{"_id":"6768589a4c0a529cd9023e1e","slug":"ramanujan-was-the-worlds-greatest-mathematician-jain-fatehabad-news-c-127-1-shsr1019-126768-2024-12-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामानुजन विश्व के महान गणितज्ञ थे : जैन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामानुजन विश्व के महान गणितज्ञ थे : जैन
विज्ञापन
संगोष्ठी में भाग लेते हुए गणित शिक्षाविद।
टोहाना। राष्ट्रीय गणित दिवस के उपलक्ष्य में गणित शिक्षाविदों ने एक संगोष्ठी का आयोजन कर गणितज्ञ एस रामानुजन का जन्मदिन मनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुभाष जैन ने की। उन्होंने कहा कि रामानुजन भारत ही नहीं विश्व के एक महान गणितज्ञ थे।
वे एक बहुत ही सामान्य परिवार से थे और उन्हें गणित का कोई प्रशिक्षण नहीं मिला था। उन्होंने स्वयं ही गणित सीखा एवं खोज की। उन्होंने गणित में 3884 गणितीय प्रमेय बनाई जो लगभग प्रमाणित हो चुकी है। यह गणित के क्षेत्र की बहुत बड़ी खोज है।
इस दौरान सभी ने मिलकर निर्णय लिया कि टोहाना में गणित क्लब की स्थापना की जाए, जिसमें शहर के जाने-माने गणितज्ञ सदस्य बने जो गणित के विकास के लिए कार्य करें। यह भी निर्णय लिया गया कि दसवीं कक्षा और 12वीं कक्षा में सरकारी स्कूल का जो छात्र गणित में सर्वोच्च अंक प्राप्त करेगा उसे 1100 रुपये और 2100 रुपये का पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
विज्ञापन
प्राचार्य एवं गणितज्ञ गुरु लाल सिंह ने कहा कि महान गणितज्ञ रामानुजन ने इनफिनिटी सीरीज, फ्रेक्शन नंबर थ्योरी और गणितीय एनालिसिस के महत्वपूर्ण गणितीय खोज की, जिसके कारण गणित ने बहुत प्रगति की। तरसेम ने बताया कि 1729 चमत्कारी नंबर के बारे में उन्होंने विश्व को बताया। पहले यूरोप में 1729 नंबर अशुभ माना जाता था।
उन्होंने बताया कि 1729 ऐसी सबसे छोटी संख्या है जो दो बार दो संख्याओं के घनों का योग है। गणितज्ञ मुकेश भाटिया और राजेश भाटिया ने बताया कि महान गणितज्ञ रामानुजन गणित के तो विशेषज्ञ थे परंतु अन्य विषयों में वह बिल्कुल कमजोर थे। मद्रास विश्वविद्यालय में बीएससी प्रवेश के लिए उन्होंने जब परीक्षा दी थी तो गणित में 100 में से 100 अंक प्राप्त किये परंतु शेष सभी विषयों में फेल हो गए। इस दौरा सत प्रकाश शर्मा और मनफूल शर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
वे एक बहुत ही सामान्य परिवार से थे और उन्हें गणित का कोई प्रशिक्षण नहीं मिला था। उन्होंने स्वयं ही गणित सीखा एवं खोज की। उन्होंने गणित में 3884 गणितीय प्रमेय बनाई जो लगभग प्रमाणित हो चुकी है। यह गणित के क्षेत्र की बहुत बड़ी खोज है।
विज्ञापन
इस दौरान सभी ने मिलकर निर्णय लिया कि टोहाना में गणित क्लब की स्थापना की जाए, जिसमें शहर के जाने-माने गणितज्ञ सदस्य बने जो गणित के विकास के लिए कार्य करें। यह भी निर्णय लिया गया कि दसवीं कक्षा और 12वीं कक्षा में सरकारी स्कूल का जो छात्र गणित में सर्वोच्च अंक प्राप्त करेगा उसे 1100 रुपये और 2100 रुपये का पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
विज्ञापन
प्राचार्य एवं गणितज्ञ गुरु लाल सिंह ने कहा कि महान गणितज्ञ रामानुजन ने इनफिनिटी सीरीज, फ्रेक्शन नंबर थ्योरी और गणितीय एनालिसिस के महत्वपूर्ण गणितीय खोज की, जिसके कारण गणित ने बहुत प्रगति की। तरसेम ने बताया कि 1729 चमत्कारी नंबर के बारे में उन्होंने विश्व को बताया। पहले यूरोप में 1729 नंबर अशुभ माना जाता था।
उन्होंने बताया कि 1729 ऐसी सबसे छोटी संख्या है जो दो बार दो संख्याओं के घनों का योग है। गणितज्ञ मुकेश भाटिया और राजेश भाटिया ने बताया कि महान गणितज्ञ रामानुजन गणित के तो विशेषज्ञ थे परंतु अन्य विषयों में वह बिल्कुल कमजोर थे। मद्रास विश्वविद्यालय में बीएससी प्रवेश के लिए उन्होंने जब परीक्षा दी थी तो गणित में 100 में से 100 अंक प्राप्त किये परंतु शेष सभी विषयों में फेल हो गए। इस दौरा सत प्रकाश शर्मा और मनफूल शर्मा आदि मौजूद रहे।