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Fatehabad News: केस दर्ज होने के पांच महीने बाद भी 20 सीढ़ियां उतरकर दस्तावेज नहीं ले पाए जांच अधिकारी
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फतेहाबाद। जिनको दोषियों को सजा दिलाने का जिम्मा मिला है, उन्हीं के दरवाजे पर न्याय की आस दम तोड़ती नजर आ रही है। हालात और ज्यादा चिंताजनक तब हो रहे हैं, जब पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ही बनी ब्रांच के अधिकारी जांच को लटकाते नजर आते हैं। एसडीएम कार्यालय और एसपी कार्यालय के बीच महज 20 सीढ़ियों की दूरी है, लेकिन 22 वाहनों के पंजीकरण में फर्जीवाड़े की जांच कर रही इकोनॉमिक सेल अभी तक पूरे दस्तावेज नहीं जुटा पाई है।
दरअसल, 20 जनवरी 2020 को सीएम विंडो पर हिसार की संस्था जवाब दो-हिसाब दो एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सरदाना ने शिकायत लगाई थी। आरोप था कि साल 2012 में पारिवारिक विवाद के कारण हिसार की एजेंसी बिमला ऑटो मोबाइल को प्रशासन ने सील कर दिया था। साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए थे कि 31 मार्च 2017 के बाद बीएस-टू व बीएस-थ्री वाहनों को बेचा नहीं जा सकेगा। आरोप है कि पांच साल पुराने वाहनों को ठिकाने लगाने के इरादे से एजेंसी मालिक व छह अन्य लोगों ने मिलकर इन सभी वाहनों को बीएस-4 बनाकर बेच दिया और इन सभी का पंजीकरण फतेहाबाद एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों से साठगांठ करके करवा लिया। इस मामले में 7 अगस्त 2022 को 22 वाहनों के पंजीकरण में फर्जीवाड़े के आरोप में शहर थाने में केस दर्ज हुआ। इसके तीन बाद मामला इकोनॉमिक सेल को सौंप दिया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप, अब फोन ही नहीं उठा रहे जांच अधिकारी
शिकायतकर्ता राजीव सरदाना का आरोप है कि इकोनॉमिक सेल के जांच अधिकारी पहले तो एसडीएम कार्यालय से दस्तावेज लेने, कर्मचारियों के बयान लेने के नाम पर मामले को लटकाते रहे। अब केस स्टेटस पूछने के लिए फोन करते हैं, तो कॉल ही रिसीव नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि जान-बूझकर मामले को लंबा खींचा जा रहा है जबकि इकोनॉमिक सेल और एसडीएम कार्यालय एक ही भवन में बने हुए हैं। अब उन्होंने इकोनॉमिक सेल के जांच अधिकारी की शिकायत एसपी आस्था मोदी से की है।
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आरसी रद्द होने के बाद भी धड़ल्ले से चल रहे वाहन
आरोप था कि एजेंसी मालिक व कर्मचारियों ने मिलीभगत से 30 वाहनों को पंजीकृत करवाया था। इनमें 21 स्कूटर, छह 20 सीटर क्रूजर गाड़ी और चार बसें शामिल थीं। इन सभी वाहनों का 31 जनवरी 2019 और 23 फरवरी 2019 को पांच आदमियों के नाम पंजीकरण करवाया गया। उसके बाद इन वाहनों को आगे बेच दिया गया है। इनमें से छह क्रूजर भिवानी के राकेश के नाम रजिस्टर्ड है। सीएम विंडो पर शिकायत के बाद तत्कालीन एसडीएम संजय बिश्नोई ने फरवरी 2020 में इन वाहनों की आरसी रद्द कर दी थी। मगर अभी भी उक्त वाहन धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं। न शहर थाना पुलिस और न ही इकोनॉमिक सेल ने इन वाहनों को जब्त किया है।
सीएम विंडो के मुख्यालय को भी समय पर नहीं दे रहे रिपोर्ट
डीसी द्वारा बनाई जांच कमेटी ने 18 मार्च 2021 को रिपोर्ट दी, जिसमें एसडीएम ने लिखा कि 22 वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है। एसडीएम कार्यालय में लिपिक व ऑपरेटर को कोताही बरतने के लिए उपायुक्त को पत्र लिखा गया है। मगर अब तक कोताही पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट सीएम विंडो मुख्यालय नहीं भेजी गई है।
इस मामले में मेरे आने के बाद ही एफआईआर दर्ज हुई थी। हमने केस को इकोनॉमिक सेल को ट्रांसफर किया था। जांच सही दिशा में चल रही है। बाकी अगर आरसी रद्द होने के बाद भी वाहन चल रहे हैं, तो इसका पता करवाते हैं।
-आस्था मोदी, एसपी, फतेहाबाद
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दरअसल, 20 जनवरी 2020 को सीएम विंडो पर हिसार की संस्था जवाब दो-हिसाब दो एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सरदाना ने शिकायत लगाई थी। आरोप था कि साल 2012 में पारिवारिक विवाद के कारण हिसार की एजेंसी बिमला ऑटो मोबाइल को प्रशासन ने सील कर दिया था। साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए थे कि 31 मार्च 2017 के बाद बीएस-टू व बीएस-थ्री वाहनों को बेचा नहीं जा सकेगा। आरोप है कि पांच साल पुराने वाहनों को ठिकाने लगाने के इरादे से एजेंसी मालिक व छह अन्य लोगों ने मिलकर इन सभी वाहनों को बीएस-4 बनाकर बेच दिया और इन सभी का पंजीकरण फतेहाबाद एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों से साठगांठ करके करवा लिया। इस मामले में 7 अगस्त 2022 को 22 वाहनों के पंजीकरण में फर्जीवाड़े के आरोप में शहर थाने में केस दर्ज हुआ। इसके तीन बाद मामला इकोनॉमिक सेल को सौंप दिया गया।
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शिकायतकर्ता का आरोप, अब फोन ही नहीं उठा रहे जांच अधिकारी
शिकायतकर्ता राजीव सरदाना का आरोप है कि इकोनॉमिक सेल के जांच अधिकारी पहले तो एसडीएम कार्यालय से दस्तावेज लेने, कर्मचारियों के बयान लेने के नाम पर मामले को लटकाते रहे। अब केस स्टेटस पूछने के लिए फोन करते हैं, तो कॉल ही रिसीव नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि जान-बूझकर मामले को लंबा खींचा जा रहा है जबकि इकोनॉमिक सेल और एसडीएम कार्यालय एक ही भवन में बने हुए हैं। अब उन्होंने इकोनॉमिक सेल के जांच अधिकारी की शिकायत एसपी आस्था मोदी से की है।
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आरसी रद्द होने के बाद भी धड़ल्ले से चल रहे वाहन
आरोप था कि एजेंसी मालिक व कर्मचारियों ने मिलीभगत से 30 वाहनों को पंजीकृत करवाया था। इनमें 21 स्कूटर, छह 20 सीटर क्रूजर गाड़ी और चार बसें शामिल थीं। इन सभी वाहनों का 31 जनवरी 2019 और 23 फरवरी 2019 को पांच आदमियों के नाम पंजीकरण करवाया गया। उसके बाद इन वाहनों को आगे बेच दिया गया है। इनमें से छह क्रूजर भिवानी के राकेश के नाम रजिस्टर्ड है। सीएम विंडो पर शिकायत के बाद तत्कालीन एसडीएम संजय बिश्नोई ने फरवरी 2020 में इन वाहनों की आरसी रद्द कर दी थी। मगर अभी भी उक्त वाहन धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं। न शहर थाना पुलिस और न ही इकोनॉमिक सेल ने इन वाहनों को जब्त किया है।
सीएम विंडो के मुख्यालय को भी समय पर नहीं दे रहे रिपोर्ट
डीसी द्वारा बनाई जांच कमेटी ने 18 मार्च 2021 को रिपोर्ट दी, जिसमें एसडीएम ने लिखा कि 22 वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है। एसडीएम कार्यालय में लिपिक व ऑपरेटर को कोताही बरतने के लिए उपायुक्त को पत्र लिखा गया है। मगर अब तक कोताही पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट सीएम विंडो मुख्यालय नहीं भेजी गई है।
इस मामले में मेरे आने के बाद ही एफआईआर दर्ज हुई थी। हमने केस को इकोनॉमिक सेल को ट्रांसफर किया था। जांच सही दिशा में चल रही है। बाकी अगर आरसी रद्द होने के बाद भी वाहन चल रहे हैं, तो इसका पता करवाते हैं।
-आस्था मोदी, एसपी, फतेहाबाद