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23 सब डिवीजनों के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों की हड़ताल शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला/फतेहाबाद
Updated Wed, 29 Jun 2016 01:01 AM IST
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बिजली कर्मचारियों की हड़ताल शुरू
- फोटो : amarujala
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23 सब डिवीजनों के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों की हड़ताल शुरू
प्रदेश की 23 सबडिवीजनों के निजीकरण में बिजली कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल मंगलवार रात 10 बजे से शुरू हो गई। हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर बुलाई गई हड़ताल में बिजली विभाग के 800 कर्मचारियों में से लगभग 95 प्रतिशत कर्मचारियों के शामिल रहने की संभावना कर्मचारी नेता जता रहे हैं।
हालांकि अन्य विभागों के कर्मचारियों ने बिजली विभाग के आंदोलन को अपना समर्थन तो दिया है, लेकिन मंगलवार देर रात से शुरू हुई हड़ताल में वे सीधे-सीधे शामिल नहीं होंगे। इसके पीछे सरकार द्वारा लगाए गए एस्मा को बड़ी वजह माना जा रहा है। इसके चलते बुधवार और वीरवार को किसी प्रकार की जरूरी सेवा के प्रभावित होने की संभावना नहीं है। मंगलवार दोपहर बाद पत्रकारों से बातचीत में बिजली निगम यूनियन के राज्य सचिव अजय वशिष्ठ, यूनिट प्रधान फकीर चंद सैनी एवं सर्वकर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष भूप सिंह भड़ोलावाली ने हड़ताल एवं एस्मा सहित कई मुद्दों पर खुलकर बात करते हुए प्रदेश सरकार पर निशाना साधा।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य सचिव अजय वशिष्ठ ने कहा कि सरकार की नीति सरासर गलत है, अगर सरकार घाटे को आधार मानकर सबडिवीजनों को निजी हाथों में सौंपती तो सबसे पहले जींद और रोहतक जिले की सबडिवीजनों का निजीकरण होता। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जीटी रोड बेल्ट के जिलों की सबडिवीजनों का निजीकरण कर रही है जबकि यहां पर कोई घाटा नहीं है, बल्कि सरकार को सबसे अधिक राजस्व इन्हीं जिलों से मिलता है। उन्होंने कहा कि 1998 में बिजली बोर्ड को तोड़ा गया था, उस वक्त विभाग का घाटा 400 करोड़ था, जो अब बढ़कर 34 हजार करोड़ हो गया। सरकार को चाहिए था कि पिछले 18 साल का ऑडिट करवाती, ताकि सच सामने आता कि किस वजह से बिजली निगम को इतना नुकसान हुआ। लेकिन सरकार ये जानना ही नहीं चाहती।
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65 हजार कर्मचारियों की तुरंत जरूरत
कर्मचारी नेताओं ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि प्रदेश में नियम है कि प्रति एक हजार कनेक्शनों पर लगभग 17 बिजली कर्मचारी होने चाहिए, जबकि वास्तविकता इससे काफी उलट है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तुरंत 65 हजार कर्मचारियों की नई भर्ती की जरूरत है। लेकिन सरकार इस ओर भी गंभीर नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार प्रयोग करना चाहती है तो एक उपमंडल प्राइवेट कंपनी को दे और एक उपमंडल यूनियन को दे। दोनों उपमंडलों में आपस में प्रतियोगिता करवाए। जैसा परिणाम आए, वैसा लागू कर लेना। इस सुझाव पर मंत्री तो सहमत दिखे, लेकिन एसीएस पॉवर राजन गुप्ता के अड़ियल रवैये के कारण मीटिंग में फैसला नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश का बिजली कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से हड़ताल करेंगे तथा जरूरी सेवाओं को हड़ताल में रहते हुए भी चालू रखेंगे।
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प्रदेश की 23 सबडिवीजनों के निजीकरण में बिजली कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल मंगलवार रात 10 बजे से शुरू हो गई। हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर बुलाई गई हड़ताल में बिजली विभाग के 800 कर्मचारियों में से लगभग 95 प्रतिशत कर्मचारियों के शामिल रहने की संभावना कर्मचारी नेता जता रहे हैं।
हालांकि अन्य विभागों के कर्मचारियों ने बिजली विभाग के आंदोलन को अपना समर्थन तो दिया है, लेकिन मंगलवार देर रात से शुरू हुई हड़ताल में वे सीधे-सीधे शामिल नहीं होंगे। इसके पीछे सरकार द्वारा लगाए गए एस्मा को बड़ी वजह माना जा रहा है। इसके चलते बुधवार और वीरवार को किसी प्रकार की जरूरी सेवा के प्रभावित होने की संभावना नहीं है। मंगलवार दोपहर बाद पत्रकारों से बातचीत में बिजली निगम यूनियन के राज्य सचिव अजय वशिष्ठ, यूनिट प्रधान फकीर चंद सैनी एवं सर्वकर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष भूप सिंह भड़ोलावाली ने हड़ताल एवं एस्मा सहित कई मुद्दों पर खुलकर बात करते हुए प्रदेश सरकार पर निशाना साधा।
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पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य सचिव अजय वशिष्ठ ने कहा कि सरकार की नीति सरासर गलत है, अगर सरकार घाटे को आधार मानकर सबडिवीजनों को निजी हाथों में सौंपती तो सबसे पहले जींद और रोहतक जिले की सबडिवीजनों का निजीकरण होता। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जीटी रोड बेल्ट के जिलों की सबडिवीजनों का निजीकरण कर रही है जबकि यहां पर कोई घाटा नहीं है, बल्कि सरकार को सबसे अधिक राजस्व इन्हीं जिलों से मिलता है। उन्होंने कहा कि 1998 में बिजली बोर्ड को तोड़ा गया था, उस वक्त विभाग का घाटा 400 करोड़ था, जो अब बढ़कर 34 हजार करोड़ हो गया। सरकार को चाहिए था कि पिछले 18 साल का ऑडिट करवाती, ताकि सच सामने आता कि किस वजह से बिजली निगम को इतना नुकसान हुआ। लेकिन सरकार ये जानना ही नहीं चाहती।
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65 हजार कर्मचारियों की तुरंत जरूरत
कर्मचारी नेताओं ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि प्रदेश में नियम है कि प्रति एक हजार कनेक्शनों पर लगभग 17 बिजली कर्मचारी होने चाहिए, जबकि वास्तविकता इससे काफी उलट है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तुरंत 65 हजार कर्मचारियों की नई भर्ती की जरूरत है। लेकिन सरकार इस ओर भी गंभीर नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार प्रयोग करना चाहती है तो एक उपमंडल प्राइवेट कंपनी को दे और एक उपमंडल यूनियन को दे। दोनों उपमंडलों में आपस में प्रतियोगिता करवाए। जैसा परिणाम आए, वैसा लागू कर लेना। इस सुझाव पर मंत्री तो सहमत दिखे, लेकिन एसीएस पॉवर राजन गुप्ता के अड़ियल रवैये के कारण मीटिंग में फैसला नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश का बिजली कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से हड़ताल करेंगे तथा जरूरी सेवाओं को हड़ताल में रहते हुए भी चालू रखेंगे।