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Fatehabad News: देश की आजादी के आंदोलन में लाहौर जेल में 3 माह रहे धन्नाराम

Sun, 10 Aug 2025 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sun, 10 Aug 2025 11:06 PM IST
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Dhannaram spent 3 months in Lahore jail during the country's freedom movement
हनुमान सिंह, सुपुत्र स्वतंत्रता सेनानी धन्नाराम  ताम्रपत्र के साथ।
फतेहाबाद। जिले के गांव धांगड़ के 14 शूरवीर स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई से सीधे तौर पर जुड़े हैं। इनमें धन्नाराम भी शामिल रहे हैं। देश की स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान धन्नाराम ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था।
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धन्नाराम के बेटे हनुमान ने बताया कि उस समय उनके पिता को पुलिस ने हिसार से गिरफ्तार करके लाहौर जेल में करीब 3 महीने तक रखा था। देश की आजादी की लड़ाई में दिए गए योगदान को देखते हुए जिला प्रशासन ने गांव धांगड़ के गौरव पट्ट पर धन्नाराम का नाम अंकित किया है। स्वतंत्रता सेनानी धन्नाराम का जन्म साल 1920 में और निधन 1 जनवरी 2001 में हो चुका।
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बेटे हनुमान ने बताया कि 1942 में शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन में धन्नाराम महात्मा गांधी के आह्वान पर सक्रिय रूप से शामिल हुए थे। उस समय वे उनके निर्देशों पर युवाओं को देश की आजादी के आंदोलन से जोड़ते थे। ग्रामीण रणजीत सिंह, हनुमान सिंह, रमेश सेठी और हरिराम आदि ने बताया कि गांव धांगड़ स्वतंत्रता सेनानियों को गांव होने पर उनको गर्व महसूस है। उन सभी का नाम और तस्वीर फतेहाबाद के लघु सचिवालय में अंकित है। वहीं में गांव के कई युवा भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा कर रहे हैं।
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दो बार ताम्रपत्र से हुए थे सम्मानित

स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी को देखते हुए धन्नाराम को जीवनकाल दो बार ताम्रपत्र से सम्मानित किया गया था। पहली बार उनको आजादी के पच्चीस वर्ष पूरे होने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र प्रदान किया था। दूसरी हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। बेटे हनुमान ने बताया के उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी धन्नाराम के नाम से गांव में किसी सार्वजनिक भवन या स्थान का निर्माण किया जाना चाहिए। ताकि आने वाली पीढि़यों को भी उनके योगदान के बारे में स्मरण रहे।




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धन्नाराम के 4 बेटे-बेटियां

हनुमान ने बताया कि वे चार भाई-बहन हैं। सबसे बड़ी बहन तीजा देवी की 80 साल से ऊपर उम्र हो चुकी है। उसके बाद दूसरी बहन कृष्णा हैं। तीसरे नंबर पर स्वयं हनुमान और चौथे नंबर सबसे छोटा भाई लीलूराम हैं। अभी चारों भाई-बहन जीवित हैं।
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