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'सुपर-100' के रास्ते किसान की बेटी और रेहड़ी वाले का बेटा पहुंचेगा आईआईटी, ये है प्रक्रिया
Thu, 23 Jan 2020 12:33 PM IST
रोहतक ब्यूरो
अमर उजाला, फतेहाबाद(हरियाणा)
अमर उजाला, फतेहाबाद(हरियाणा)
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2020 12:33 PM IST
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आईआईटी दिल्ली
एक किसान की बेटी और रेहड़ी चलाकर परिवार का पालन पोषण करने वाले पिता का बेटा अब आईआईटी में प्रवेश पाकर अपने सुनहरे भविष्य की नींव रखेंगे।
ये सच हो सका है शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी योजना सुपर-100 के कारण। फतेहाबाद जिले से कुल 12 बच्चे इस परियोजना के लिए सक्षम पाए गए थे और उन्हें रेवाड़ी में ही निशुल्क कोचिंग दिलवाई गई थी जिसमें से दो विद्यार्थियों ने जेईई मेन की परीक्षा में 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किया है।
इनमें गांव इंदाछोई की काजल पुत्री गुरचरण ने 99.31 अंक हासिल किए हैं जबकि इसी गांव के जस्सी पुत्र कृष्ण कुमार ने 96.71 प्रतिशत अंक लेकर आईआईटी में प्रवेश के लिए अपना दावा ठोक दिया है। इसके अलावा गांव बनमंदौरी की छात्रा भावना ने भी 88 प्रतिशत से अधिक अंक लेकर जेईई मेन की परीक्षा पास कर परिजनों को गौरवान्वित किया है।
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ये सच हो सका है शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी योजना सुपर-100 के कारण। फतेहाबाद जिले से कुल 12 बच्चे इस परियोजना के लिए सक्षम पाए गए थे और उन्हें रेवाड़ी में ही निशुल्क कोचिंग दिलवाई गई थी जिसमें से दो विद्यार्थियों ने जेईई मेन की परीक्षा में 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किया है।
इनमें गांव इंदाछोई की काजल पुत्री गुरचरण ने 99.31 अंक हासिल किए हैं जबकि इसी गांव के जस्सी पुत्र कृष्ण कुमार ने 96.71 प्रतिशत अंक लेकर आईआईटी में प्रवेश के लिए अपना दावा ठोक दिया है। इसके अलावा गांव बनमंदौरी की छात्रा भावना ने भी 88 प्रतिशत से अधिक अंक लेकर जेईई मेन की परीक्षा पास कर परिजनों को गौरवान्वित किया है।
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ये है सुपर-100 परियोजना
सरकारी स्कूलों में अनेक बच्चे शिक्षा के मामले में मेधावी होते हैं लेकिन आर्थिक मजबूरियों के चलते वो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पर्याप्त कोचिंग नहीं ले पाते और ना ही महंगी किताबों का इंतजाम कर पाते हैं।
इस स्थिति से निबटने के लिए शिक्षा विभाग एवं रेवाड़ी के विकल्प फाउंडेशन ने प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों से सौ मेधावी बच्चों को प्रवेश परीक्षा के माध्यम से छांटकर उन्हें अलग से रेवाड़ी में प्रतियोगी परीक्षा के लिए कोचिंग दिलवाई। फतेहाबाद जिले से कुल 12 बच्चों का इस कोचिंग के लिए चयन किया गया।
काजल ने माता-पिता की उम्मीदों को लगाए पंख
गांव इंदाछोई की रहने वाली काजल के पिता गुरचरण किसान हैं और उन्होंने हमेशा ही अपनी बेटी को जीवन में आगे बढ़ने का सपना देखा था। आर्थिक मजबूरियां हमेशा उनके रास्ते में रोड़ा बनती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जेईई मेन की परीक्षा में शानदार अंक लेने के बाद काजल के लिए अब आईआईटी में प्रवेश पाना आसान हो जाएगा।
काजल के पिता ने जहां 12वीं की पढ़ाई की हुई है तो वहीं उसकी माता महज कक्षा आठ तक ही शिक्षा ग्रहण कर पाई हैं। खुद कम पढ़े-लिखे होने और आर्थिक रूप से बहुत ज्यादा मजबूत न होने के बावजूद उन्होंने काजल की पढ़ाई के लिए हमेशा प्रयत्न किए और अब काजल ने उनकी उम्मीदों को नये पंख लगा दिए हैं।
इस स्थिति से निबटने के लिए शिक्षा विभाग एवं रेवाड़ी के विकल्प फाउंडेशन ने प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों से सौ मेधावी बच्चों को प्रवेश परीक्षा के माध्यम से छांटकर उन्हें अलग से रेवाड़ी में प्रतियोगी परीक्षा के लिए कोचिंग दिलवाई। फतेहाबाद जिले से कुल 12 बच्चों का इस कोचिंग के लिए चयन किया गया।
काजल ने माता-पिता की उम्मीदों को लगाए पंख
गांव इंदाछोई की रहने वाली काजल के पिता गुरचरण किसान हैं और उन्होंने हमेशा ही अपनी बेटी को जीवन में आगे बढ़ने का सपना देखा था। आर्थिक मजबूरियां हमेशा उनके रास्ते में रोड़ा बनती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जेईई मेन की परीक्षा में शानदार अंक लेने के बाद काजल के लिए अब आईआईटी में प्रवेश पाना आसान हो जाएगा।
काजल के पिता ने जहां 12वीं की पढ़ाई की हुई है तो वहीं उसकी माता महज कक्षा आठ तक ही शिक्षा ग्रहण कर पाई हैं। खुद कम पढ़े-लिखे होने और आर्थिक रूप से बहुत ज्यादा मजबूत न होने के बावजूद उन्होंने काजल की पढ़ाई के लिए हमेशा प्रयत्न किए और अब काजल ने उनकी उम्मीदों को नये पंख लगा दिए हैं।
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रेहड़ी चलाकर आजीविका चलाते हैं पिता
गांव इंदाछोई निवासी जस्सी के पिता कृष्ण कुमार रोज इंदाछोई से टोहाना तक रेहड़ी चलाकर जाते हैं और इससे वो अपनी आजीविका कमाते हैं। उनके लिए कभी आसान नहीं था कि अपने बेटे को जेईई मेन की कोचिंग की एक माह की फीस भी भर सकें लेकिन शिक्षा विभाग की सुपर-100 स्कीम ने जस्सी के लिए भी कामयाबी की एक राह खोल दी। जस्सी की मानें तो वो अपने पैरों पर खड़े होकर अपने परिवार को संभालना चाहता है और आईआईटी में एडमिशन उसके लिए एक बहुत बड़ा अवसर होगा।
‘ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकारी स्कूल के तीन बच्चों ने जेईई मेन की परीक्षा पास की है। ये बच्चे पहले सुपर 100 में भी शामिल होकर कोचिंग ले रहे हैं। ये बच्चे गरीब परिवार से हैं और दसवीं तक की परीक्षा सरकारी स्कूल से पास की है। ये उन बच्चों के लिए उदाहरण बने हैं जो ये कहते हैं कि सरकारी स्कूल के बच्चे आगे नहीं निकल सकते हैं।’
- रमेश कुमार, गणित विशेषज्ञ, फतेहाबाद।
‘ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकारी स्कूल के तीन बच्चों ने जेईई मेन की परीक्षा पास की है। ये बच्चे पहले सुपर 100 में भी शामिल होकर कोचिंग ले रहे हैं। ये बच्चे गरीब परिवार से हैं और दसवीं तक की परीक्षा सरकारी स्कूल से पास की है। ये उन बच्चों के लिए उदाहरण बने हैं जो ये कहते हैं कि सरकारी स्कूल के बच्चे आगे नहीं निकल सकते हैं।’
- रमेश कुमार, गणित विशेषज्ञ, फतेहाबाद।