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Fatehabad News: नहरी पानी, डीएपी, पराली प्रबंधन, मंडी में धान खरीद के मुद्दे रखे
Sat, 01 Nov 2025 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 01 Nov 2025 11:40 PM IST
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फतेहाबाद। डीसी से मीटिंग के बाद किसान सभा तहसील फतेहाबाद का प्रतिनिधिमंडल। स्त्रोत अमरजीत सिंह
फतेहाबाद। किसान सभा तहसील कमेटी का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को डीसी डॉ. विवेक भारती से मिला। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तहसील प्रधान पतराम ढाणी ईशर ने किया।
बैठक में जिले की नहरों में पानी छोड़ने की संबंधित अधिकारियों की मनमर्जी, डीएपी खाद की कालाबाजारी, पराली की गांठ की मशीन ने उपलब्ध न होने और अनाज मंडी में धान की खरीद मनमर्जी से ओने-पोने दामों में किए जाने के मुद्दों पर चर्चा हुई। गांव भूथन कलां के किसान अमरजीत सिंह ढाका ने बताया कि टोहाना हेड से फतेहाबाद डिस्ट्रीब्यूटरी नहर में पानी पहले तो 24 अक्तूबर के निर्धारित शेड्यूल के बजाय 27 को छोड़ा गया और अब वीरवार को पानी घटाकर बिल्कुल कम कर दिया गया है।
यह सब सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों एसई, एक्सईएन से लेकर एसडीओ तक मिलीभगत करके किया जा रहा है। इस पर डीसी ने एक्सईएन से इस बारे में जवाब तलब किया और तुरंत नहर में पानी पूरा करने को कहा गया। इसके बाद शुक्रवार देर रात भूथन कलां, भिरड़ाना पुल पर नहर में पानी पूरा हुआ। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि जो नुकसान नहर के लेट छोड़े जाने पर हुआ है उसके भरपाई 6 नवंबर के बाद अतिरिक्त पानी छोड़कर किया जाएगा।
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किसान ओमप्रकाश कुलड़िया ने कहा कि डीएपी की कालाबाजारी जिले के डीलरों की ओर से बड़े पैमाने पर की जा रही है। डीएपी खाद के साथ किसानों को अन्य गैर जरूरी सामान खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। वे कालाबाजारी करते हुए 300 से 500 रुपये प्रति बैग अधिक लिए जा रहे हैं। डीसी के समक्ष यह मुद्दा भी रखा गया कि कोई भी किसान एक एकड़ की पराली भी नहीं जलाना चाहता है परंतु पराली की गांठ बनने की मशीन पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं है।
किसान सभा के तहसील कमेटी के सदस्य कृष्ण ज्याणी ने बताया कि अनाज मंडी में धान की ढेरियों से अटी पड़ी है। व्यापारी बोली करने के लिए एक-दो घंटे आते हैं और उसके बाद बाकी बचे ढेरी को मनमाफिक 200 से 300 रुपये कम रेट में खरीदारी करते हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
तहसील प्रधान पतराम ढाणी ईशर ने बताया कि डीसी ने संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही उपरोक्त सभी मुद्दों और समस्याओं के तुरंत हल करने के लिए निर्देश दिए हैं। प्रतिनिधिमंडल में बलबीर बेनीवाल, रामकुमार चबरवाल, देवीलाल कुलड़िया, सुभाष शर्मा आदि शामिल रहे।
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बैठक में जिले की नहरों में पानी छोड़ने की संबंधित अधिकारियों की मनमर्जी, डीएपी खाद की कालाबाजारी, पराली की गांठ की मशीन ने उपलब्ध न होने और अनाज मंडी में धान की खरीद मनमर्जी से ओने-पोने दामों में किए जाने के मुद्दों पर चर्चा हुई। गांव भूथन कलां के किसान अमरजीत सिंह ढाका ने बताया कि टोहाना हेड से फतेहाबाद डिस्ट्रीब्यूटरी नहर में पानी पहले तो 24 अक्तूबर के निर्धारित शेड्यूल के बजाय 27 को छोड़ा गया और अब वीरवार को पानी घटाकर बिल्कुल कम कर दिया गया है।
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यह सब सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों एसई, एक्सईएन से लेकर एसडीओ तक मिलीभगत करके किया जा रहा है। इस पर डीसी ने एक्सईएन से इस बारे में जवाब तलब किया और तुरंत नहर में पानी पूरा करने को कहा गया। इसके बाद शुक्रवार देर रात भूथन कलां, भिरड़ाना पुल पर नहर में पानी पूरा हुआ। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि जो नुकसान नहर के लेट छोड़े जाने पर हुआ है उसके भरपाई 6 नवंबर के बाद अतिरिक्त पानी छोड़कर किया जाएगा।
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किसान ओमप्रकाश कुलड़िया ने कहा कि डीएपी की कालाबाजारी जिले के डीलरों की ओर से बड़े पैमाने पर की जा रही है। डीएपी खाद के साथ किसानों को अन्य गैर जरूरी सामान खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। वे कालाबाजारी करते हुए 300 से 500 रुपये प्रति बैग अधिक लिए जा रहे हैं। डीसी के समक्ष यह मुद्दा भी रखा गया कि कोई भी किसान एक एकड़ की पराली भी नहीं जलाना चाहता है परंतु पराली की गांठ बनने की मशीन पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं है।
किसान सभा के तहसील कमेटी के सदस्य कृष्ण ज्याणी ने बताया कि अनाज मंडी में धान की ढेरियों से अटी पड़ी है। व्यापारी बोली करने के लिए एक-दो घंटे आते हैं और उसके बाद बाकी बचे ढेरी को मनमाफिक 200 से 300 रुपये कम रेट में खरीदारी करते हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
तहसील प्रधान पतराम ढाणी ईशर ने बताया कि डीसी ने संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही उपरोक्त सभी मुद्दों और समस्याओं के तुरंत हल करने के लिए निर्देश दिए हैं। प्रतिनिधिमंडल में बलबीर बेनीवाल, रामकुमार चबरवाल, देवीलाल कुलड़िया, सुभाष शर्मा आदि शामिल रहे।