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Fatehabad News: गर्भावस्था में लापरवाही पड़ रही भारी, शिशुओं के हृदय में हो रहा छेद

Fri, 08 Dec 2023 09:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Fri, 08 Dec 2023 09:57 PM IST
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Negligence during pregnancy is taking a toll, babies are getting holes in their hearts
फतेहाबाद के जिला आरं​भिक हस्तक्षेप केंद्र की तरफ विशेषज्ञ स्कूल में बच्चे की स्क्रीनिंग करते हु
फतेहाबाद।
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गर्भावस्था में बरती गई लापरवाही शिशुओं के हृदय को कमजोर बना रही है। गर्भावस्था में बिना डॉक्टर सलाह ली गई दवा, स्मोकिंग और एलकोहल लेना गर्भ में पल रहे शिशुओं के लिए खतरनाक हो रही है। मां की लापरवाही नन्हीं सी जान के हृदय में छेद कर रही है। जिले में पिछले छह साल में 197 केस सामने आ चुके है। स्वास्थ्य विभाग के जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र की तरफ से स्क्रीनिंग में आए इन बच्चों के हृदय के छेद के ऑपरेशन भी करवाए गए हैं।
इस साल अप्रैल से नवंबर माह तक बच्चे के हृदय में छेद के 16 केस सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र ने इन बच्चों के ऑपरेशन करवाए है। इन ऑपरेशन पर करीब 24 लाख रुपये खर्च हुआ है। संवाद
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पिछले 6 सालों में ये मामले आए सामने :
वर्ष दिल में छेद के सामने आए मामले
2018-19 54
2019-20 53
2020-21 21
2021-22 26
2022-23 27
2023-24 16 (नवंबर माह तक)
ये है दिल में छेद के लक्षण
- सांस लेने में तकलीफ होना
- तेजी से सांस लेना
- त्वचा का पीला होना
- बार-बार श्वसन संक्रमण होना
- भोजन करते समय पसीना आना
- अत्याधिक रोना
- बच्चे की त्वचा का रंगा नीला होना
गर्भावस्था में फॉलिक एसिड की कमी भी कारण
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चल रहे जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र के डॉ. कौशल शर्मा का कहना है कि गर्भावस्था में फॉलिक एसिड की कमी होना, एलकोहल लेना, स्मोकिंग करना मुख्य कारण है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर की सलाह के बिना दवाई लेना भी शिशु के हृदय में छेद होने की वजह बन सकता है।
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जन्म के साथ होने वाली कई बीमारियों में से दिल में हृदय होना भी शामिल है। हृदय में छेद बीमारी का समय पर उपचार न लिया जाए तो ये जानलेवा हो सकता है। नवजात में इसके लक्षणों की पहचान कर पाना मुश्किल होता है। अगर बच्चे में काई लक्षण दिखे तो जांच जरूर करवाएं। जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र द्वारा बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है। अगर जन्मजात कोई बीमारी मिलती है तो उसका उपचार स्वास्थ्य विभाग की तरफ से निशुल्क करवाया जाता है।
- सुखदेव सिंह, मैनेजर, जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र
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