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Fatehabad News: मॉडल संस्कृति स्कूल का वीटा बूथ लेने को तैयार नहीं अभिभावक
Sat, 29 Nov 2025 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 29 Nov 2025 11:40 PM IST
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फतेहाबाद के राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में बना वीटा बूथ। संवाद
फतेहाबाद। मॉडल संस्कृति स्कूल में बना वीटा बूथ शुरू नहीं हो पाया है। कारण बूथ लेने के लिए समग्र शिक्षा विभाग की ओर से लगाई गई शर्तें अभिभावकों को रास नहीं आ रही हैं।
यह बूथ स्कूल के दिव्यांग और सामान्य विद्यार्थियों के अभिभावकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है। अकेले फतेहाबाद शहर में स्कूल प्रशासन ने छह बार आवेदन की प्रक्रिया करवाई, लेकिन एक भी अभिभावक ठेका लेने को तैयार नहीं हुआ। इससे लाखों की लागत से बना वीटा बूथ अब धूल फांक रहा है।
वीटा बूथ को स्कूल के विद्यार्थियों के अभिभावकों को ठेके पर दिया जाना था। इसके उद्देश्य था कि बूथ से होने वाली आय का एक निश्चित प्रतिशत दिव्यांग विद्यार्थियों की जीविका और 25 फीसदी स्कूल के विकास पर खर्च किया जाए लेकिन विभाग ने ठेके के लिए ऐसी शर्तें लागू की हैं, जिन्हें पूरा करना अभिभावकों के लिए लगभग असंभव हो गया है। बूथ पर दूध, दही, पनीर और अन्य घरेलू सामान बेचने की अनुमति है।
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वीटा बूथ लेने की शर्त
बूथ चलाने के लिए बनने वाले स्वयं सहायता समूह में कम से कम 8 सदस्य होने चाहिए, जिसमें 4 बच्चे दिव्यांग और 4 बच्चे सामान्य वर्ग के हो, और वे सभी स्कूल के विद्यार्थी हो। इसके अलावा, एक अध्यापक और एक अभिभावक भी समूह में शामिल होना चाहिए। वहीं सभी साझेदार समय के अनुसार बूथ में सामान बेचकर कूल लाभ और खर्च का वितरण करेंगे। स्कूल प्रशासन का कहना है कि इन जटिल शर्तों के कारण कोई भी अभिभावक ठेका लेने के लिए आगे नहीं आ रहा है। यह प्रक्रिया इतनी कठिन है कि न तो अभिभावक समूह का गठन कर पा रहे हैं और न ही उन्हें इसके संचालन में कोई लाभ दिख रहा है।
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छह बार किया प्रयास, नहीं मिला संचालक
स्कूल प्रशासन ने पिछले दो सालों में छह बार आवेदन की प्रक्रिया शुरू की। बार-बार नोटिस बोर्ड पर जानकारी लगाई गई और अभिभावकों को प्रेरित करने का प्रयास किया गया। बावजूद इसके, किसी भी बार कोई आवेदन स्कूल को प्राप्त नहीं हुआ। प्राचार्य हरमिंदर ने बताया कि उन्होंने विभाग को इस समस्या से अवगत कराया है और शर्तों को सरल बनाने का अनुरोध भी किया है, ताकि अभिभावक आसानी से इस योजना का लाभ उठा सकें और बूथ का संचालन शुरू हो सके।
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यह बूथ स्कूल के दिव्यांग और सामान्य विद्यार्थियों के अभिभावकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है। अकेले फतेहाबाद शहर में स्कूल प्रशासन ने छह बार आवेदन की प्रक्रिया करवाई, लेकिन एक भी अभिभावक ठेका लेने को तैयार नहीं हुआ। इससे लाखों की लागत से बना वीटा बूथ अब धूल फांक रहा है।
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वीटा बूथ को स्कूल के विद्यार्थियों के अभिभावकों को ठेके पर दिया जाना था। इसके उद्देश्य था कि बूथ से होने वाली आय का एक निश्चित प्रतिशत दिव्यांग विद्यार्थियों की जीविका और 25 फीसदी स्कूल के विकास पर खर्च किया जाए लेकिन विभाग ने ठेके के लिए ऐसी शर्तें लागू की हैं, जिन्हें पूरा करना अभिभावकों के लिए लगभग असंभव हो गया है। बूथ पर दूध, दही, पनीर और अन्य घरेलू सामान बेचने की अनुमति है।
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वीटा बूथ लेने की शर्त
बूथ चलाने के लिए बनने वाले स्वयं सहायता समूह में कम से कम 8 सदस्य होने चाहिए, जिसमें 4 बच्चे दिव्यांग और 4 बच्चे सामान्य वर्ग के हो, और वे सभी स्कूल के विद्यार्थी हो। इसके अलावा, एक अध्यापक और एक अभिभावक भी समूह में शामिल होना चाहिए। वहीं सभी साझेदार समय के अनुसार बूथ में सामान बेचकर कूल लाभ और खर्च का वितरण करेंगे। स्कूल प्रशासन का कहना है कि इन जटिल शर्तों के कारण कोई भी अभिभावक ठेका लेने के लिए आगे नहीं आ रहा है। यह प्रक्रिया इतनी कठिन है कि न तो अभिभावक समूह का गठन कर पा रहे हैं और न ही उन्हें इसके संचालन में कोई लाभ दिख रहा है।
छह बार किया प्रयास, नहीं मिला संचालक
स्कूल प्रशासन ने पिछले दो सालों में छह बार आवेदन की प्रक्रिया शुरू की। बार-बार नोटिस बोर्ड पर जानकारी लगाई गई और अभिभावकों को प्रेरित करने का प्रयास किया गया। बावजूद इसके, किसी भी बार कोई आवेदन स्कूल को प्राप्त नहीं हुआ। प्राचार्य हरमिंदर ने बताया कि उन्होंने विभाग को इस समस्या से अवगत कराया है और शर्तों को सरल बनाने का अनुरोध भी किया है, ताकि अभिभावक आसानी से इस योजना का लाभ उठा सकें और बूथ का संचालन शुरू हो सके।