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अनियमितताओं के चलते आखिरकार पशु मेले पर लगा प्रतिबंध
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
Updated Sat, 07 May 2016 12:20 AM IST
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अमर उजाला में छपी खबरों पर संज्ञान लेते हुए आखिरकार उपायुक्त एनके सोलंकी ने प्रत्येक रविवार लगने वाले पशु मेले को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी किए हैं। इतना ही नहीं, जिन बिंदुओं को अमर उजाला ने 2 मई के अंक में उठाए थे, शुक्रवार को उन्हीं बिंदुओं को आधार बनाते हुए डीसी ने पशु मेले के खिलाफ ये कार्रवाई की है।
डीसी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि गर्मी के मौसम के कारण पशुओं के लिए छाया तथा पानी का उचित प्रबंध नहीं होना और बार-बार मेले में पाई जाने वाली अनियमितताओं के दृष्टिगत प्रत्येक रविवार को लगने वाला मेला आगामी आदेशों तक तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। इस मेले में अनियमितताएं पाई जाने का जिक्र खुद खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी अनुभव मेहता ने डीसी को अपनी रिपोर्ट में भी किया था लेकिन उनकी रिपोर्ट को डीसी दफ्तर के अधिकारियों ने लगभग एक माह तक दबाए रखा। बीडीपीओ की रिपोर्ट को दबाए रखने के मामले का खुलासा भी अमर उजाला ने किया था।
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद डीसी ने इस मुद्दे पर अधिकारियों की बैठक बुलाकर पशु मेले में नियमों का पालन कराने के निर्देश दिए थे लेकिन उसके बाद आए रविवार को फिर से पशु मेले में अनियमितताओं और अवैध वसूली की गई जिसकी विस्तृत खबर 'अमर उजाला ने 2 मई के अंक में प्रकाशित की थी। इस खबर पर संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को डीसी ने आखिरकार इस मेले को बंद करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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ये होगा फायदा
1. पशुओं के साथ क्रूरता नहीं होगी।
2. अवैध वसूली का कोई कारण ही नहीं बचेगा।
3. लावारिस पशुओं की समस्या में कमी आने की संभावना।
ये होगा नुकसान
1. पशुपालकों को अब अपने पशुओं का व्यापार करने के लिए दूर जाना पड़ेगा।
2. पशु मेले के बंद होने के चलते सैकड़ों व्यापारियों को परेशानी।
3. पशु मेले के सहारे दुकानदारी चलाने वाले दुकानदारों एवं रेहड़ी चालकों को नुकसान।
पीएफए का भी महत्वपूर्ण रोल
पशु मेले में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ पीपुल्स फॉर एनिमल संस्था एवं इसके जिलाध्यक्ष विनोद कड़वासरा लंबे समय से संघर्षरत थे। उन्होंने इसके खिलाफ जिला प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार तक आवाज उठाई थी। साथ ही उन्होंने पशु मेले में व्याप्त भ्रष्टाचार के सबूत भी अधिकारियों को दिए। पशु मेले को बंद करने के आदेशों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं चाहा कि किसी दुकानदार या गरीब के पेट पर लात लगे लेकिन पशुओं के साथ क्रूरता किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
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डीसी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि गर्मी के मौसम के कारण पशुओं के लिए छाया तथा पानी का उचित प्रबंध नहीं होना और बार-बार मेले में पाई जाने वाली अनियमितताओं के दृष्टिगत प्रत्येक रविवार को लगने वाला मेला आगामी आदेशों तक तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। इस मेले में अनियमितताएं पाई जाने का जिक्र खुद खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी अनुभव मेहता ने डीसी को अपनी रिपोर्ट में भी किया था लेकिन उनकी रिपोर्ट को डीसी दफ्तर के अधिकारियों ने लगभग एक माह तक दबाए रखा। बीडीपीओ की रिपोर्ट को दबाए रखने के मामले का खुलासा भी अमर उजाला ने किया था।
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अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद डीसी ने इस मुद्दे पर अधिकारियों की बैठक बुलाकर पशु मेले में नियमों का पालन कराने के निर्देश दिए थे लेकिन उसके बाद आए रविवार को फिर से पशु मेले में अनियमितताओं और अवैध वसूली की गई जिसकी विस्तृत खबर 'अमर उजाला ने 2 मई के अंक में प्रकाशित की थी। इस खबर पर संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को डीसी ने आखिरकार इस मेले को बंद करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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ये होगा फायदा
1. पशुओं के साथ क्रूरता नहीं होगी।
2. अवैध वसूली का कोई कारण ही नहीं बचेगा।
3. लावारिस पशुओं की समस्या में कमी आने की संभावना।
ये होगा नुकसान
1. पशुपालकों को अब अपने पशुओं का व्यापार करने के लिए दूर जाना पड़ेगा।
2. पशु मेले के बंद होने के चलते सैकड़ों व्यापारियों को परेशानी।
3. पशु मेले के सहारे दुकानदारी चलाने वाले दुकानदारों एवं रेहड़ी चालकों को नुकसान।
पीएफए का भी महत्वपूर्ण रोल
पशु मेले में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ पीपुल्स फॉर एनिमल संस्था एवं इसके जिलाध्यक्ष विनोद कड़वासरा लंबे समय से संघर्षरत थे। उन्होंने इसके खिलाफ जिला प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार तक आवाज उठाई थी। साथ ही उन्होंने पशु मेले में व्याप्त भ्रष्टाचार के सबूत भी अधिकारियों को दिए। पशु मेले को बंद करने के आदेशों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं चाहा कि किसी दुकानदार या गरीब के पेट पर लात लगे लेकिन पशुओं के साथ क्रूरता किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती।