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Fatehabad News: किरढ़ान में टायर प्लांट के प्रदूषण से जांच की मांग, ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित
Sun, 25 Oct 2026 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 25 Oct 2026 11:18 PM IST
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भट्टूकलां। गांव किरढ़ान में ग्राम सभा को संबोधित करते ग्रामीण। स्त्रोत : ग्रामीण
भट्टूकलां। गांव किरढ़ान के निकट भट्टू रोड स्थित टायर पायरोलिसिस प्लांट से कथित प्रदूषण और दुर्गंध की समस्या पर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। सरपंच राजेश भिंचर की अध्यक्षता में रविवार को हुई ग्राम सभा में प्लांट की निष्पक्ष जांच और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया।
ग्रामीण अनिल कसाना और पूर्व चेयरमैन नवनीत गोदारा ने आरोप लगाया कि गांव से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित प्लांट में पुराने टायरों को गर्म करके तेल निकाला जाता है। उनके अनुसार प्लांट से आने वाली तेज दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों को परेशानी होती है। किसानों ने कृषि भूमि और फसलों पर संभावित दुष्प्रभावों की आशंका भी जताई।
ग्रामीणों ने कहा कि यह मामला बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों के स्वास्थ्य तथा सुरक्षित भविष्य से जुड़ा है। आसपास के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागों से वायु गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की गई। ग्रामीणों के अनुसार इस संबंध में वर्ष 2018 में भी शिकायत दी गई थी लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
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ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के माध्यम से प्रशासन, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्लांट की स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की गई। ग्रामीणों ने आसपास की हवा, मिट्टी और पानी के नमूनों की जांच के साथ स्वास्थ्य विभाग से संभावित रूप से प्रभावित लोगों का चिकित्सकीय आकलन कराने की मांग भी रखी।
ग्राम सभा में सरपंच राजेश भिंचर, पूर्व चेयरमैन नवनीत गोदारा, खिंया राम सिहाग, साहबराम और वर्ष 2018 में प्लांट के खिलाफ आवाज उठाने वाले ग्रामीणों सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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ग्रामीण अनिल कसाना और पूर्व चेयरमैन नवनीत गोदारा ने आरोप लगाया कि गांव से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित प्लांट में पुराने टायरों को गर्म करके तेल निकाला जाता है। उनके अनुसार प्लांट से आने वाली तेज दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों को परेशानी होती है। किसानों ने कृषि भूमि और फसलों पर संभावित दुष्प्रभावों की आशंका भी जताई।
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ग्रामीणों ने कहा कि यह मामला बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों के स्वास्थ्य तथा सुरक्षित भविष्य से जुड़ा है। आसपास के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागों से वायु गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की गई। ग्रामीणों के अनुसार इस संबंध में वर्ष 2018 में भी शिकायत दी गई थी लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
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ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के माध्यम से प्रशासन, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्लांट की स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की गई। ग्रामीणों ने आसपास की हवा, मिट्टी और पानी के नमूनों की जांच के साथ स्वास्थ्य विभाग से संभावित रूप से प्रभावित लोगों का चिकित्सकीय आकलन कराने की मांग भी रखी।
ग्राम सभा में सरपंच राजेश भिंचर, पूर्व चेयरमैन नवनीत गोदारा, खिंया राम सिहाग, साहबराम और वर्ष 2018 में प्लांट के खिलाफ आवाज उठाने वाले ग्रामीणों सहित अनेक लोग मौजूद रहे।