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Fatehabad News: हरी खाद और दलहन की बिजाई करने वाले किसानों को मिलेगी प्रति एकड़ 1000 रुपये की प्रोत्साहन राशि

Mon, 23 Mar 2026 11:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 23 Mar 2026 11:14 PM IST
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Farmers sowing green manure and pulses will get an incentive of Rs 1000 per acre
हरी खाद तैयार करने के लिए उगाई ढैंचा की फसल। फाइल फोटो
फतेहाबाद। किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करने और मिट्टी की सेहत सुधारने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने नई योजना शुरू की है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत धान की रोपाई से पहले खेतों में हरी खाद (ढैंचा) या दलहनी फसलों की बिजाई करने वाले किसानों को 1000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
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इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसान 15 अप्रैल तक अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। इस योजना में ढैंचा के साथ-साथ समर मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर, सोयाबीन और ग्वार जैसी दलहनी फसलें शामिल हैं।
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किसान इन फसलों के बीज खुले बाजार से खरीदकर बिजाई कर सकते हैं। प्रोत्साहन राशि पाने के लिए किसानों को पोर्टल पर अपनी फसल की फोटो भी अपलोड करनी होगी। पंजीकरण के बाद 16 अप्रैल से 15 मई के बीच कृषि विभाग के अधिकारी खेतों में जाकर फसल का भौतिक सत्यापन करेंगे। इसके बाद पात्र किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे प्रोत्साहन राशि भेज दी जाएगी।
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मिट्टी की सेहत सुधारेगी हरी खाद किसानों को होगा लाभ
कृषि तकनीकी अधिकारी डॉ. राजपाल ने बताया कि धान की रोपाई से पहले ढैंचा या दलहनी फसलों को हरी खाद के रूप में उपयोग करना पर्यावरण के लिए लाभकारी है और आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है। प्रदेश सरकार की ओर से 1000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने की इस मुहिम को बल देगी। यह मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाती है जिससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है। इससे भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती है और मिट्टी भुरभुरी व उपजाऊ बनती है। खेत ढका रहने के कारण खरपतवार कम उगते हैं। यह रसायनों के दुष्प्रभावों को कम कर टिकाऊ खेती को बढ़ावा देती है।

:: किसानों से अपील है कि वे जैविक खाद को बढ़ावा दें। किसानों के पास गेहूं की कटाई और धान की रोपाई के बीच ढाई माह तक का समय होता है। इस दौरान किसान अपनी ढैंचा व ग्वार आदि की फसल लगाकर हरी खाद तैयार सकता है। इसके लिए किसान 16 अप्रैल से 15 मई तक पंजीकरण करवा सकते हैं।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
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