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फोरलेन जमीन मालिकों को बड़ी राहत, मुआवजा हुआ दोगुना
fatehabad
Updated Sat, 02 Jul 2016 12:32 AM IST
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सुरेंद्र असीजा । हिसार से डबवाली तक गुजरने वाले नेशनल हाइवे नौ पर निर्माणाधीन फोरलेन सड़क के लिए नेशनल हाइवे अथॉरिटी आफ इंडिया द्वारा अधिग्रहीत की गई जमीन के मालिकों को बड़ी राहत मिली है। आर्बीटेटर जेके अभीर ने जमीन का मूल रेट 25 लाख प्रति एकड़ बढ़ाकर नौ फीसदी ब्याज सहित जमीन मालिकों को अदा करने के निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं, जमीन की मूल राशि का 100 फीसदी सोलिटियम भी जमीन मालिकों को मिलेगा। यानी की जिस किसान की पहले 80 लाख रुपये प्रति एकड़ जमीन का मूल्य था, अब उसे एक करोड़ 60 लाख और ब्याज अलग से मिलेगा। आर्बीटेटर जेके अभीर ने इसकी पुष्टि की है।
नेशनल हाइवे अथॉरिटी आफ इंडिया ने फोरलेन सड़क के लिए फतेहाबाद जिले में 643 कनाल जमीन का अधिग्रहण किया था। इसमें 473 कनाल मौजा फतेहाबाद और 183 कनाल बस्ती भीमा रकबे में पड़ती है। इस जमीन के लिए 29 जनवरी 2015 को जिला राजस्व अधिकारी ने 80, 70 और 54 लाख रुपये की कैटेगिरी बनाई थी। इस हिसाब से अवार्ड घोषित किया था।
नेशनल हाइवे अथॉरिटी एक्ट के अनुसार जबरन जमीन लेने पर 30 फीसदी सोलिटियम भी साथ दिया गया। 16 मई 2015 को नया लैंड एक्ट लागू हो गया, जिसके अनुसार देश भर में भूमि अधिग्रहण इसी एक्ट के अनुसार किया जाना तय हुआ था। नेशनल हाइवे में जमीन देने वाले मालिकों का कहना था कि नए कानून के तहत उन्हें 100 फीसदी सोलिटियम मिलना चाहिए था। जमीन मालिकों का तर्क है कि जमीन की कीमत के बराबर सोलिटियम और साथ में ब्याज दिया जाना चाहिए था, जबकि नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने सोलिटियम 30 फीसदी ही दिया और साथ में 11 लाख 50 हजार रुपये जमीन का कलेक्टर रेट भी कम दिए। किसान अपनी मांग पर अड़े रहे और हाइवे पर ही कई दिनों तक धरना दिया।
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जमीन मालिकों ने डीआरओ द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ आर्बीटेटर कोर्ट की शरण ली। बुधवार को आर्बीटेटर जेके अभीर की अदालत ने फोरलेन सड़क में जमीन देने वाले 94 जमीन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए जमीन की मूल दर में प्रति एकड़ 25 लाख मुआवजा बढ़ाकर देने के आदेश दिए। आर्बीटेटर ने साथ ही 31 जनवरी 2015 से अब तक नौ फीसदी ब्याज भी किसानों को अदा करने के निर्देश दिए। हालांकि किसान इस फैसले से अभी भी संतुष्ट नहीं है। किसानों का मानना है कि उनकी जमीन कमांड एरिया के अंदर पड़ती है, जिसका बाजार रेट काफी ज्यादा है। सरकार को चाहिए कि नए भूमि अधिग्रहण एक्ट के अनुसार उनको जमीन की कीमत अदा करे। जबकि नेशनल हाइवे अथॉरिटी अपने नियमों पर ही जमीन का रेट अदा करने पर अड़ा हुआ है ।
इस तरह मिलेंगे जमीन के भाव
जनवरी 2014 में नेशनल हाइवे अथॉरिटी आफ इंडिया ने डीआरओ के मार्फत जमीन अधिग्रहण के अवार्ड सुनाए, तो उसमें अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई। इसमें सबसे ज्यादा 80 लाख प्रति एकड़ धांगड़ की जमीन का रकबा, तो सबसे कम 34 लाख 50 हजार प्रति एकड़ हिजरावां रकबे के अवार्ड सुनाए गए।
नेशनल हाइवे के रूल के मुताबिक किसानों से जबरन जमीन लेने के लिए 80 लाख साथ में 30 फीसदी यानी की एक करोड़ चार लाख। इसी तरह हिजरावां रकबा के 34 लाख 50 हजार के अलावा 30 फीसदी कंपेसेशन यानी की तकरीबन 44 लाख 85 हजार किसानों को मिले। अब बुधवार को ये फैसला हुआ कि 80 लाख वाले धांगड़ की जमीन का मूल्य अब 25 लाख बढ़ाकर एक करोड़ पांच लाख और इतना ही सोलिटियम किसानों को मिलेगा।
;नए भूमि एक्ट के तहत किसानों को जमीन की मूल्य के बराबर सोलिटियम मिलना था। पीछे सोलिटियम 70 प्रतिशत कम दिया गया और जमीन के बाजार भाव 25 लाख प्रति एकड़ कम थे। आर्बीटेटर के फैसले ने किसानों को उनका हक दे दिया।
जेके अभीर, आर्बीटेटर एवं एडीसी, फतेहाबाद।
आर्बीटेटर के फैसले से निराशा हुई है। इसको कोर्ट में चुनौती देने के फैसले पर विचार जारी है। किसानों को जब तक पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक फोरलेन का काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
महेश मेहता, अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति
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नेशनल हाइवे अथॉरिटी आफ इंडिया ने फोरलेन सड़क के लिए फतेहाबाद जिले में 643 कनाल जमीन का अधिग्रहण किया था। इसमें 473 कनाल मौजा फतेहाबाद और 183 कनाल बस्ती भीमा रकबे में पड़ती है। इस जमीन के लिए 29 जनवरी 2015 को जिला राजस्व अधिकारी ने 80, 70 और 54 लाख रुपये की कैटेगिरी बनाई थी। इस हिसाब से अवार्ड घोषित किया था।
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नेशनल हाइवे अथॉरिटी एक्ट के अनुसार जबरन जमीन लेने पर 30 फीसदी सोलिटियम भी साथ दिया गया। 16 मई 2015 को नया लैंड एक्ट लागू हो गया, जिसके अनुसार देश भर में भूमि अधिग्रहण इसी एक्ट के अनुसार किया जाना तय हुआ था। नेशनल हाइवे में जमीन देने वाले मालिकों का कहना था कि नए कानून के तहत उन्हें 100 फीसदी सोलिटियम मिलना चाहिए था। जमीन मालिकों का तर्क है कि जमीन की कीमत के बराबर सोलिटियम और साथ में ब्याज दिया जाना चाहिए था, जबकि नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने सोलिटियम 30 फीसदी ही दिया और साथ में 11 लाख 50 हजार रुपये जमीन का कलेक्टर रेट भी कम दिए। किसान अपनी मांग पर अड़े रहे और हाइवे पर ही कई दिनों तक धरना दिया।
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जमीन मालिकों ने डीआरओ द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ आर्बीटेटर कोर्ट की शरण ली। बुधवार को आर्बीटेटर जेके अभीर की अदालत ने फोरलेन सड़क में जमीन देने वाले 94 जमीन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए जमीन की मूल दर में प्रति एकड़ 25 लाख मुआवजा बढ़ाकर देने के आदेश दिए। आर्बीटेटर ने साथ ही 31 जनवरी 2015 से अब तक नौ फीसदी ब्याज भी किसानों को अदा करने के निर्देश दिए। हालांकि किसान इस फैसले से अभी भी संतुष्ट नहीं है। किसानों का मानना है कि उनकी जमीन कमांड एरिया के अंदर पड़ती है, जिसका बाजार रेट काफी ज्यादा है। सरकार को चाहिए कि नए भूमि अधिग्रहण एक्ट के अनुसार उनको जमीन की कीमत अदा करे। जबकि नेशनल हाइवे अथॉरिटी अपने नियमों पर ही जमीन का रेट अदा करने पर अड़ा हुआ है ।
इस तरह मिलेंगे जमीन के भाव
जनवरी 2014 में नेशनल हाइवे अथॉरिटी आफ इंडिया ने डीआरओ के मार्फत जमीन अधिग्रहण के अवार्ड सुनाए, तो उसमें अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई। इसमें सबसे ज्यादा 80 लाख प्रति एकड़ धांगड़ की जमीन का रकबा, तो सबसे कम 34 लाख 50 हजार प्रति एकड़ हिजरावां रकबे के अवार्ड सुनाए गए।
नेशनल हाइवे के रूल के मुताबिक किसानों से जबरन जमीन लेने के लिए 80 लाख साथ में 30 फीसदी यानी की एक करोड़ चार लाख। इसी तरह हिजरावां रकबा के 34 लाख 50 हजार के अलावा 30 फीसदी कंपेसेशन यानी की तकरीबन 44 लाख 85 हजार किसानों को मिले। अब बुधवार को ये फैसला हुआ कि 80 लाख वाले धांगड़ की जमीन का मूल्य अब 25 लाख बढ़ाकर एक करोड़ पांच लाख और इतना ही सोलिटियम किसानों को मिलेगा।
;नए भूमि एक्ट के तहत किसानों को जमीन की मूल्य के बराबर सोलिटियम मिलना था। पीछे सोलिटियम 70 प्रतिशत कम दिया गया और जमीन के बाजार भाव 25 लाख प्रति एकड़ कम थे। आर्बीटेटर के फैसले ने किसानों को उनका हक दे दिया।
जेके अभीर, आर्बीटेटर एवं एडीसी, फतेहाबाद।
आर्बीटेटर के फैसले से निराशा हुई है। इसको कोर्ट में चुनौती देने के फैसले पर विचार जारी है। किसानों को जब तक पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक फोरलेन का काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
महेश मेहता, अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति