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22 तो दूर, 18 फीसदी नमी वाला भी नहीं खरीदा गया धान
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Fri, 07 Oct 2016 12:13 AM IST
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फतेहाबाद की अनाजमंडी में अटी पड़ी धान की ढेरियां।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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धान की खरीद को लेकर परिस्थितियां और विकट होती जा रही हैं। सरकार द्वारा 22 फीसदी नमी तक धान खरीदने की घोषणा के बावजूद अधिकारी 17 फीसदी से अधिक नमी वाला धान खरीदने को तैयार नहीं है। वीरवार को फतेहाबाद अनाज मंडी में इसी बात पर लगातार तीसरे दिन भी खरीद प्रभावित रही। किसानों व अधिकारियों की बहस के बाद सांय तीन बजे जाकर खरीद शुरू हो पाई। इससे पूर्व अधिकारी इस बात पर अड़े थे कि अभी तक उनके पास 22 फीसदी नमी वाले धान की खरीद को लेकर कोई अधिकृत पत्र नहीं आया है। लेकिन किसान और व्यापारी इस बात को मानने को तैयार नहीं थे। इसके चलते वीरवार दोपहर 2 बजे मंडी की 102 नंबर दुकान के आगे किसानों और व्यापारियों की भीड़ एकत्रित हो गई।
किसानों ने जाम लगाने की चेतावनी दी तो जैसे-तैसे खरीद एजेंसी डीएफएससी ने धान की खरीद शुरू कर दी। धान की खरीद तीसरे दिन भी पूरी तरह से नहीं हो सकी। खरीद एजेंसियों से एग्रीमेंट नहीं होने तथा नमी को लेकर चल रहे विवाद का पेंच अभी तक नहीं सुलझा। एक दिन पूर्व कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने 22 फीसदी नमी वाले धान की खरीद कटौती के साथ खरीदने की घोषणा की थी। इसी को लेकर किसान धान की खरीद हर हालत में करने को लेकर अड़ गए। सुबह खरीद एजेंसी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी मंडी पहुंचे तो 20 से 25 फीसदी नमी वाला धान आया हुआ था। खरीद एजेंसी के अधिकारियों की टीम नमी वाले धान को रिजेक्ट कर आगे बढ़ी तो किसानों ने उन्हें घेर लिया।
इस दौरान व्यापार मंडल के प्रधान प्रेमचंद्र मित्तल, उपाध्यक्ष रवि मेहता, सुभाष ललित, विजय मोंगा व विजय कक्कड़ पहुंच गए। व्यापार मंडल ने बीचबचाव करते अधिकारियों से कहा कि वे 18-19 फीसदी नमी वाला धान खरीद लें लेकिन अधिकारियों ने ये कहते खरीद से इंकार कर दिया कि उनके पास अभी तक कोई सरकारी लैटर नहीं आया है। अधिकारियों का ये भी कहना था कि नमी वाले धान की खरीद से मिलर्स खरीदने को तैयार नहीं हैं तो वे कैसे खरीदें। इस पर नाराज किसान मंडी की दुकान नंबर 102 पर साधुराम-प्रेमचंद के बाहर एकत्रित हो गए और जाम लगाने की चेतावनी दी। मंडी के प्रधान प्रेमचंद ने उन्हें समझा-बुझाकर ठंडा किया और वरिष्ठ अधिकारी अनुराग रस्तोगी से फोन पर बातचीत की। प्रेमचंद मित्तल ने कहा कि अनुराग रस्तोगी ने बताया कि जब तक सरकारी पत्र नहीं आता, तब तक एजेंसी इससे ज्यादा नमी वाले धान की खरीद के लिए विवश नहीं है। शुक्रवार तक पत्र आते ही धान की खरीद शुरु कर दी जाएगी।
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तीसरे दिन भी धान की खरीस्त्रत्त्द सुचारू ना होने से मंडी धान से अट गई है। व्यापारियों में इस बात का रोष है कि सरकार की कथनी और करनी में फर्क है। व्यापार रामकुमार, हेमराज ने कहा कि एक दो दिन में धान की अन्य किस्में भी मंडी में आ जाएंगे तब धान की लोडिंग-अनलोडिंग में भी काफी दिक्कत आ जाएगी। ऐसे में मंडी में आना-जाना भी मुश्किल हो जाएगा। गांव माजरा के किसान निशान सिंह का कहना है कि वे तीन दिन से मंडी में धान लेकर बैठा है, अभी तक उसकी खरीद नहीं हुई।
सरकार ने ये तो घोषणा कर दी है कि 15.10 रूपए एक प्रतिशत नमी का काट कर धान खरीदी जाएगी। लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि धान की बिलिंग कैसे होगी। इस राशि को एजेंसी लेगी या मिलर, किसान के खाते से व्यापारी काटेगा या कोई और, ये भी अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि धान की खरीद से संबंधित सरकार की सभी शर्तें स्पष्ट होनी चाहिए ताकि किसान और व्यापारी भ्रमित ना हों। -प्रेमचंद्र मित्तल, प्रधान, व्यापार मंडल
किसानों ने जाम लगाने की चेतावनी दी तो जैसे-तैसे खरीद एजेंसी डीएफएससी ने धान की खरीद शुरू कर दी। धान की खरीद तीसरे दिन भी पूरी तरह से नहीं हो सकी। खरीद एजेंसियों से एग्रीमेंट नहीं होने तथा नमी को लेकर चल रहे विवाद का पेंच अभी तक नहीं सुलझा। एक दिन पूर्व कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने 22 फीसदी नमी वाले धान की खरीद कटौती के साथ खरीदने की घोषणा की थी। इसी को लेकर किसान धान की खरीद हर हालत में करने को लेकर अड़ गए। सुबह खरीद एजेंसी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी मंडी पहुंचे तो 20 से 25 फीसदी नमी वाला धान आया हुआ था। खरीद एजेंसी के अधिकारियों की टीम नमी वाले धान को रिजेक्ट कर आगे बढ़ी तो किसानों ने उन्हें घेर लिया।
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इस दौरान व्यापार मंडल के प्रधान प्रेमचंद्र मित्तल, उपाध्यक्ष रवि मेहता, सुभाष ललित, विजय मोंगा व विजय कक्कड़ पहुंच गए। व्यापार मंडल ने बीचबचाव करते अधिकारियों से कहा कि वे 18-19 फीसदी नमी वाला धान खरीद लें लेकिन अधिकारियों ने ये कहते खरीद से इंकार कर दिया कि उनके पास अभी तक कोई सरकारी लैटर नहीं आया है। अधिकारियों का ये भी कहना था कि नमी वाले धान की खरीद से मिलर्स खरीदने को तैयार नहीं हैं तो वे कैसे खरीदें। इस पर नाराज किसान मंडी की दुकान नंबर 102 पर साधुराम-प्रेमचंद के बाहर एकत्रित हो गए और जाम लगाने की चेतावनी दी। मंडी के प्रधान प्रेमचंद ने उन्हें समझा-बुझाकर ठंडा किया और वरिष्ठ अधिकारी अनुराग रस्तोगी से फोन पर बातचीत की। प्रेमचंद मित्तल ने कहा कि अनुराग रस्तोगी ने बताया कि जब तक सरकारी पत्र नहीं आता, तब तक एजेंसी इससे ज्यादा नमी वाले धान की खरीद के लिए विवश नहीं है। शुक्रवार तक पत्र आते ही धान की खरीद शुरु कर दी जाएगी।
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तीसरे दिन भी धान की खरीस्त्रत्त्द सुचारू ना होने से मंडी धान से अट गई है। व्यापारियों में इस बात का रोष है कि सरकार की कथनी और करनी में फर्क है। व्यापार रामकुमार, हेमराज ने कहा कि एक दो दिन में धान की अन्य किस्में भी मंडी में आ जाएंगे तब धान की लोडिंग-अनलोडिंग में भी काफी दिक्कत आ जाएगी। ऐसे में मंडी में आना-जाना भी मुश्किल हो जाएगा। गांव माजरा के किसान निशान सिंह का कहना है कि वे तीन दिन से मंडी में धान लेकर बैठा है, अभी तक उसकी खरीद नहीं हुई।
सरकार ने ये तो घोषणा कर दी है कि 15.10 रूपए एक प्रतिशत नमी का काट कर धान खरीदी जाएगी। लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि धान की बिलिंग कैसे होगी। इस राशि को एजेंसी लेगी या मिलर, किसान के खाते से व्यापारी काटेगा या कोई और, ये भी अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि धान की खरीद से संबंधित सरकार की सभी शर्तें स्पष्ट होनी चाहिए ताकि किसान और व्यापारी भ्रमित ना हों। -प्रेमचंद्र मित्तल, प्रधान, व्यापार मंडल