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मरीजों की काउंसिलिंग में खुलासा : दुकानों पर बिना डॉक्टर पर्ची के बिक रहीं दवाइयां, युवा बन रहे नशे के आदी
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मुकेश खुरानाफतेहाबाद। दुकानों पर बिना डॉक्टर पर्ची के मिल रही अवैध गोलियां युवाओं को नशेड़ी बना रही हैं और मौत का कारण भी बन रही है। युवा टैबलेट का घोल बनाकर उसे इंजेक्शन के जरिये ले रहे हैं। जो कि मौत का कारण बन रहीं हैं। नशा मुक्ति केंद्र में उपचार के लिए आने वाले मरीजों की काउंसिलिंग में ये सामने आ रहा है। टापेंडाडोल टैबलेट बिना डॉक्टर पर्ची के युवा लेकर नशेड़ी बन रहे है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये टैबलेट मरीज की डोज बढ़ाती है और इससे वह नशेड़ी हो जाता है। ओएसटी सेेंटर पर मरीज को खुद की निगरानी में दवाई देकर डोज को धीरे-धीरे कम करके नशा छुड़वाया जा सकता है, लेकिन हकीकत ये है कि स्वास्थ्य विभाग पांच साल बाद भी नशा मुक्ति केंद्र में एकमात्र ओएसटी सेंटर शुरू नहीं कर पाया है। वर्ष 2018 में ओएसटी सेंटर खोलने की अनुमति मिली थी लेकिन औपचारिकताओं में फाइल दबी रही और इस साल भर्ती प्रक्रिया पूरी करके काउंसलर और डाटा मैनेजर की नियुक्ति हुई। लेकिन अब डेढ़ माह बाद ही ओएसटी के काउंसलर ने इस्तीफा दे दिया है। अब काउंसलर की भर्ती के बाद ओएसटी पर दवाई की अनुमति मिल पाएगी। संवाद
केस नंबर एक
काउंसिलिंग में मरीज बोले, आसानी से मिल रही गोलियां
नशा मुक्ति केंद्र में उपचार लेने आए एक मरीज ने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि उसने दोस्त के कहने पर टापेंडाडोल की एक गोली शुरू की थी, इसके बाद उसकी आदत बन गई और अब रोजाना चार से पांच टैबलेट लेनी पड़ रही है। अगर टैबलेट नहीं लेता है तो शरीर में दर्द होता है और नींद नहीं आती है। बाजार में आसानी से ये गोलियां बिना डॉक्टर पर्ची के मिल रही है।
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केस नंबर दो
टैबलेट का घोल बनाकर लिया जा रहा नशा
नशा छोड़ने के लिए उपचार को लेकर आए एक मरीज ने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि टैबलेट का घोल बनाकर इंजेक्शन के जरिये नशा ले रहे हैं। इंजेक्शन के जरिए नशा जल्द असर करता है।
नशा मुक्ति केंद्र में 14 माह में आए ये मरीज
माह ओपीडी दाखिल हुए
अप्रैल 2022 200 52
मई 229 31
जून 255 38
जुलाई 332 40
अगस्त 301 49
सितंबर 325 34
अक्तूबर 190 19
नवंबर 158 16
दिसंबर 212 20
जनवरी 2023 282 21
फरवरी 237 24
मार्च 236 15
अप्रैल 180 12
मई 187 39
कोट
सरकार ज्यादा से ज्यादा ओएसटी सेंटर शुरू करे। इसके अलावा खंड स्तर पर भी ओएसटी सेंटर खोले जाएं। मरीज जो अवैध रूप से नशा लेते हैं उसे ओएसटी सेंटर के जरिए रोका जा सकता है। सरकार ज्यादा से ज्यादा एफडीए से मान्य उपचार को शुरू करके नशे और इससे होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
-डॉ. गिरीश, मनोरोग विशेषज्ञ एवं इंचार्ज नशा मुक्ति केंद्र
ओएसटी का इंचार्ज डॉ. गिरीश को बनाया गया है। काउंसलर अगर छोड़ गया है तो भर्ती की प्रक्रिया को जल्द पूरा कर लिया जाएगा ताकि ओएसटी को सुचारू रूप से शुरू किया जा सके।
-डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन
मामला संज्ञान में आया है कि नशे की गोलियां जो कि एनडीपीएस की श्रेणी में नहीं आती है और युवा नशे के लिए प्रयोग कर रहे है। मामले को लेकर सीएमओ और मनोरोग विशेषज्ञ के साथ बैठक की जाएगी कि इसे पर किस तरह से लगाम लगाई जा सकती है।
- जगदीश कुमार, डीएसपी मुख्यालय
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विशेषज्ञों का कहना है कि ये टैबलेट मरीज की डोज बढ़ाती है और इससे वह नशेड़ी हो जाता है। ओएसटी सेेंटर पर मरीज को खुद की निगरानी में दवाई देकर डोज को धीरे-धीरे कम करके नशा छुड़वाया जा सकता है, लेकिन हकीकत ये है कि स्वास्थ्य विभाग पांच साल बाद भी नशा मुक्ति केंद्र में एकमात्र ओएसटी सेंटर शुरू नहीं कर पाया है। वर्ष 2018 में ओएसटी सेंटर खोलने की अनुमति मिली थी लेकिन औपचारिकताओं में फाइल दबी रही और इस साल भर्ती प्रक्रिया पूरी करके काउंसलर और डाटा मैनेजर की नियुक्ति हुई। लेकिन अब डेढ़ माह बाद ही ओएसटी के काउंसलर ने इस्तीफा दे दिया है। अब काउंसलर की भर्ती के बाद ओएसटी पर दवाई की अनुमति मिल पाएगी। संवाद
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केस नंबर एक
काउंसिलिंग में मरीज बोले, आसानी से मिल रही गोलियां
नशा मुक्ति केंद्र में उपचार लेने आए एक मरीज ने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि उसने दोस्त के कहने पर टापेंडाडोल की एक गोली शुरू की थी, इसके बाद उसकी आदत बन गई और अब रोजाना चार से पांच टैबलेट लेनी पड़ रही है। अगर टैबलेट नहीं लेता है तो शरीर में दर्द होता है और नींद नहीं आती है। बाजार में आसानी से ये गोलियां बिना डॉक्टर पर्ची के मिल रही है।
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केस नंबर दो
टैबलेट का घोल बनाकर लिया जा रहा नशा
नशा छोड़ने के लिए उपचार को लेकर आए एक मरीज ने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि टैबलेट का घोल बनाकर इंजेक्शन के जरिये नशा ले रहे हैं। इंजेक्शन के जरिए नशा जल्द असर करता है।
नशा मुक्ति केंद्र में 14 माह में आए ये मरीज
माह ओपीडी दाखिल हुए
अप्रैल 2022 200 52
मई 229 31
जून 255 38
जुलाई 332 40
अगस्त 301 49
सितंबर 325 34
अक्तूबर 190 19
नवंबर 158 16
दिसंबर 212 20
जनवरी 2023 282 21
फरवरी 237 24
मार्च 236 15
अप्रैल 180 12
मई 187 39
कोट
सरकार ज्यादा से ज्यादा ओएसटी सेंटर शुरू करे। इसके अलावा खंड स्तर पर भी ओएसटी सेंटर खोले जाएं। मरीज जो अवैध रूप से नशा लेते हैं उसे ओएसटी सेंटर के जरिए रोका जा सकता है। सरकार ज्यादा से ज्यादा एफडीए से मान्य उपचार को शुरू करके नशे और इससे होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
-डॉ. गिरीश, मनोरोग विशेषज्ञ एवं इंचार्ज नशा मुक्ति केंद्र
ओएसटी का इंचार्ज डॉ. गिरीश को बनाया गया है। काउंसलर अगर छोड़ गया है तो भर्ती की प्रक्रिया को जल्द पूरा कर लिया जाएगा ताकि ओएसटी को सुचारू रूप से शुरू किया जा सके।
-डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन
मामला संज्ञान में आया है कि नशे की गोलियां जो कि एनडीपीएस की श्रेणी में नहीं आती है और युवा नशे के लिए प्रयोग कर रहे है। मामले को लेकर सीएमओ और मनोरोग विशेषज्ञ के साथ बैठक की जाएगी कि इसे पर किस तरह से लगाम लगाई जा सकती है।
- जगदीश कुमार, डीएसपी मुख्यालय