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नहीं मिल पा रही सरकारी मदद, 1500 पशुओं पर भुखमरी का संकट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 09 Aug 2021 11:42 PM IST
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Government help is not available, 1500 animals face starvation crisis
नंदीशाला में अव्यवस्था के चलते बाहर सड़क पर बैठा पशुओं का झुंड। संवाद - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। लॉकडाउन के दौरान आई मंदी का असर हर वर्ग पर पड़ा है। नंदीशालाएं व गोशालाएं भी इससे अछूती नहीं हैं। उसका परिणाम है कि आज सड़कों पर लावारिस पशुओं के झुंड दोबारा नजर आने लगे हैं। हालांकि गोशालाओं में लोग सेवा भाव से भी दान दे जाते हैं, लेकिन नंदीशालाओं में दान भी नहीं आ रहा। सरकार की ओर से भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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फतेहाबाद शहर में एकमात्र नंदीशाला है। इसमें आमदन से ज्यादा खर्चे हैं। सरकारी मदद कम हो चुकी है। बीते दो साल से निजी दान भी न के समान है। नंदीशाला के रिकॉर्ड मुताबिक फिलहाल लगभग 1500 पशु हैं। नगर परिषद की ओर से 1.50 लाख रुपये प्रति माह नंदीशाला के संचालन के लिए मिलते हैं। यह राशि कर्मचारियों के वेतन में ही पूरी हो जाती है। यहां पर 12 कर्मचारी 9 हजार रुपये प्रति माह वेतन पर कार्यरत हैं। 1 लाख 8 हजार रुपये वेतन पर खर्च हो जाते हैं। चारा लाने के लिए तीन ट्रैक्टर हैं। इसके अलावा बिजली बिल भी हजारों में आता है। उपरोक्त डेढ़ लाख रुपये इसी पर खर्च हो जाते हैं। गोसेवा आयोग की ओर से सालाना 8 से 9 लाख रुपये सालाना मिलता है। जो नंदीशाला में शेड और अन्य रखरखाव या संसाधनों पर खर्च हो जाते हैं। अब 1500 नंदीशाला में 1500 पशुओं पर भुखमरी का संकट मंडराने लगा है।
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ऐसे कम हुई सरकार मदद
करीब तीन साल पहले उपायुक्त डॉ. जेके आभीर के कार्यकाल में नंदीशाला को विभागों से काफी मदद मिलने लगी थी। डीसी के निर्देश पर पशु पालन विभाग, पंचायत विभाग, नगर परिषद समेत कई विभागों ने अपने स्तर पर मदद शुरू की थी। यहां तक कि पुलिस विभाग ने भी कर्मचारियों को निर्देश दिया था कि नंदीशाला के लिए हर माह दान दें। इस तरह लगभग 2 लाख रुपये हर महीने इसी तरह एकत्रित हो जाते हैं। मगर डॉ. जेके आभीर के जाते ही यह दान कम होता गया। विभागों ने भी मदद के हाथ पीछे खींच लिए।
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लोगों ने दान देना भी बंद किया
वर्ष 2020 से पहले नंदीशाला में कार्यक्रम आदि होते थे। लोग स्वेच्छा से हजारों रुपये दान दे जाते थे। किसान चारा व तूड़ी दे जाते थे। लॉकडाउन के बाद कार्यक्रम बंद हो गए। इसके अलावा मंदी के चलते लोगों ने स्वेच्छा से दान देना भी छोड़ दिया। फिलहाल हर माह 10 हजार से भी कम दान आ रहा है।
ऐसे बढ़े सड़कों पर लावारिस पशु
फतेहाबाद को स्ट्रे कैटल फ्री जिला बनाने के लिए चार साल पहले अभियान चलाया गया था। तब गांवों में भी छोटे-छोटे बाड़े बनाए गए थे, ताकि वहां लावारिस पशुओं को एक जगह रखा जा सकते। हर कस्बे में नंदीशाला बना दी गई। मगर कुछ समय बाद सारी व्यवस्था बिगड़ गई। अब गांवों के लोग लावारिस पशुओं को शहरों में छोड़ जाते हैं। यहां से पकड़ कर कहां छोड़ा जाए, इसके लिए कोई जगह नहीं है। नंदीशालाओं में पहले से भीड़ और अव्यवस्था है।
बजट का जबरदस्त टोटा : नंदीशाला इंचार्ज
गो सेवा की बातें करना सभी को आसान लगता है। नंदीशाला में पशुओं की देखरेख में सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि खर्चा लगता है। फिलहाल लोग दान नहीं दे रहे। सरकारी मदद नाममात्र मिल रही है। प्रतिमाह डेढ़ लाख रुपये न्यूनतम खर्च है। बजट की बहुत कमी सता रही है।

-प्रेम कुमार, इंचार्ज, नंदीशाला फतेहाबाद
सभी नंदीशालाओं की हालत खराब : आर्य
प्रदेश में ज्यादातर नंदीशालाओं की हालत खराब है। सरकार अनदेखी कर रही है। कुछ दिन माहौल बनाया गया था कि गोवंश की सेवा ही सर्वोपरि है। मगर अब गायों व नंदियों की दुर्गति हो रही है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। फतेहाबाद जिले की नंदीशालाओं का बुरा हाल है। इसको लेकर स्थानीय प्रशासन व सरकार से बात चल रही है।
-शमशेर आर्य, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा राज्य गोशाला संघ
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