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सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने में नाकाम विभाग, 9 माह में मात्र 151 चालान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 11:02 PM IST
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Department failed to stop smoking in public places, only 151 challans in 9 months
फतेहाबाद का नागरिक अस्पताल। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। धूम्रपान निषेध दिवस आज है। धूम्रपान जिसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। शरीर में होने वाली गंभीर बीमारियों का कारण धूम्रपान भी कहा जा सकता है। लेकिन बावजूद इसके धूम्रपान की लत को लोग छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर भी प्रशासन रोक नहीं लगा पा रहा है। दो से तीन दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ही एक चालान कर पा रहा है। इसके अलावा अन्य विभाग इस पर रोक लगाने में साथ नहीं दे पा रहे हैं।
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जिले में पिछले साल 9 माह में 151 चालान ही काटे गए हैं और इससे 11 हजार 900 रुपये जुर्माना वसूला गया है। चालान सिर्फ स्वास्थ्य विभाग द्वारा ही काटे गए है जबकि रोडवेज, शिक्षा विभाग, नगर निकाय समेत तमाम विभागों भी जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक स्थान पर बीड़ी-सिगरेट पीने वालों पर रोक लगा सकें। तंबाकू पर रोक लगाने के लिए नियम लागू है कि कोई भी स्कूल के 100 मीटर दायरे में धूम्रपान नहीं कर सकता है इसके अलावा तंबाकू भी नहीं बेचा जा सकता है। लेकिन जानकर हैरानी होगी कि जिले में मात्र 32 स्कूल ही तंबाकू फ्री हुए हैं। जिले के 32 स्कूल ही तंबाकू पर रोक लगाने के लिए नियमों को मान रहे हैं।
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ऐसे छोड़ सकते हैं धूम्रपान
फतेहाबाद के उप सिविल सर्जन मेजर डॉ. शरद तुली बताते हैं कि धूम्रपान छोड़ने के लिए उसके कारणों की पहले सूची बनाएं। लोगों को बताएं कि आप छोड़ रहे हैं। व्यस्त रहकर लालसाओं को दूर रखें। धूम्रपान करने की इच्छा को मात देने के लिए व्यायाम करें।
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धूम्रपान से बढ़ता है ह्दय रोगों का खतरा :
चिकित्सकों के मुताबिक धूम्रपान कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। निकोटीन, रक्त वाहिकाओं पर दबाव को बढ़ा देती है जिससे रक्त का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता है। अधिक धूम्रपान करने वालों में हाई ब्लड प्रेशर का भी खतरा अधिक होता है जिसे हृदय रोगों के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। धूम्रपान करने वालों में समय से पहले मृत्यु दर, धूम्रपान न करने वालों की तुलना में तीन गुना अधिक होती है। धूम्रपान मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर कई तरह के नकारात्मक असर डाल सकता है।

कोट
धूम्रपान निषेध को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे है। इसके अलावा विभाग की टीमें सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करने वालों के चालान भी काटती है। लोगों को भी इसके प्रति जागरूक होना जरूरी है। धूम्रपान किसी साइलेंट किलर से कम नहीं है। अधिकतर बीमारियों का कारण ही धूम्रपान है।
-मेजर डॉ. शरद तुली, उप सिविल सर्जन
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