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Fatehabad News: फिरोजशाह तुगलक ने फतेह खां के नाम पर रखा फतेहाबाद का नाम

Thu, 17 Apr 2025 10:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 17 Apr 2025 10:52 PM IST
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Firoz Shah Tughlaq named Fatehabad after Fateh Khan
फतेहाबाद के किले में ​लगा स्तंभ। संवाद
फतेहाबाद। फतेहाबाद शहर का इतिहास करीब सात सौ वर्ष पुराना है। शहर का पुराना नाम इकदार था। बताया जाता है कि फिरोजशाह तुगलक ने अपने बेटे का नाम फतेह खां के नाम पर इस शहर का नाम रखा था।
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फतेहाबाद को कभी तुगलक वंश की शान कहा जाता था। शहर की स्थापना के समय इसके आसपास घने जंगल थे और शहर काफी सीमित क्षेत्र में था। यहां पर भट्टी सरदारों का राज था। सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने शहर में अनेक मस्जिदों व भव्य इमारतों का निर्माण करवाया। शहर के तहसील चौक में एक दरगाह है। यहां ऐतिहासिक लाट बनी हुई है। बलुआ मिट्टी, लाल, सफेद पत्थर व लोहे के मिश्रण से बनी इस लाट पर तुगलक वंश से संबंधित संक्षिप्त जानकारी खुदी हुई है। कुछ इतिहासकार इस लाट को अशोक का कीर्ति स्तंभ मानते हैं।
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वक्त के थपेड़ों और सरकारी अनदेखी के चलते ऐतिहासिक इमारत जर्जर होता जा रहा है। इस किले को करीब 40 वर्ष पहले जब लोग हिसार व रतिया से फतेहाबाद की ओर आते थे, तो ऊंचे भू-भाग पर स्थित किले की दीवारें एक प्रहरी की तरह नजर आती थीं, लेकिन अब इसकी प्राचीर की एक-एक ईंट तक गायब हो गई है। किले के नाम पर केवल मिट्टी का भूखंड ही बचा है।
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शिकार के शौक के लिए करवाया किले का निर्माण
इतिहासकारों के अनुसार फिरोजशाह तुगलक शिकार के शौकीन थे। वे फतेहाबाद व सिरसा के जंगलों में शिकार करने के लिए आते थे। इसी के चलते वर्ष 1354 में उन्होंने फतेहाबाद में शेरगाह किले का निर्माण करवाया था। उस समय में मुल्तान और लाहौर के रास्ते से आक्रमणकारी यहीं से होकर दिल्ली पहुंचते थे। इन आक्रमणकारियों को रोकने के लिए 52 एकड़ के भूभाग में बने इस किले का निर्माण करवाया गया था। इस किले में निर्माण के दौरान कई भूमिगत सुरंगें भी थी, जिन्हें गुप्त मार्गों से जोड़ा गया था। परंतु समय की रेत में यह भूमिगत सुरंगें भी पट गई हैं। इस सुरंग को लेकर लोगों की धारण थी कि यह सुरंग हिसार से होते हुए दिल्ली तक जाती थी। लेकिन अब किले के मात्र अवशेष की बचे हैं। किले की दीवारें 7 से 8 फुट तक चौड़ी थी और इनको छोटी ईंटों से बनाया गया था।




फिरोज शाह लाट भी है शहर की शान

फिरोजशाह तुगलक ने इसी किले में ईदगाह व फिरोजी लाट का निर्माण भी करवाया था। ईदगाह में स्थित इस फिरोजी लाट को हांसी से सम्राट अशोक के स्तंभ से निकाला गया था। इस फिरोजी लाट के मुख्य भाग पर संगमरमर का पत्थर लगा हुआ है और निचले भाग पर बलुआ पत्थर लगा है, जिस पर अरबी में कुरान की आयतें लिखी हुई हैं। इस लाट को तो पुरातत्व विभाग ने अपने संरक्षण में ले रखा है, लेकिन शेरगाह किले की ओर ध्यान नहीं दिया गया है। इस लाट को बचाने के लिए पुरातत्व विभाग की ओर से कई वर्ष पहले केमिकल की परत पर चढ़ाई गई थी ताकि इस पर लिखी आयतें सुरक्षित रह सके।
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