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Fatehabad News: रतिया में 6.5 करोड़ के विकास कार्यों की जांच की मांग उठी
Tue, 27 Oct 2026 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 27 Oct 2026 11:27 PM IST
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रतिया नगर पालिका।
रतिया। नगर पालिका में करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत से करवाए गए और वर्तमान में चल रहे विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद पार्षदों ने जांच की मांग उठाई है। पार्षदों ने नगर पालिका सचिव को संयुक्त मांग पत्र सौंपकर मैसर्स शीशपाल ठेकेदार के सभी निर्माण कार्यों की 15 दिन के भीतर मॉनिटरिंग कराने की मांग की है।
वार्ड 11 के पार्षद विजय कुमार सहित वार्ड 6 और 16 के पार्षदों ने मंगलवार को यह मांग पत्र सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित ठेकेदार के माध्यम से करवाए गए निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। इनमें अवैध कॉलोनियों में नियमों की अनदेखी कर निर्माण करवाने और स्थानीय निकाय निदेशालय के निर्देशों का पालन नहीं करने जैसे आरोप शामिल हैं।
पार्षदों ने मांगपत्र में कहा कि सभी निर्माण कार्यों की तकनीकी और भौतिक जांच कराई जानी चाहिए। इससे कार्यों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सकेगी। उनके अनुसार शहर के लोग लगातार विकास कार्यों की गुणवत्ता, लागत और नियमों के पालन पर सवाल उठा रहे हैं। जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि वे विकास कार्यों की सही जानकारी हासिल कर जनता तक पहुंचाएं।
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15 दिन में मॉनिटरिंग नहीं हुई तो जिम्मेदारी तय करने की मांग
पार्षदों ने मांग पत्र में चेतावनी दी कि यदि पत्र प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग नहीं कराई गई तो इसकी जिम्मेदारी नगर पालिका सचिव और संबंधित विभागीय कर्मचारियों की होगी। नगर पालिका चेयरपर्सन प्रीति खन्ना ने भी मांगपत्र पर लिखित टिप्पणी दर्ज की है। उन्होंने जनहित और जनता की शिकायतों का हवाला देते हुए पार्षदों की मौजूदगी में विकास कार्यों की निष्पक्ष मॉनिटरिंग कराने की सिफारिश की है।
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वार्ड 11 के पार्षद विजय कुमार सहित वार्ड 6 और 16 के पार्षदों ने मंगलवार को यह मांग पत्र सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित ठेकेदार के माध्यम से करवाए गए निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। इनमें अवैध कॉलोनियों में नियमों की अनदेखी कर निर्माण करवाने और स्थानीय निकाय निदेशालय के निर्देशों का पालन नहीं करने जैसे आरोप शामिल हैं।
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पार्षदों ने मांगपत्र में कहा कि सभी निर्माण कार्यों की तकनीकी और भौतिक जांच कराई जानी चाहिए। इससे कार्यों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सकेगी। उनके अनुसार शहर के लोग लगातार विकास कार्यों की गुणवत्ता, लागत और नियमों के पालन पर सवाल उठा रहे हैं। जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि वे विकास कार्यों की सही जानकारी हासिल कर जनता तक पहुंचाएं।
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15 दिन में मॉनिटरिंग नहीं हुई तो जिम्मेदारी तय करने की मांग
पार्षदों ने मांग पत्र में चेतावनी दी कि यदि पत्र प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग नहीं कराई गई तो इसकी जिम्मेदारी नगर पालिका सचिव और संबंधित विभागीय कर्मचारियों की होगी। नगर पालिका चेयरपर्सन प्रीति खन्ना ने भी मांगपत्र पर लिखित टिप्पणी दर्ज की है। उन्होंने जनहित और जनता की शिकायतों का हवाला देते हुए पार्षदों की मौजूदगी में विकास कार्यों की निष्पक्ष मॉनिटरिंग कराने की सिफारिश की है।