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अब निजी अस्पतालों में भी बनेगा नवजात का आधार

Sun, 20 Nov 2016 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद Updated Sun, 20 Nov 2016 12:36 AM IST
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अब निजी मैटरनिटी अस्पतालों में पैदा होने वाले बच्चों का आधार कार्ड अभिभावकों को अस्पताल परिसर में ही तुरंत बनवाना होगा। पहले इस काम के लिए रेडक्रॉस से एक व्यक्ति को भेजा जाता था या निजी अस्पताल संचालक बच्चे के माता-पिता को नागरिक अस्पताल भिजवाकर बच्चे का आधार कार्ड बनाने को कहते थे, लेकिन अब से ऐसा नहीं होगा। इस बाबत औपचारिक लिखित आदेश अगले सप्ताह तक आने की उम्मीद है। सीएमओ डॉ. अशोक चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।

50 प्रतिशत से ज्यादा डिलीवरी निजी अस्पतालों में
सरकार के आदेश के बाद प्रत्येक नागरिक के लिए आधार कार्ड बनवाना जरूरी है। ऐसे में मैटरनिटी अस्पतालों में नवजात के जन्म के साथ ही आधार कार्ड बनाने के भी आदेश जारी कर दिए गए ताकि बच्चे के पैदा होते ही सरकारी आंकड़ों में उसका नाम दर्ज हो जाए। चूंकि जिले में आधे से ज्यादा डिलीवरी निजी अस्पतालों में होती है इसलिए सरकार ने अब निजी अस्पतालों को ही आदेश जारी करने का मन बनाया है कि जिन अस्पतालों में बच्चा जन्म लेगा उसी में उसका आधार कार्ड भी बनाया जाएगा।
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ये बताई गई हैं वजहें
1. आधार कार्ड बनवाने के लिए नवजात को बाहर ले जाया गया तो संक्रमण का खतरा होता है।
2. पैदा होते ही आधार कार्ड न बना तो घर जाकर आधार बनवाने में माता-पिता लापरवाही बरत सकते हैं।
3. जन्म प्रमाण पत्र में तिथि के लिए भी लाभदायक रहेगा।
4. निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी तय होने से सरकारी तंत्र पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा।
5. पैदा होते ही तुरंत आधार बना तो बच्चा बदलने जैसी घटनाओं पर भी रोक लगेगी।

कई अस्पताल मिलकर ले सकते हैं मशीन
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार निजी अस्पताल संचालकों के संभावित विरोध के चलते प्रदेश सरकार एक इलाके के कई अस्पतालों को इस बात की छूट दे सकती है कि एक ही इलाके के कुछेक मैटरनिटी होम संचालक मिलकर एक मशीन और कर्मचारी रख लें और जरूरत के अनुसार एक दूसरे के अस्पताल में मशीन और कर्मचारी भेजकर अस्पताल की जरूरत पूरी कर दें। इससे एक ही अस्पताल पर मशीन और कर्मचारी का सारा बोझ नहीं पड़ेगा।
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जिले में दो दर्जन से अधिक हैं मैटरनिटी अस्पताल
आंकड़ों की बात की जाए तो अकेले फतेहाबाद जिले में दो दर्जन से अधिक मैटरनिटी अस्पताल हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 28 से 30 बच्चे की डिलीवरी रोजाना होती है। इसमें सरकारी अस्पताल में होनी वाली डिलीवरी के आंकड़े शामिल नहीं हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों में होने वाली 30 डिलीवरी में से महज 10-12 नवजात बच्चों का ही आधार कार्ड बन पाता था। नए आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इससे 100 फीसदी नवजात बच्चों का आधार कार्ड बनाया जा सकेगा।


हाल ही में पंचकूला में स्वास्थ्य विभाग की एक अहम बैठक हुई, जिसमें प्रदेश के सभी सिविल सर्जन शमिल हुए। इस बैठक में नवजात बच्चों के आधार कार्ड की प्रतिशत संख्या में वृद्धि करने पर हुई चर्चा के दौरान ये तय किया गया कि निजी अस्पतालों में जन्में नवजात का आधार कार्ड वहीं बनवाया जाएगा। औपचारिक आदेश अगले सप्ताह तक आने की उम्मीद है। -डॉ. अशोक चौधरी, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।
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