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नप कर्मचारियों ने झाड़ू लेकर सड़कों पर किया प्रदर्शन
fatehabad
Updated Wed, 20 Jul 2016 11:17 PM IST
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सर्वकर्मचारी संघ के आह्वान पर नगर परिषद कर्मियो ने अपनी मांगों को लेकर बुधवार को झाडू़ जुलूस निकाला। इस दौरान जुलूस की अध्यक्षता कर्मचारी संघ के प्रधान लाभ सिंह ने की। इससे पूर्व नगर परिषद के कर्मी नगर परिषद कार्यालय में एकत्रित हुए। गुस्साए कर्मचारियों ने सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी भी की। प्रदर्शन में लाभ सिंह ने कहा कि सरकार अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वायदों से मुकर रही है। उन्होंने मांग रखी कि चुनावी घोषणापत्र के मुताबिक कच्चे कर्मचारियों को पक्का कर उन्हें राहत दिलाए। न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये, छठे वेतन आयोग की वेतनमान की विसंगतियों को दूर करते हुए सातवां वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार एक जनवरी 2016 से लागू किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नगर परिषद में खाली पड़े पदों को योग्यतानुसार भरने, ईपीएफ, 100 वर्ग गज के प्लाट कम दरों पर दिलवाने की मांग की। सर्वकर्मचारी संघ के प्रधान राजेश कन्हडी ने कहा कि सरकार अपने घोषणा पत्र एजेंडें के अनुसार कर्मचारियो की मांगों को पूरा करे और निजीकरण की नीतियों को वापस ले।
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अगर सरकार उनकी मांगो पर ध्यान नहीं देती, तो वे संघर्ष को तेज करने पर मजबूर होंगे। बिजली बोर्ड प्रधान भूप सिंह, रोडवेज प्रधान चंद्रभान, राजबीर बिक्का, भागचंद शर्मा, कृष्ण, राजविंद्र, पालाराम, महेंद्र दरोगा, सुभाष भट्टी, कर्मचारी यूनियन जिला प्रधान रानी देवी, शेशो रानी, श्यामलाल, वेदप्रकाश, ईश्वर सिंह, प्रेम पटवारी, नवीन भाटिया, विष्णु शर्मा आदि उपस्थित थे।
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ठेकेदारी प्रथा से नगर परिषद कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित : तुषामढ़
नगर परिषद कर्मचारी बुधवार को अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। नगरपालिका कर्मचारी संघ के प्रधान ओमप्रकाश ने प्रदर्शन की अध्यक्षता तथा संचालन सहसचिव रामेश्वर ने किया। प्रदर्शन को सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान भूप सिंह भड़ोलांवाली ने भी संबोधित किया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए राज्य उपप्रधान रमेश तुषामढ़ ने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पूर्व कर्मचारियों से उनकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा का रुख बदल गया। कर्मचारी हितों को दरकिनार कर भाजपा अब विभागों को सिकोड़ने पर लगी हुई है। सरकारी विभागों को निजी हाथों में दिया जा रहा है।
कर्मचारियों की जायज मांगों को पूरा करने की बजाय भाजपा सरकार ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि ठेकेदारी प्रथा के चलते सबसे ज्यादा शोषण नगरप रिषद कर्मचारियों का हो रहा है। ठेकेदार के पास काम करने वाले कच्चे कर्मचारियों का इपीएफ और ईएसआई का कोई हिस्सा नहीं है और मासिक वेतन भी समय पर नहीं दिया जाता। कर्मचारियों की कमी के कारण शहर में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल हो चुका है, लेकिन सरकार कर्मचारियों की भर्ती नहीं कर रही है।
कर्मचारी नेता ब्रह्मपाल ने कहा कि कच्चे व पक्के कर्मचारियों की जायज मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो कर्मचारी आंदोलन को ओर तेज कर देंगे। प्रदर्शन को पवन दरोगा, जगदीश आदीवाल, सत्यवान टाक, गुरदयाल, राजाराम टाक सहित अनेक कर्मचारी मौजूद थे।