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17.83 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य, सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं
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इस साल बरसाती सीजन में वन विभाग ने जिले में 17 लाख 83 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। यह वन विभाग का अच्छा प्रयास है। मगर संकट ये है कि पौधों की देखरेख व सुरक्षा के खास इंतजाम नहीं है। वन विभाग के पास इतने संसाधन नहीं है कि तमाम पौधों के लिए ट्री गार्ड लगाए जा सकें। आलम ये है कि पौधरोपण के बाद 90 फीसदी पौधे पेड़ बनने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि एक लाख पौधों में से 10 हजार ही पेड़ बन पाते हैं।
सामाजिक संस्थाओं का मानना है कि प्रशासन को पौधरोपण के आंकड़े बढ़ाने की बजाय पौधों की सुरक्षा व देखरेख पर ध्यान देना चाहिए। पौधे ऐसी जगह लगाए जाएं, जहां पर उन्हें समय पर पानी दिया जा सके और पशु नुकसान न पहुंचाएं। बता दें कि वन विभाग पौधे तैयार करता है। जितने संभव हों, उतने पौधे विभाग खुद लगाता है। बाकी के पौधे पंचायत विभाग, नगर परिषद, नहरी विभाग, शिक्षा विभाग व सामाजिक संस्थाओं को भेंट कर देता है, जिनके पास पौधरोपण के लिए पर्याप्त जगह हो। वे विभाग जन सहयोग से पौधरोपण करते हैं। संवाद
नहीं लग पाते सारे पौधे
प्रशासन द्वारा पेश किए जाने वाले आंकड़े नर्सरी में तैयार होने वाले पौधों के आधार पर जारी होते हैं। मगर जमीनी हकीकत ये है कि तमाम पौधे लग नहीं पाते। वन विभाग के पास अपने 27 कर्मचारी हैं, जो पौधरोपण करते हैं। इन्हीं पर देखरेख का जिम्मा होता है। प्रत्येक कर्मचारी दिन में 100 पौधे भी लगाए तो रोजाना 2700 पौधे लग सकते हैं। एक महीने में 81 हजार व तीन महीने में 2 लाख 43 हजार पौधे लगा सकते हैं। अन्य विभाग ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते। इसलिए मुश्किल से 10 लाख पौधे लग पाते हैं। बाकी के पौधे सूख ही जाते हैं।
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इन कारणों से नष्ट होते हैं पौधे
लावारिस पशु खा जाते हैं।
पानी के अभाव में सूख जाते हैं।
खेतों में आग लगाने से जल जाते हैं।
कृषि यंत्रों से कुचले जाते हैं।
पेड़ बनने से पहले दीमक लग जाती है।
खेतों में पेस्टीसाइड के कारण सूख जाते हैं।
वन विभाग की अपनी सीमा
यूं तो वन कर्मी भी पौधों को पानी देते हैं। मगर उनका दायरा सीमित है। वे शहरी क्षेत्र व सड़कों के किनारे लगे पेड़ों की ही देखभाल कर पाते हैं। मगर गांवों, सरकारी भवनों, स्कूलों व अन्य विभागों की जमीन पर लगे पौधों की देखभाल कर पाना वन कर्मियों के बस की बात नहीं रहती है।
कोट
पौधों की सुरक्षा जरूरी : जय सिंघल
हमारी संस्था हर साल पौधरोपण करती है। हमें यह ध्यान रखना जरूरी है कि पौधे सुरक्षित रहेंगे या नहीं। दस लोग एक पौधा लगा फोटो करवा लें और अगले दिन पौधे को कोई पशु खा जाए, उसका कोई फायदा नहीं। पौधे चाहे कम लग जाएं, लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
-जय सिंघल, अध्यक्ष, बेटी संस्था।
कोट
सभी के सहयोग से पूरा होगा लक्ष्य: डीएफओ
हम पौधरोपण भी करेंगे और पौधों की सुरक्षा पर भी फोकस रखेंगे। इसके लिए अन्य विभागों का सहयोग लिया जाएगा। ऐसी जगहों पर पौधे लगाने का प्रयास करेंगे, जहां पानी उपलब्ध हो और पौधे सुरक्षित भी रहें।
-राजेश माथुर, जिला वन अधिकारी।
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सामाजिक संस्थाओं का मानना है कि प्रशासन को पौधरोपण के आंकड़े बढ़ाने की बजाय पौधों की सुरक्षा व देखरेख पर ध्यान देना चाहिए। पौधे ऐसी जगह लगाए जाएं, जहां पर उन्हें समय पर पानी दिया जा सके और पशु नुकसान न पहुंचाएं। बता दें कि वन विभाग पौधे तैयार करता है। जितने संभव हों, उतने पौधे विभाग खुद लगाता है। बाकी के पौधे पंचायत विभाग, नगर परिषद, नहरी विभाग, शिक्षा विभाग व सामाजिक संस्थाओं को भेंट कर देता है, जिनके पास पौधरोपण के लिए पर्याप्त जगह हो। वे विभाग जन सहयोग से पौधरोपण करते हैं। संवाद
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नहीं लग पाते सारे पौधे
प्रशासन द्वारा पेश किए जाने वाले आंकड़े नर्सरी में तैयार होने वाले पौधों के आधार पर जारी होते हैं। मगर जमीनी हकीकत ये है कि तमाम पौधे लग नहीं पाते। वन विभाग के पास अपने 27 कर्मचारी हैं, जो पौधरोपण करते हैं। इन्हीं पर देखरेख का जिम्मा होता है। प्रत्येक कर्मचारी दिन में 100 पौधे भी लगाए तो रोजाना 2700 पौधे लग सकते हैं। एक महीने में 81 हजार व तीन महीने में 2 लाख 43 हजार पौधे लगा सकते हैं। अन्य विभाग ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते। इसलिए मुश्किल से 10 लाख पौधे लग पाते हैं। बाकी के पौधे सूख ही जाते हैं।
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इन कारणों से नष्ट होते हैं पौधे
लावारिस पशु खा जाते हैं।
पानी के अभाव में सूख जाते हैं।
खेतों में आग लगाने से जल जाते हैं।
कृषि यंत्रों से कुचले जाते हैं।
पेड़ बनने से पहले दीमक लग जाती है।
खेतों में पेस्टीसाइड के कारण सूख जाते हैं।
वन विभाग की अपनी सीमा
यूं तो वन कर्मी भी पौधों को पानी देते हैं। मगर उनका दायरा सीमित है। वे शहरी क्षेत्र व सड़कों के किनारे लगे पेड़ों की ही देखभाल कर पाते हैं। मगर गांवों, सरकारी भवनों, स्कूलों व अन्य विभागों की जमीन पर लगे पौधों की देखभाल कर पाना वन कर्मियों के बस की बात नहीं रहती है।
कोट
पौधों की सुरक्षा जरूरी : जय सिंघल
हमारी संस्था हर साल पौधरोपण करती है। हमें यह ध्यान रखना जरूरी है कि पौधे सुरक्षित रहेंगे या नहीं। दस लोग एक पौधा लगा फोटो करवा लें और अगले दिन पौधे को कोई पशु खा जाए, उसका कोई फायदा नहीं। पौधे चाहे कम लग जाएं, लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
-जय सिंघल, अध्यक्ष, बेटी संस्था।
कोट
सभी के सहयोग से पूरा होगा लक्ष्य: डीएफओ
हम पौधरोपण भी करेंगे और पौधों की सुरक्षा पर भी फोकस रखेंगे। इसके लिए अन्य विभागों का सहयोग लिया जाएगा। ऐसी जगहों पर पौधे लगाने का प्रयास करेंगे, जहां पानी उपलब्ध हो और पौधे सुरक्षित भी रहें।
-राजेश माथुर, जिला वन अधिकारी।