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Fatehabad News: गोपियों के कृष्ण प्रेम और विरह प्रसंग ने भक्तों को किया भावविभोर
Sun, 04 Oct 2026 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 04 Oct 2026 12:49 AM IST
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फतेहाबाद में श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत करते कलाक
फतेहाबाद। बीघड़ रोड स्थित श्री योग अनुभव मंदिर में पितृ पक्ष के अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हो रहा है। कथा के छठे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। कथा व्यास साध्वी शांत योगानंद ने गोपियों के कृष्ण प्रेम का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि नंद बाबा के द्वार पर गोपियों का तांता लगा रहता था। प्रत्येक गोपी अपने गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए कृष्ण के घर आने की प्रार्थना करती थी। साध्वी ने कहा कि गृहस्थ होना बुरा नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में आसक्त होना बुरा है। मनुष्य को दैनिक कार्य करते हुए भी प्रभु का स्मरण बनाए रखना चाहिए, तभी जीवन सार्थक होगा।
साध्वी शांत योगानंद ने गोपियों के विरह प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कृष्ण ने गोपियों की पुकार पर प्रकट होकर महारास रचाया। व्यासपीठ से गोपी-उद्धव संवाद का जीवंत वर्णन किया गया, जिससे श्रद्धालु भावुक हो उठे। कथा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। इस झांकी ने श्रद्धालुओं को आनंदित किया और वातावरण वृंदावनमय हो गया।
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साध्वी शांत योगानंद ने कहा कि जो भक्त भगवान के उत्सव में शामिल होकर आनंद लेते हैं। उनके जीवन में सदैव उत्सव बना रहता है। मंच संचालक नरोत्तम दास ने कथा के समापन की जानकारी दी। कथा का समापन 4 अक्तूबर, रविवार को भंडारे के साथ होगा। भंडारा शाम साढ़े 3 बजे से साढ़े 6 बजे तक चलेगा।
संतों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
समापन अवसर पर परमहंस श्री योग दरबार के वरिष्ठ संत श्री कंवलानंद व्यासपीठ पर विराजमान होंगे। वे अपनी मंडली सहित उपस्थित रहेंगे और श्रद्धालुओं से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया। इस अवसर पर पार्षद नीलम आहूजा और पार्षद निलांशी शर्मा ने आशीर्वाद प्राप्त किया। सुरेंद्र बत्तरा, कृष्णलाल आहूजा और डॉ. निशा तनेजा भी व्यासपीठ से आशीर्वाद लेने वालों में शामिल थे।
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उन्होंने बताया कि नंद बाबा के द्वार पर गोपियों का तांता लगा रहता था। प्रत्येक गोपी अपने गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए कृष्ण के घर आने की प्रार्थना करती थी। साध्वी ने कहा कि गृहस्थ होना बुरा नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में आसक्त होना बुरा है। मनुष्य को दैनिक कार्य करते हुए भी प्रभु का स्मरण बनाए रखना चाहिए, तभी जीवन सार्थक होगा।
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साध्वी शांत योगानंद ने गोपियों के विरह प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कृष्ण ने गोपियों की पुकार पर प्रकट होकर महारास रचाया। व्यासपीठ से गोपी-उद्धव संवाद का जीवंत वर्णन किया गया, जिससे श्रद्धालु भावुक हो उठे। कथा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। इस झांकी ने श्रद्धालुओं को आनंदित किया और वातावरण वृंदावनमय हो गया।
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साध्वी शांत योगानंद ने कहा कि जो भक्त भगवान के उत्सव में शामिल होकर आनंद लेते हैं। उनके जीवन में सदैव उत्सव बना रहता है। मंच संचालक नरोत्तम दास ने कथा के समापन की जानकारी दी। कथा का समापन 4 अक्तूबर, रविवार को भंडारे के साथ होगा। भंडारा शाम साढ़े 3 बजे से साढ़े 6 बजे तक चलेगा।
संतों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
समापन अवसर पर परमहंस श्री योग दरबार के वरिष्ठ संत श्री कंवलानंद व्यासपीठ पर विराजमान होंगे। वे अपनी मंडली सहित उपस्थित रहेंगे और श्रद्धालुओं से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया। इस अवसर पर पार्षद नीलम आहूजा और पार्षद निलांशी शर्मा ने आशीर्वाद प्राप्त किया। सुरेंद्र बत्तरा, कृष्णलाल आहूजा और डॉ. निशा तनेजा भी व्यासपीठ से आशीर्वाद लेने वालों में शामिल थे।