फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   hero of kargil, kargil day, fatehabad hero manohar and narender, bhattu, fatehabad

कारगिल के नायक.... मनोहर और नरेंद्र

Tue, 26 Jul 2016 01:13 AM IST
fatehabad
fatehabad Updated Tue, 26 Jul 2016 01:13 AM IST
विज्ञापन
hero of kargil, kargil day, fatehabad hero manohar and narender, bhattu, fatehabad
शहीद मनाहर लाल और नरेंद्र सिंह - फोटो : amar ujala
वो अपने मां-बाप का लाडला था, लेकिन उसकी बहादुरी और शहादत ने उसे गांव का लाडला बेटा बना दिया। दुश्मन की गोली लगने के बाद भी उसने कदम पीछे नहीं हटाए, बल्कि तब तक दुश्मनों से जंग लड़ता रहा, जब तक जिस्म की आखिरी सांस खर्च नहीं हो गई। उम्र थी महज 23 साल, जिस उम्र में नौजवान घोड़ी चढ़ने के सपने देखते हैं, उस उम्र में ढाणी डुल्ट का मनोहर लाल 18 जून 1999 को तिरंगे को सीने से लगाकर चार कंधों पर शान से अपने गांव पहुंचा था। अफसोस बस इतना था, परिवार और गांव वालों ने अपने उस बहादुर बेटे को आखिरी बार देखा था। उस दिन अग्नि में समाने से पहले वह नौजवान अपना और अपने खानदान का नाम फतेहाबाद के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिख गया था। मनोहर की शहादत के 17 बरस बाद परिजनों को सरकार से गिला तो कुछ नहीं है लेकिन बेटे की प्रतिमा फतेहाबाद में लगाने की हसरत आज तक दिल में दबी है, जिसे कोई अफसर सुनना नहीं चाहता।
विज्ञापन


लेफ्टिनेंट की परीक्षा कर चुका था पास, शहादत के बाद पहुंचा ज्वाइनिंग का लेटर
29 अप्रैल 1995 को सेना में बतौर सिपाही भर्ती हुआ मनोहर लाल सेना में एक अधिकारी बनकर अपने दादा और पिता का नाम और रोशन करना चाहता था। फौज में जाने की प्रेरणा उसे अपने दादा छाजूराम से ही मिली जो खुद फौज में रह चुके थे। सेना में अफसर बनने की उसकी ललक के कारण उसने पूरी तैयारी की और एनडीए की परीक्षा को पास भी किया। इस बीच कारगिल में लड़ाई छिड़ गई। कारगिल के द्रास सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए 13 जून 1999 को फतेहाबाद का यह वीर जवान शहीद हो गया। परिजनों की आंखों से आंसू नहीं रुके थे जब वीरगति को प्राप्त होने के बाद मनोहर का बतौर लेफ्टिनेंट ज्वाइनिंग लेटर उनके हाथों में पहुंचा। शहादत के पांच दिन बाद मनोहर का अंतिम संस्कार पैतृक गांव ढाणी डुल्ट में ही हुआ था।
विज्ञापन


शहादत के 17 बरस बाद भी शहीद के पिता की ख्वाहिश अधूरी
शहीद मनोहर लाल की शहादत के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार ने उसके परिवार की पूरी मदद की। घर चलाने के लिए गैस एजेंसी अलॉट की गई। शहीद के भाई राजेश को भी सरकारी नौकरी मिली। तत्कालीन बंसीलाल सरकार ने भूना में कॉलेज का नाम मनोहर लाल के नाम पर रखने की घोषणा की थी, जिसे अभी तक सिरे नहीं चढ़ाया गया है। वैसे परिवार को सरकार से कोई गिला नहीं है, लेकिन 17 बरस पहले अपने बेटे की शहादत के बाद उसकी अर्थी को कंधा दे चुका पिता रामेश्वर जरूर एक अधूरी ख्वाहिश दिल में और ज्ञापन हाथ में लिए रहते हैं। शहीद मनोहर लाल के पिता रामेश्वर लाल चाहते हैं कि फतेहाबाद शहर में उसके शहीद बेटे मनोहर लाल की प्रतिमा किसी चौक पर स्थापित हो। इसके लिए लगने वाला सारा खर्च भी उठाने को तैयार हैं। वजह पूछने पर बताते हैं कि मनोहर की शहादत को 17 बरस हो गए हैं। एक पूरी पीढ़ी बदल गई है, कहीं ऐसा ना हो कि आने वाली पीढ़ी हमारे बेटे की शहादत को भूल ही ना जाए। यही वजह है पूरी दुनिया के सामने बहादुर बेटे की कहानी सुनाने वाला यह पिता अकेले में सिसकियां भरने लगता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले वतन पर मिटने वाले का यही बाकी निशां होगा। कारगिल युद्ध के दौरान नौ जुलाई 1999 को अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए वीर गति को प्राप्त हुए गांव मेहूवाला के वीर सपूत नरेंद्र सिंह पर उक्त पंक्तियां सटीक बैठती हैं। अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले इस नौजवान की याद में हर वर्ष उनके परिजन व अनेक साथी शहीदी दिवस के रूप में उनकी कुर्बानी को याद कर श्रद्धांजलि देते हैं।

देशभक्त और फौजी परिवार में हुआ जन्म, आगे बढ़ाई परिवार की विरासत
शहीद नरेंद्र सिंह का जन्म 17 सितंबर 1978 को एक ऐसे परिवार में हुआ जो पूरा परिवार ही देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत था। उनके दादा अमर सिंह जाखड़ व पिता जय सिंह जाखड़ भी फौज में थे। नरेंद्र सिंह की प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश के फौजी कैंट टैकनपुर में हुई, जहां उनके पिता सीमा सुरक्षा बल में थे। फौजी कैंट की शिक्षा ने नरेंद्र सिंह पर ऐसी छाप छोड़ी कि उन्होंने सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने की ठान ली। उनके पिता की 24 वर्ष सेवाएं पूरी होने के बाद उन्हें अपने पिता के साथ गांव लौटना पड़ा और बाकी की पढ़ाई उन्होंने बाल भारती स्कूल में पूरी की।

18 वर्ष की उम्र में हुई सेना में भर्ती
नरेंद्र सिंह के पिता जयसिंह जाखड़ ने बताया कि नरेंद्र सिंह हर प्रकार के नशे के खिलाफ था। खाने में वह दही व घी लेता था। वालीवाल और क्रिकेट उसके पसंदीदा खेल थे। नरेंद्र को 18 वर्ष की उम्र में हिसार के फौजी कैंट में भर्ती के दौरान सफलता मिली और देश सेवा का सपना उसका पूरा हो गया। उनकी ड्यूटी कश्मीर के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में लगी, जहां उन्होंने अपने कर्तव्य का बखूबी पालन किया। माता रेशमा देवी और भाई रविंद्र ने बताया की छुटियों के दिनों में जब भी घर आता उसका सीना एक देशभक्त की भांति तना होता था। उसे खाली बैठना पसंद नहीं था। वह घर के हर काम में हाथ बंटाता था।

त्रिशूल घाटी पर लहराया तिरंगा, रात के अंधेरे में दुश्मनों ने मारी दो गोलियां
मई 1999 में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सीमा में टाइगर हिल, मश्कोह घाटी, द्रास, बटालिक और कारगिल क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और मुकाबले में आए भारतीय सैनिकों को मार गिराया। पाकिस्तानी सेना 5 से 18 हजार फुट की ऊंचाई होने के कारण भारतीय सेना को काफी नुकसान उठाना पड़ा। डटकर मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना को ऑपरेशन विजय शुरू करना पड़ा, जिसमे 8वीं रेजिमेंट से बहादुर सिपाही नरेंद्र सिंह को दुश्मनों से टक्कर लेने के लिए भेजा गया। वे दुश्मनों को परास्त करते हुए मश्कोह घाटी के प्वाइंट 5301 पर पहुंच गए और रात को दुश्मनों की गोलियों के सामने चलते हुए अपनी बहादुरी की बदौलत दुश्मनों को मौत के घाट उतार दिया और त्रिशूल घाटी पर तिरंगा लहरा दिया।


त्रिशूल घाटी पर रात्रि के समय काफी अंधेरा होने के कारण दुश्मनों ने मौके का फायदा उठाते हुए चोटी पर हमला बोल दिया। मुकाबले में एक गोली नरेंद्र सिंह की जांघ में लगी और दूसरी गोली सिर में लगी। घायल नरेंद्र सिंह मश्कोह घाटी के प्वाइंट 5301 पर गिर पड़े और भारत माता का जयकारा लगाते हुए शहीद हो गए। इस छोटी सी उम्र में बिछुड़ना मां-बाप के लिए ये क्षण भारी थे, लेकिन इसकी देशभक्ति के प्रेम को देखकर अपने को गौरवान्वित भी महसूस कर रहे थे। उस समय हर शख्स की आंखों में झरनों की भांति बह रहे आंसू शायद यही कह रहे थे कि अपने दिल के अरमान व इच्छा नरेंद्र ने पूरे कर लिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed