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नशे की दवाइयों के बिना मानक मिश्रण से तैयार हो रही हेरोइन, हद्य पर सीधा असर बन रहा मौत का कारण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 May 2022 11:36 PM IST
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Heroin is being prepared with standard mixture without intoxicating drugs, the cause of death is directly affecting the heart
मुकेश खुराना
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फतेहाबाद। नशे का गढ़ बने फतेहाबाद जिले में युवा सबसे ज्यादा चिट्टा यानी हेरोइन नशा के आदी हो रहे हैं। जिले में सबसे ज्यादा हेरोइन की ही डिमांड हो रही है। इसे पूरा करने के लिए तस्कर दिल्ली से लाकर सप्लाई कर रहे हैं। इस डिमांड को पूरा करने में नाइजीरियन मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। वे 1000 से 1200 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से हेरोइन की सप्लाई दे रहे हैं। लेकिन जो हेरोइन हरियाणा जिले में सप्लाई हो रही है वह केमिकल युक्त है। पुलिस अफसर से लेकर डॉक्टर तक खुद इस बात का मान रहे है और ये ही मौत का सबसे बड़ा कारण है।
हेरोइन अफीम के पौधे के बीज फली से निकाली गई मार्फिन संबंधित नशा है। लेकिन हेरोइन को नशे की दवाइयों के मिश्रण से ही तैयार किया जा रहा है। इसमें दवाइयों की मात्रा कितनी है इसका कोई मानक नहीं है। सीरींज के जरिये जब नशा लिया जाता है तो ये 10 से 12 सेकेंड में शरीर पर असर करता है। इसका सबसे ज्यादा असर हृदय पर होता है और धड़कन प्रभावित होती है जो कि मौत का कारण बनता है।
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अफगानिस्तान से आती है असली हेरोइन
हेरोइन का मुख्य गढ़ अफगानिस्तान माना जाता है, यहां से बार्डर के जरिये यह पाकिस्तान का रास्ते पंजाब में सप्लाई होती है और फिर चेन सिस्टम तक नशा लेने वालों तक पहुंचती है। यहां मिलने वाली हेरोइन की कीमत करीब 2500 से 3000 रुपये प्रति ग्राम होती है जबकि दिल्ली से हेरोइन नाइजीरियन 1000 से 1200 रुपये प्रति ग्राम में उपलब्ध करवा रहे हैं।
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पुलिस की सैंपल रिपोर्ट में आज तक नहीं उठा मिलावट पर सवाल
पुलिस जब भी नशा पकड़ती है तो उसमें सैंपल के तौर पर लिया जाता है, जिसे जांच के लिए लैब में भेजा जाता है। लेकिन आज तक सैंपल रिपोर्ट पर सवाल नहीं उठा है। पुलिस के पास सैंपल रिपोर्ट आती है कि जो नशा पकड़ा गया है उसमें उसकी मात्रा कितनी है और अन्य किस केमिकल की मिलावट है।
80 फीसदी नशेड़ी हेरोइन का नशा करते हैं
नशा मुक्ति केंद्र में वर्ष 2018 में मई माह से लेकर मई 2022 तक 997 मरीज दाखिल हुए है। इनमें से करीब 80 फीसदी नशेड़ी ऐसे हैं जो कि हेरोइन का नशा कर रहे हैं। इनमें भी 90 फीसदी हेरोइन का नशा करने के लिए सीरींज का इस्तेमाल करते हैं। एक ही सीरींज का कइयों का द्वारा उपयोग करने से यह एचआईवी का कारण भी बन रहा है।
नशा मुक्ति केंद्र में जो भी मरीज आते है, जब उनकी काउंसिलिंग की जाती है तो करीब 80 फीसदी मरीज ऐसे होते है जो कि सीरींज लगाकर हेरोइन नशा ले रहे होते है। सीरींज से लिया गया नशा 10 सेकेंड में शरीर में फैल जाता और सीधा हृदय पर असर करता है। शख्स की यही मौत का कारण बनता है। क्योंकि नशा लेने वाले मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो चुकी होती है। हेरोइन को नशे की दवाइयों के मिश्रण से तैयार किए जाने की आशंका है, क्योंकि इसमें ये तय नहीं होता है कि किसी दवा की कितनी मात्रा डाली गई है। सैंपल जांच में जरूर इसका पता लगाया जा सकता है।
- डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक एवं नोडल अधिकारी नशा मुक्ति केंद्र
अफीम को प्रोसेस करके हेरोइन तैयार की जाती है लेकिन बाजार में जा हेरोइन सप्लाई हो रही है उसमें कई प्रकार के नशीली दवाएं भी डाली जा रही है, जो कि मानक के अनुसार नहीं होती। अफीम से तैयार ही हेरोइन असली होती है जिसकी कीमत भी ज्यादा होती है।

- डॉ. अंशुल सहगल, एमडी मेडिसिन
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हेरोइन की कीमत ज्यादा है लेकिन हमारे यहां जो सप्लाई हो रही है उसकी कीमत कम है। जो हेरोइन यहां सप्लाई हो रही है वह केमिकल युक्त होती है। हेरोइन की भी अलग-अलग क्वालिटी होती है जिसमें जलाकर और इंजेक्शन के द्वारा लिया जाता है।
- रविश कुमार, इंचार्ज एंटी नारकोक्टिस टीम, पुलिस विभाग
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