूर झुलस गए। इनमें से तीन मजदूर गंभीर रूप झुलस गए। जिन्हें फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में लाया गया। यहां से तीनों को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को तो बुधवार को हुए हादसे की देर शाम तक भी सूचना नहीं थी। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही हो रही है।
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ग्रामीणों ने किया था विरोध, तब आई थी बोर्ड की टीम
आसपास के ग्रामीण इस फैक्टरी के लगने को लेकर विरोध जताते रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर फैक्टरी चलाई जा रही है। जब इस फैक्टरी को लगाया जा रहा था, तब भी ग्रामीणों ने विरोध किया था। मगर फिर भी प्रशासन द्वारा यहां पर फैक्टरी लगाने से पहले कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब सात मजदूरों के झुलसने के बाद एसडीएम राजेश कुमार व अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।
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आसपास में रात को बढ़ जाता है प्रदूषण
सीएम विंडो पर फैक्टरी को लेकर शिकायत देने वाले ग्रामीण प्रेम कुमार बताते हैं कि तीन-चार साल से जैन ग्रुप इंडस्ट्री के नाम से पुराने टायरों में से तेल निकालने की फैक्टरी चल रही थी, जिसमें करीब 20 मजदूर काम करते हैं। इन मजदूरों के लिए यहीं पर रिहायश की व्यवस्था की हुई है। प्रेम कुमार के अनुसार रात को फैक्टरी की तपिश से आसपास के क्षेत्र में काफी गर्मी हो जाती है। प्रदूषण का स्तर भी बढ़ जाता है। इसलिए शिकायत सीएम विंडो पर की गई थी। प्रेम कुमार का आरोप है कि सीएम विंडो लगाने के बाद हिसार से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने आकर फैक्टरी सील करवा दी थी। मगर उसके कुछ दिन बाद ही काम फिर शुरू हो गया। कुछ दिन पहले भी पुलिस को फैक्टरी को लेकर शिकायत की गई थी। इसके बाद पुलिस मौके पर आकर कार्रवाई का आश्वासन देकर चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के चलते यह घटना घटी है। अगर समय रहते लगाम लगाई जाती तो मजदूर झुलसने से बच जाते।
कोट
5 लाख जुर्माना भरने पर खुलेगी सील : एसडीओ
इस टायर फैक्टरी को हमने करीब चार महीने पहले सील कर दिया था। फैक्टरी मालिक द्वारा पांच लाख रुपये का जुर्माना भरने के बाद ही सील खुलेगी। यह जुर्माना भरने के लिए एक महीने का समय दिया गया था। हमारे पास मजदूरों के झुलसने की सूचना नहीं है।

सुनील श्योराण, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
कोट
फैक्टरी में मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली गई है। ग्रामीणों और फैक्टरी मालिकों से पूछताछ की गई है। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-राजेश कुमार, एसडीएम, फतेहाबाद

गांव नागपुर में हुए फैक्टरी हादसे में घायल मजदूर।

गांव नागपुर में हुए फैक्टरी हादसे में घायल मजदूर।- फोटो : Fatehabad

गांव नागपुर में फैक्टरी हादसे की सूचना के बाद पहुंचे एसडीएम राजेश कुमार।

गांव नागपुर में फैक्टरी हादसे की सूचना के बाद पहुंचे एसडीएम राजेश कुमार।- फोटो : Fatehabad

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