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Fatehabad News: गगनप्रीत को गले लगाकर खूब रोए मां-बाप
Thu, 06 Feb 2025 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 06 Feb 2025 11:12 PM IST
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भूना के दिगोह गांव निवासी सुखविंदर सिंह से घटनाक्रम को लेकर बातचीत करते हुए पुलिस जांच अधिकारी
भूना। अमेरिका से डिपोर्ट होकर वीरवार सुबह करीब पौने चार बजे गांव दिगोह लौटे गगनप्रीत सिंह का मां-बाप माथा चूमकर व गले लगाकर रोते रहे। गले लगकर मां-बाप के साथ-साथ गगनप्रीत सिंह की आंखों से भी आंसू टपक रहे थे। अमेरिका से अमृतसर पहुंचने में करीब 32 घंटे से अधिक का समय लगा।
पुलिस जांच अधिकारी चमन सिंह को घटना से संबंधित जानकारी देते हुए गगनप्रीत ने बताया कि अमेरिका से भारत लौटते समय प्लेन में 104 लोग सवार थे। 2 फरवरी की सुबह 4 बजे के बाद चले थे और 6 घंटे के अवधि में आराम करने के लिए दो बार नीचे उतारा गया। इसके बाद लगातार 12 घंटे से अधिक प्लेन चलता रहा। गगनप्रीत सिंह ने बताया कि उसके दोनों हाथ व पैरों में हथकड़ी लगाई गई थी। हथकड़ी लगे हाथों से ही वे खाना खा रहे थे। खाने में ब्रेड चिकन, मछली तथा चावल दिया गया। संवाद
प्लेन में सवार अधिकारियों का व्यवहार ठीक था, मगर हालात कैदियों जैसी थी
गगनप्रीत ने पुलिस बयान में बताया कि प्लेन में सवार अमेरिका के अधिकारियों का व्यवहार तो ठीक था, परंतु उनकी हालात कैदी जैसे थे। उनको खड़ा तक नहीं होने दिया जा रहा था। क्योंकि उपरोक्त अधिकारी निर्देशों का सख्ती से पालन कर रहे थे। गगनप्रीत सिंह ने बताया कि प्लेन में किसी को भी मोबाइल फोन साथ नहीं रखने दिया। बैग और मोबाइल फोन डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) में ले जाने से पहले ही जब्त कर लिया गया था। पहचान के लिए सभी बैगों पर नाम लिखे स्टिकर लगाए गए थे।
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अमेरिका की आर्मी ने 22 जनवरी को बॉर्डर क्रॉस के दौरान किया था गिरफ्तार
गगनप्रीत सिंह ने बताया कि साढ़े 16 लाख रुपये देकर एजेंट के माध्यम से फ्रांस से स्पेन होते हुए बॉर्डर क्रॉस करके 22 जनवरी को अमेरिका पहुंच गया था। वहां उसी दिन अमेरिकन आर्मी की पकड़ में आ गया। तब से उसे डिटेंशन सेंटर में ही रखा हुआ था। जिसके बाद वहां की सरकार के आदेश पर 2 फरवरी को वापस भारत में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
-यूनिवर्सिटी की फीस नहीं भरी जा सकी, इसलिए उसने डंकी के रास्ते अमेरिका पहुंचा
गगनप्रीत सिंह ने पुलिस को बताया है कि वह 23 अगस्त 2022 को स्टडी वीजा पर इंग्लैड गया था। वहां ढाई साल तक सोलेट यूनिवर्सिटी साउथ हैंपटन में पिज्जा हट में नौकरी करता था और किचन में भी काम करता था। इंग्लैंड सरकार ने 20 घंटे काम करने की परमिशन दी हुई थी। पढ़ाई के साथ-साथ खर्च निकालने के लिए गाड़ी चलाता था। यूनिवर्सिटी की फीस नहीं भरी जा सकी, इसलिए उसने डंकी के रास्ते अमेरिका जाने का मन बनाया। एजेंट ने उससे साढ़े 16 लाख रुपये लेकर डंकी के रास्ते अमेरिका पहुंचा दिया। वहां पहुंचने पर अमेरिकन आर्मी ने उसे हिरासत में ले लिया था। अब उन्हें अमेरिका से डिपोर्ट करके भारत भेज दिया गया। पंजाब के अमृतसर एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन से संबंधित वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद हरियाणा के 32 लोगों को अंबाला भेजा गया। जहां से उन्हें अपने-अपने जिले में भेज दिया गया।
आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बेटे को भेजा था इंग्लैंड : सुखविंद्र सिंह
दिगोह निवासी सुखविंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब ढाई साल पहले घर की आर्थिक हालात सुधारने के लिए बेटे गगनप्रीत सिंह को विदेश भेजा था। परिवार के पास तीन एकड़ जमीन थी, उसमें से ढाई एकड़ बेचकर पैसा जुटाया था। इंग्लैंड भेजने में 50 लाख रुपये से ज्यादा खर्च आया था। सुखविंद्र सिंह ने कहा कि अगर हरियाणा में ही नौकरी मिल जाए तो बच्चों को बाहर नहीं भेजना पड़े।
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पुलिस जांच अधिकारी चमन सिंह को घटना से संबंधित जानकारी देते हुए गगनप्रीत ने बताया कि अमेरिका से भारत लौटते समय प्लेन में 104 लोग सवार थे। 2 फरवरी की सुबह 4 बजे के बाद चले थे और 6 घंटे के अवधि में आराम करने के लिए दो बार नीचे उतारा गया। इसके बाद लगातार 12 घंटे से अधिक प्लेन चलता रहा। गगनप्रीत सिंह ने बताया कि उसके दोनों हाथ व पैरों में हथकड़ी लगाई गई थी। हथकड़ी लगे हाथों से ही वे खाना खा रहे थे। खाने में ब्रेड चिकन, मछली तथा चावल दिया गया। संवाद
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प्लेन में सवार अधिकारियों का व्यवहार ठीक था, मगर हालात कैदियों जैसी थी
गगनप्रीत ने पुलिस बयान में बताया कि प्लेन में सवार अमेरिका के अधिकारियों का व्यवहार तो ठीक था, परंतु उनकी हालात कैदी जैसे थे। उनको खड़ा तक नहीं होने दिया जा रहा था। क्योंकि उपरोक्त अधिकारी निर्देशों का सख्ती से पालन कर रहे थे। गगनप्रीत सिंह ने बताया कि प्लेन में किसी को भी मोबाइल फोन साथ नहीं रखने दिया। बैग और मोबाइल फोन डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) में ले जाने से पहले ही जब्त कर लिया गया था। पहचान के लिए सभी बैगों पर नाम लिखे स्टिकर लगाए गए थे।
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अमेरिका की आर्मी ने 22 जनवरी को बॉर्डर क्रॉस के दौरान किया था गिरफ्तार
गगनप्रीत सिंह ने बताया कि साढ़े 16 लाख रुपये देकर एजेंट के माध्यम से फ्रांस से स्पेन होते हुए बॉर्डर क्रॉस करके 22 जनवरी को अमेरिका पहुंच गया था। वहां उसी दिन अमेरिकन आर्मी की पकड़ में आ गया। तब से उसे डिटेंशन सेंटर में ही रखा हुआ था। जिसके बाद वहां की सरकार के आदेश पर 2 फरवरी को वापस भारत में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
-यूनिवर्सिटी की फीस नहीं भरी जा सकी, इसलिए उसने डंकी के रास्ते अमेरिका पहुंचा
गगनप्रीत सिंह ने पुलिस को बताया है कि वह 23 अगस्त 2022 को स्टडी वीजा पर इंग्लैड गया था। वहां ढाई साल तक सोलेट यूनिवर्सिटी साउथ हैंपटन में पिज्जा हट में नौकरी करता था और किचन में भी काम करता था। इंग्लैंड सरकार ने 20 घंटे काम करने की परमिशन दी हुई थी। पढ़ाई के साथ-साथ खर्च निकालने के लिए गाड़ी चलाता था। यूनिवर्सिटी की फीस नहीं भरी जा सकी, इसलिए उसने डंकी के रास्ते अमेरिका जाने का मन बनाया। एजेंट ने उससे साढ़े 16 लाख रुपये लेकर डंकी के रास्ते अमेरिका पहुंचा दिया। वहां पहुंचने पर अमेरिकन आर्मी ने उसे हिरासत में ले लिया था। अब उन्हें अमेरिका से डिपोर्ट करके भारत भेज दिया गया। पंजाब के अमृतसर एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन से संबंधित वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद हरियाणा के 32 लोगों को अंबाला भेजा गया। जहां से उन्हें अपने-अपने जिले में भेज दिया गया।
आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बेटे को भेजा था इंग्लैंड : सुखविंद्र सिंह
दिगोह निवासी सुखविंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब ढाई साल पहले घर की आर्थिक हालात सुधारने के लिए बेटे गगनप्रीत सिंह को विदेश भेजा था। परिवार के पास तीन एकड़ जमीन थी, उसमें से ढाई एकड़ बेचकर पैसा जुटाया था। इंग्लैंड भेजने में 50 लाख रुपये से ज्यादा खर्च आया था। सुखविंद्र सिंह ने कहा कि अगर हरियाणा में ही नौकरी मिल जाए तो बच्चों को बाहर नहीं भेजना पड़े।

भूना के दिगोह गांव निवासी सुखविंदर सिंह से घटनाक्रम को लेकर बातचीत करते हुए पुलिस जांच अधिकारी