{"_id":"627168cd5d8fa3756c5b71a9","slug":"in-the-first-phase-only-seven-tenants-of-nap-will-get-ownership-rights-fatehabad-news-hsr630694857","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले चरण में नप के सात किराएदारों को ही मिलेगा मालिकाना हक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहले चरण में नप के सात किराएदारों को ही मिलेगा मालिकाना हक
विज्ञापन
नगर परिषद कार्यालय फतेहाबाद।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। नगर परिषद के 20 साल पुराने किराएदारों को मालिक बनाने की योजना के तहत मात्र सात दुकानदारों को ही मालिकाना हक मिलने जा रहा है। जिला नगर आयुक्त कार्यालय ने पहले चरण में सात दुकानदारों को मालिकाना हक देने की अनुमति दे दी है। कलेक्टर रेट भरकर दुकानदार नगर परिषद से दुकान अपने नाम करवा पाएंगे। वहीं 36 दुकानदारों को झटका भी लगा है। मलकियत नप के नाम न होने और अन्य कारणों से आवेदन रद्द किए जाएंगे।
सरकार ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि नगर परिषद या नगर पालिका की दुकानों में जो 20 साल से किराएदार है, उन्हें मालिकाना हक दिया जाएगा। योजना के तहत फतेहाबाद नगर परिषद में 56 आवेदन आए। नगर परिषद ने आवेदनों को जिला नगर आयुक्त कार्यालय के पास भेजा। सर्वे और जांच के बाद पहले चरण में सात दुकानदारों को मालिकाना हक देने की अनुमति मिली है। अधिकारियों की माने तो 25 फीसदी राशि पहले भरनी होगी। डिमांड नोटिस जाने के 15 दिन के अंदर राशि नप को जमा करवानी होगी। संवाद
दूसरे चरण में 13 दुकानदारों को दिया जाएगा मालिकाना हक
नगर परिषद ने पहले चरण में उन दुकानदारों को शामिल किया है जो कि 20 साल से या उससे ज्यादा समय से खुद ही किराएदार है। दूसरे चरण में उन दुकानदारों को शामिल किया गया है जो कि पहले किराएदार की जगह दूसरे को ट्रांसफर हो चुकी है। ट्रांसफर केस के किराएदारों को दूसरे चरण में मालिकाना हक दिया जाएगा। अहम बात यह भी है कि 20 साल से जो जितना पुराना किराएदार होगा, उसे कलेक्टर रेट में ज्यादा छूट मिलेगी।
विज्ञापन
नप की लापरवाही से 36 आवेदन होंगे रद्द
नगर परिषद की लापरवाही के कारण 36 आवेदन रद्द होंगे। नप के पास करीब शहर में 250 दुकानें है। इसमें 56 दुकानदारों ने मालिकाना हक के लिए आवेदन किया था। अधिकारियों की माने तो अधिकतर आवेदन इसलिए रिजेक्ट होंगे, क्यों कि मलकियत नप के नाम नहीं है, इसके अलावा कई आवेदन इसलिए भी रद्द होंगे, क्यों कि 20 साल पूरे नहीं हुए हैं।
जिन जगहों का किराया ले रहा नप, वह उसके नाम ही नहीं
नगर परिषद जिन जगहों की दुकानों अपना बताकर किराया ले रहा है, वह उसके नाम ही नहीं है। अधिकतर क्षेत्र अलग-अलग विभागों के नाम है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पालिका बाजार क्षेत्र की जगह नगर परिषद के नाम नहीं है बल्कि स्वास्थ्य विभाग के नाम है। नगर परिषद ने अभी तक स्वास्थ्य विभाग से अपने नाम करवाई ही नहीं है। इसके चलते अधिकतर दुकानदार शर्तें पूरी करने के बावजूद मालिक नहीं बन पाएंगे।
कोट
सरकार की योजना के तहत 56 आवेदन नप के पास आए थे। पहले चरण में सात आवेदनों की डीएमसी कार्यालय से अनुमति मिली है। दूसरे चरण में 15 आवदेन शामिल किए जाएंगे। करीब 36 आवेदन रद्द होंगे। कई क्षेत्र की मलकियत नप के नाम नहीं है और कई दुकानदार ऐसे है जिन्हें 20 साल नहीं हुए हैं।
-ऋषिकेश चौधरी, ईओ, नगर परिषद
विज्ञापन
सरकार ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि नगर परिषद या नगर पालिका की दुकानों में जो 20 साल से किराएदार है, उन्हें मालिकाना हक दिया जाएगा। योजना के तहत फतेहाबाद नगर परिषद में 56 आवेदन आए। नगर परिषद ने आवेदनों को जिला नगर आयुक्त कार्यालय के पास भेजा। सर्वे और जांच के बाद पहले चरण में सात दुकानदारों को मालिकाना हक देने की अनुमति मिली है। अधिकारियों की माने तो 25 फीसदी राशि पहले भरनी होगी। डिमांड नोटिस जाने के 15 दिन के अंदर राशि नप को जमा करवानी होगी। संवाद
विज्ञापन
दूसरे चरण में 13 दुकानदारों को दिया जाएगा मालिकाना हक
नगर परिषद ने पहले चरण में उन दुकानदारों को शामिल किया है जो कि 20 साल से या उससे ज्यादा समय से खुद ही किराएदार है। दूसरे चरण में उन दुकानदारों को शामिल किया गया है जो कि पहले किराएदार की जगह दूसरे को ट्रांसफर हो चुकी है। ट्रांसफर केस के किराएदारों को दूसरे चरण में मालिकाना हक दिया जाएगा। अहम बात यह भी है कि 20 साल से जो जितना पुराना किराएदार होगा, उसे कलेक्टर रेट में ज्यादा छूट मिलेगी।
विज्ञापन
नप की लापरवाही से 36 आवेदन होंगे रद्द
नगर परिषद की लापरवाही के कारण 36 आवेदन रद्द होंगे। नप के पास करीब शहर में 250 दुकानें है। इसमें 56 दुकानदारों ने मालिकाना हक के लिए आवेदन किया था। अधिकारियों की माने तो अधिकतर आवेदन इसलिए रिजेक्ट होंगे, क्यों कि मलकियत नप के नाम नहीं है, इसके अलावा कई आवेदन इसलिए भी रद्द होंगे, क्यों कि 20 साल पूरे नहीं हुए हैं।
जिन जगहों का किराया ले रहा नप, वह उसके नाम ही नहीं
नगर परिषद जिन जगहों की दुकानों अपना बताकर किराया ले रहा है, वह उसके नाम ही नहीं है। अधिकतर क्षेत्र अलग-अलग विभागों के नाम है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पालिका बाजार क्षेत्र की जगह नगर परिषद के नाम नहीं है बल्कि स्वास्थ्य विभाग के नाम है। नगर परिषद ने अभी तक स्वास्थ्य विभाग से अपने नाम करवाई ही नहीं है। इसके चलते अधिकतर दुकानदार शर्तें पूरी करने के बावजूद मालिक नहीं बन पाएंगे।
कोट
सरकार की योजना के तहत 56 आवेदन नप के पास आए थे। पहले चरण में सात आवेदनों की डीएमसी कार्यालय से अनुमति मिली है। दूसरे चरण में 15 आवदेन शामिल किए जाएंगे। करीब 36 आवेदन रद्द होंगे। कई क्षेत्र की मलकियत नप के नाम नहीं है और कई दुकानदार ऐसे है जिन्हें 20 साल नहीं हुए हैं।
-ऋषिकेश चौधरी, ईओ, नगर परिषद