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किसानों ने रोका दिल्ली-फाजिल्का नेशनल हाईवे
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Thu, 27 Nov 2014 01:58 AM IST
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तीन दिन से नरमे की सरकारी बोली न होने और प्राइवेट मिलों द्वारा कम रेट लगाए जाने से गुस्साए किसानों ने बुधवार सुबह 11 बजे रतिया मोड़ के पास नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया।
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करीब डेढ़ घंटे तक लगे जाम की वजह से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। जाम की सूचना पाकर मार्केट कमेटी के सचिव विकास सेतिया मौके पर पहुंचे और उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन किसानों ने उनकी एक न सुनी।
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इस दौरान जाम में फंसे वाहन चालकों की किसानों के साथ झड़प भी हुई। बाद में एसडीएम सतबीर जांघू, तहसीलदार दर्शन कुमार, डीएसपी विजय जाखड़ मौके पर पहुंच गए।
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अधिकारियों ने किसानों को समझा बुझाकर शांत किया और मीटिंग के लिए मार्केट कमेटी में ले गए। इसके बाद किसानों ने जाम खोल दिया और मीटिंग के लिए मार्केट कमेटी कार्यालय आ गए।
कार्यालय में मार्केट कमेटी सचिव विकास सेतिया ने किसानों को आश्वासन दिया कि पहले जगह का अभाव होने के कारण सरकारी बोली नहीं हो पा रही थी। बृहस्पतिवार सुबह से सुचारू रूप से सरकारी बोली चालू हो जाएगी।
किसानों ने बताया कि अनाजमंडी में पिछले तीन दिनों से नरमे की बोली नहीं हो रही थी। बुधवार को भी जब मंडी में नरमे की सरकारी बोली नहीं हुई और प्राइवेट मिल संचालक नरमे का 3600 रुपये रेट लगा रहे थे। जिससे किसानों में रोष फैल गया और वह एकत्रित होकर नेशनल हाईवे पर आ गए और जोरदार नारेबाजी करते हुए जाम लगा दिया।
जाम लगाकर खड़े किसान बीघड़ के श्रवण सिंह, सरवरपुर के रतन सिंह, सुभाष कुमार, हंडोली के यशपाल, हांसपुर के दलजीत, जगतार सिंह, हरि सिंह, सुरेन्द्र, रामसिंह, गुरमेल सिंह, राजेन्द्र आदि ने बताया कि अनाजमंडी में तीन दिनों से नरमे की बोली नहीं हो रही है। जिस कारण उनको भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि नरमे की सरकारी खरीद 3900 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि प्राइवेट परचेजर उनको नरमे का 3600 से 3700 ही रेट देकर उनका शोषण कर रहे हैं।
प्राइवेट मिल के मालिक रेट कम देने के साथ-साथ मिल में ले जाकर प्रति ट्रॉली के पीछे 25 किलो का कटान कर देते हैं। जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकारी बोली न होने के कारण वह मंडी में अपनी फसल की निगरानी के लिए बैठे रहते हैं। रात को ठंड में उनको भारी परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
जाम की सूचना पाकर एसडीएम सतबीर जांघू, तहसीलदार सहित अनेक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि मंडी में नरमे की बोली शीघ्र ही करवाई जाएगी।
इसके बाद किसानों ने जाम तो खोल दिया, लेकिन जल्द बोली की बात पर अड़ गए। बाद में अधिकारियों ने उनको मार्केट कमेटी कार्यालय में मीटिंग के लिए बुला लिया।
मीटिंग में सचिव ने सीसीआई के प्रवीन मोंगा को निर्देश दिए कि बृहस्पतिवार से जगह का प्रबंध कर सरकारी बोली करवाएं।
डेढ़ घंटे तक यात्री होते रहे परेशान
नेशनल हाईवे पर जाम लगने के बाद लगभग एक दर्जन रोडवेज बसें जाम में फंस गईं जिसमें कई दिल्ली से सिरसा, बठिंडा की ओर जाने वाली थीं। जाम के दौरान कंडक्टर भी तमाशा देखने में मशगूल थे। पूछने पर एक कंडक्टर ने जवाब दिया कि बस में बैठेंगे तो सवारियां टिकट के पैसे वापिस मांग रही हैं। जिस कारण वह बस से दूर खड़े हैं।
ट्रक निकालने की कोशिश पर गुस्साए किसान
नेशनल हाईवे पर जाम लगने के बाद फंसे खड़े वाहनों में से मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने ट्रक को निकालने की कोशिश की तो किसान भड़क गए और उन्होंने ट्रक को रोककर शीशे तोड़ने का प्रयास किया। लेकिन अधिकारियों ने किसानों को मौके से खदेड़ दिया।