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एमएसपी से नीचे धान की खरीद होने पर भड़के किसान
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लघु सचिवालय पहुंचे किसानों से बातचीत करते एसडीएम राजेश कुमार।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। फतेहाबाद अनाज मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे धान की खरीद करने पर किसान भड़क उठे। आक्रोशित किसानों ने 10 दिन से परमल धान का सरकारी रेट नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए बोली बंद करवा दी। इसकी सूचना मार्केट कमेटी सचिव संजीव सचदेवा के पास पहुंची तो वह किसानों के बीच पहुंचे। किसानों ने उनको सारी समस्या बताई। मगर किसानों ने रतिया के शैलर्स से खरीद करवाने की मांग की।
सचिव ने कहा कि यह काम तो डीसी की कर सकते हैं। इसके बाद किसान आढ़तियों के साथ डीसी महावीर कौशिक से मिलने लघु सचिवालय पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात एसडीएम राजेश कुमार से हुई। बाद में एसडीएम खुद अनाज मंडी में जाकर धान की खरीद शुरू करवाकर आए। जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों से फसल लेकर आए किसान भगवानदास, इंद्रसिंह, हरनाम सिंह, जयगोपाल, बंसीलाल ने बताया कि परमल धान का एमएसपी 1960 रुपये हैं, लेकिन एजेंसी 1600 से 1700 रुपये में खरीद कर रही है। खरीद के बाद किसानों को जो बिल काटकर दिए जा रहे हैं, उनमें 1960 रुपये ही अंकित किए हुए हैं। किसानों का आरोप है कि बाकी पैसा कहां जा रहा है, इसका संतोषजनक जवाब मार्केट कमेटी के अधिकारी भी नहीं दे रहे हैं।
रतिया में मिल रहे पूरे भाव, वहां के शैलर्स को खरीदने नहीं दे रहे
गांव शहीदांवाली के किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि फतेहाबाद अनाज मंडी में परमल (पीआर) धान पिछले 10 दिनों से सरकारी रेट पर नहीं खरीदा जा रहा है। इस कारण किसान परेशान हो चुके हैं। यहां सिर्फ दो ही शैलर खरीद कर रहे हैं, इसलिए वह धान के मनमर्जी के रेट लगा रहे हैं। कभी 1600 तो कभी 1700 रुपये के रेट लगाते हैं। मगर रतिया में यही धान सरकारी रेट पर बिक रहा है, हाथोंहाथ उठान भी हो रहा है। रतिया के शैलर्स को यहां खरीद नहीं करने दी जा रही है। मार्केट कमेटी सचिव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि डीसी ही रतिया के शैलर्स को खरीद की अनुमति दे सकते हैं।
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चार दिन से मंडी में धान लेकर बैठे हैं, कोई बोली के लिए नहीं आया
गांव धांगड़ के किसान कृष्ण मांझू ने बताया कि रविवार को 120 क्विंटल पीआर-114 धान की फसल लेकर मंडी में आए थे। अभी तक उनके पास बोली के लिए कोई नहीं आया है। इस धान का एमएसपी 1960 रुपये हैं, लेकिन किसानों को भाव सिर्फ 1700 से 1750 रुपये ही मिल रहा है। खरीद करने वालों से बात की जाती है, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं। चार दिन से परेशानी झेल रहे हैं।
गांव बीघड़ निवासी किसान इंद्र सिंह ने बताया कि पांच-छह दिनों से परमल धान का सरकारी रेट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। मगर खरीद एजेंसी के अधिकारी पूरा रेट नहीं दे रहे। किसी किसान की 1600 तो किसी की 1700 रुपये में खरीद कर रहे हैं। ज्यादा नमी हो तो भी खरीद से इंकार कर दिया जाता है।
कोट
मेरे पास किसान आए थे। शैलर्स कम दाम में खरीदने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। मैंने मौके पर जाकर खरीद शुरू करवा दी थी और एजेंसी को पूरा सरकारी रेट देने के निर्देश दिए गए हैं।
राजेश कुमार, एसडीएम, फतेहाबाद
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सचिव ने कहा कि यह काम तो डीसी की कर सकते हैं। इसके बाद किसान आढ़तियों के साथ डीसी महावीर कौशिक से मिलने लघु सचिवालय पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात एसडीएम राजेश कुमार से हुई। बाद में एसडीएम खुद अनाज मंडी में जाकर धान की खरीद शुरू करवाकर आए। जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों से फसल लेकर आए किसान भगवानदास, इंद्रसिंह, हरनाम सिंह, जयगोपाल, बंसीलाल ने बताया कि परमल धान का एमएसपी 1960 रुपये हैं, लेकिन एजेंसी 1600 से 1700 रुपये में खरीद कर रही है। खरीद के बाद किसानों को जो बिल काटकर दिए जा रहे हैं, उनमें 1960 रुपये ही अंकित किए हुए हैं। किसानों का आरोप है कि बाकी पैसा कहां जा रहा है, इसका संतोषजनक जवाब मार्केट कमेटी के अधिकारी भी नहीं दे रहे हैं।
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रतिया में मिल रहे पूरे भाव, वहां के शैलर्स को खरीदने नहीं दे रहे
गांव शहीदांवाली के किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि फतेहाबाद अनाज मंडी में परमल (पीआर) धान पिछले 10 दिनों से सरकारी रेट पर नहीं खरीदा जा रहा है। इस कारण किसान परेशान हो चुके हैं। यहां सिर्फ दो ही शैलर खरीद कर रहे हैं, इसलिए वह धान के मनमर्जी के रेट लगा रहे हैं। कभी 1600 तो कभी 1700 रुपये के रेट लगाते हैं। मगर रतिया में यही धान सरकारी रेट पर बिक रहा है, हाथोंहाथ उठान भी हो रहा है। रतिया के शैलर्स को यहां खरीद नहीं करने दी जा रही है। मार्केट कमेटी सचिव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि डीसी ही रतिया के शैलर्स को खरीद की अनुमति दे सकते हैं।
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चार दिन से मंडी में धान लेकर बैठे हैं, कोई बोली के लिए नहीं आया
गांव धांगड़ के किसान कृष्ण मांझू ने बताया कि रविवार को 120 क्विंटल पीआर-114 धान की फसल लेकर मंडी में आए थे। अभी तक उनके पास बोली के लिए कोई नहीं आया है। इस धान का एमएसपी 1960 रुपये हैं, लेकिन किसानों को भाव सिर्फ 1700 से 1750 रुपये ही मिल रहा है। खरीद करने वालों से बात की जाती है, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं। चार दिन से परेशानी झेल रहे हैं।
गांव बीघड़ निवासी किसान इंद्र सिंह ने बताया कि पांच-छह दिनों से परमल धान का सरकारी रेट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। मगर खरीद एजेंसी के अधिकारी पूरा रेट नहीं दे रहे। किसी किसान की 1600 तो किसी की 1700 रुपये में खरीद कर रहे हैं। ज्यादा नमी हो तो भी खरीद से इंकार कर दिया जाता है।
कोट
मेरे पास किसान आए थे। शैलर्स कम दाम में खरीदने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। मैंने मौके पर जाकर खरीद शुरू करवा दी थी और एजेंसी को पूरा सरकारी रेट देने के निर्देश दिए गए हैं।
राजेश कुमार, एसडीएम, फतेहाबाद