{"_id":"6144d1de8ebc3ee52b4185cd","slug":"entire-district-with-the-help-of-only-61-roadways-buses-fatehabad-news-hsr6119892108","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिर्फ 61 रोडवेज बसों के सहारे पूरा जिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिर्फ 61 रोडवेज बसों के सहारे पूरा जिला
विज्ञापन
बीमे के अभाव में बस स्टैंड की कार्यशाला में खड़ी बसें।
- फोटो : Fatehabad
रोडवेज अधिकारियों की लापरवाही यात्रियों से लेकर परीक्षार्थियों तक पर भारी पड़ी है। सिर्फ बीमे के अभाव में 69 रोडवेज बसों को रूट पर नहीं भेजा गया है। इसी कारण हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा शनिवार व रविवार को करवाई जा रही महिला कांस्टेबल की परीक्षा देने वाली परीक्षार्थियों के लिए भी स्पेशल बसों का प्रबंध नहीं हो सका है। जिले में रूट पर चल रही 130 बसों में से 69 कार्यशाला में खड़ी होने से पिछले चार दिनों में रोडवेज प्रशासन को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हो चुका है। वहीं, सिर्फ 61 बसों के सहारे पूरे जिले की परिवहन व्यवस्था रह गई है।
हैरानी की बात यह है कि ऐसी परिस्थितियां होने के बावजूद रोडवेज मुख्यालय की ओर से अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। दरअसल, रोडवेज महाप्रबंधक कृष्ण कुमार का एक सप्ताह पहले तबादला हो गया था। उनके स्थान पर नया जीएम नहीं लगाया गया है। इस कारण अन्य किसी अधिकारी के पास डीडीओ पावर नहीं है। इसी बीच 13 सितंबर को 17 बसों का बीमा खत्म हुआ। इसके बाद चार दिनों में फतेहाबाद व टोहाना डिपो की 69 बसें ऐसी हैं, जिनका बीमा खत्म हो चुका है। बीमा नहीं होने के कारण चालकों ने भी रोडवेज बसों को रूट पर ले जाने से मना कर दिया है क्योंकि हादसा होने की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी चालक पर डाल दी जाती है।
चार दिन में हो चुका 30 लाख से ज्यादा का नुकसान
कर्मचारियों के अनुसार रोडवेज की एक बस रोजाना औसतन 250 से 300 किलोमीटर चलती है। इनमें कई रूट ऐसे भी हैं, जिन पर 400 से 500 किलोमीटर तक भी बस जाती है। सभी बसों के परिचालन से रोजाना डिपो प्रशासन को 10 से 12 लाख रुपये की आमदनी होती है। मगर आधी से अधिक बसें रूट पर नहीं दौड़ने से मात्र चार दिनों में ही रोडवेज प्रशासन को 30 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
विज्ञापन
इतने बड़े नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार
रोडवेज कर्मचारी यूनियनों ने अब अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इतने बड़े स्तर पर सरकारी राजस्व के नुकसान का जिम्मेदार कौन है, इसको लेकर यूनियनों की तरफ से सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि बीमा व अन्य औपचारिकताओं को पूरा करवाने का जिम्मा अकाउंट विभाग का है। ऐसे में बीमा खत्म होने की जानकारी अकाउंट विभाग के अधिकारियों को थी, तो उन्हें पहले से ही तैयारियां पूरी रखनी चाहिए थी।
ऐसे बढ़ता गया बंद होने वाली बसों का आंकड़ा
13 सितंबर को 17 बसें बंद हुई।
14 सितंबर को 36 बसें बंद हुई।
16 सितंबर को 16 बसें बंद हुई।
16 सितंबर को ही ट्रेनिंग स्कूल की पांच बसें भी बंद हो गई।
कोट
जिम्मेदार अधिकारियों पर हो सख्त कार्रवाई
चालक-परिचालकों पर तुरंत जुर्माना करने वाले अधिकारी चार दिनों में लाखों रुपये का नुकसान कर चुके हैं। इस नुकसान के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सोमवार को डीसी को भी ज्ञापन सौंपेंगे।
-राजू बिश्नोई, जिला उपप्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन।
मुख्यालय को भेजी हुई है जानकारी
बीमा नहीं होने के कारण बसों का परिचालन नहीं हो रहा है। जीएम के तबादले और नए जीएम की नियुक्ति नहीं होने से ऐसी परिस्थितियां बनी हैं। जो बसें रूट पर हैं, वही यात्रियों व परीक्षार्थियों के लिए उपलब्ध रहेंगी।
-मनोज शर्मा, कार्यशाला प्रबंधक, फतेहाबाद डिपो।
विज्ञापन
हैरानी की बात यह है कि ऐसी परिस्थितियां होने के बावजूद रोडवेज मुख्यालय की ओर से अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। दरअसल, रोडवेज महाप्रबंधक कृष्ण कुमार का एक सप्ताह पहले तबादला हो गया था। उनके स्थान पर नया जीएम नहीं लगाया गया है। इस कारण अन्य किसी अधिकारी के पास डीडीओ पावर नहीं है। इसी बीच 13 सितंबर को 17 बसों का बीमा खत्म हुआ। इसके बाद चार दिनों में फतेहाबाद व टोहाना डिपो की 69 बसें ऐसी हैं, जिनका बीमा खत्म हो चुका है। बीमा नहीं होने के कारण चालकों ने भी रोडवेज बसों को रूट पर ले जाने से मना कर दिया है क्योंकि हादसा होने की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी चालक पर डाल दी जाती है।
विज्ञापन
चार दिन में हो चुका 30 लाख से ज्यादा का नुकसान
कर्मचारियों के अनुसार रोडवेज की एक बस रोजाना औसतन 250 से 300 किलोमीटर चलती है। इनमें कई रूट ऐसे भी हैं, जिन पर 400 से 500 किलोमीटर तक भी बस जाती है। सभी बसों के परिचालन से रोजाना डिपो प्रशासन को 10 से 12 लाख रुपये की आमदनी होती है। मगर आधी से अधिक बसें रूट पर नहीं दौड़ने से मात्र चार दिनों में ही रोडवेज प्रशासन को 30 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
विज्ञापन
इतने बड़े नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार
रोडवेज कर्मचारी यूनियनों ने अब अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इतने बड़े स्तर पर सरकारी राजस्व के नुकसान का जिम्मेदार कौन है, इसको लेकर यूनियनों की तरफ से सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि बीमा व अन्य औपचारिकताओं को पूरा करवाने का जिम्मा अकाउंट विभाग का है। ऐसे में बीमा खत्म होने की जानकारी अकाउंट विभाग के अधिकारियों को थी, तो उन्हें पहले से ही तैयारियां पूरी रखनी चाहिए थी।
ऐसे बढ़ता गया बंद होने वाली बसों का आंकड़ा
13 सितंबर को 17 बसें बंद हुई।
14 सितंबर को 36 बसें बंद हुई।
16 सितंबर को 16 बसें बंद हुई।
16 सितंबर को ही ट्रेनिंग स्कूल की पांच बसें भी बंद हो गई।
कोट
जिम्मेदार अधिकारियों पर हो सख्त कार्रवाई
चालक-परिचालकों पर तुरंत जुर्माना करने वाले अधिकारी चार दिनों में लाखों रुपये का नुकसान कर चुके हैं। इस नुकसान के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सोमवार को डीसी को भी ज्ञापन सौंपेंगे।
-राजू बिश्नोई, जिला उपप्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन।
मुख्यालय को भेजी हुई है जानकारी
बीमा नहीं होने के कारण बसों का परिचालन नहीं हो रहा है। जीएम के तबादले और नए जीएम की नियुक्ति नहीं होने से ऐसी परिस्थितियां बनी हैं। जो बसें रूट पर हैं, वही यात्रियों व परीक्षार्थियों के लिए उपलब्ध रहेंगी।
-मनोज शर्मा, कार्यशाला प्रबंधक, फतेहाबाद डिपो।

बस स्टैंड पर बसों के इंतजार में यात्री।- फोटो : Fatehabad