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डिलिवरी के बाद महिला की मौत, गुस्साए परिजनों ने एसएमओ और डॉक्टर से की मारपीट, लगाया जाम

Tue, 24 Sep 2019 09:28 PM IST
रोहतक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोहाना (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोहाना (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Tue, 24 Sep 2019 09:28 PM IST
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Jam In fatehabad After death of woman
टोहाना में जाम लगाते हुए लोग - फोटो : अमर उजाला

नागरिक अस्पताल में मंगलवार सुबह महिला की डिलिवरी के बाद मौत हो गई। इस बात से गुस्साए मृतका के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए एमओ डॉ. सचिन और एसएमओ डॉ. हरविंद्र सागु से मारपीट करते हुए अस्पताल का गेट बंद कर दिया। इस दौरान परिजनों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हंगामा किया।

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मामले की सूचना पाकर डीएसपी उमेद सिंह, एसएचओ सुरेंद्र सिंह व सदर पुलिस मौके पर आई तथा परिजनों को समझाकर मामले को शांत करवाया। परिजनों ने हंगामा करते हुए हिसार-चंडीगढ रोड को जाम कर दिया। पुलिस ने उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खुलवाया।
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इस दौरान परिजनों ने डॉ. सचिन मंगला पर रिश्वत लेकर डिलिवरी करने व लापरवाही के आरोप लगाए, पुलिस ने मृतका के पति के बयान पर डॉ. सचिन के खिलाफ लापरवाही व भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है।

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पुलिस को दिए बयान में काली माता मंदिर निवासी विनोद कुमार ने बताया कि वह अनाजमंडी में मुनीम का कार्य करता है। पिछले वर्ष उसका विवाह मुठालकलां निवासी रामअवतार की पुत्री 23 वर्षीय प्रियंका से हुआ था। उसने बताया कि उसकी पत्नी गर्भवती थी तो वे सुबह करीब साढ़े चार बजे वह उसे नागरिक अस्पताल में डिलिवरी के लिए ले आए। उसने बताया कि उसकी पत्नी का बीपी बढ़ गया और डॉक्टर ने उसका बीपी ठीक करने के लिए बाहर से दवाई मंगवाई, लेकिन उसकी घरवाली का रक्तचाप कंट्रोल में नहीं हुआ।

महिला के पति ने यह लगाया आरोप

मृतका के पति ने आरोप लगाते हुए कहा कि डिलिवरी से एक घंटा पहले तक कोई डॉक्टर नहीं आया तो उसने डॅाक्टर सचिन से बात की। डॉ. सचिन ने उससे एक हजार रुपयेे लिए जो उसने अपनी जेब में रख लिए। उसने बताया कि उसके बाद डॉ. सचिन ने उच्च रक्तचाप में उसकी पत्नी की डिलिवरी कर दी, जिसके बाद उसे लड़का पैदा हुआ।

 

मृतका के पति ने बताया कि जब उसकी पत्नी को साढ़े सात बजे डिलिवरी के बाद बाहर निकाला तो उसे खून का सैंपल सीवीसी टेस्ट करने के लिए दिया। जब वह लैब में 8 बजे गया तो कहा कि साढ़े आठ बजे जांच होगी, फिर जब साढ़े 8 बजे गया तो कहा कि मशीन खराब है। उसने बताया कि वह प्राईवेट लैब में जाकर खून जांच करवाने के लिए गया तो उसकी पत्नी का एलसीवी नार्मल व्यक्ति के चार से 11 हजार तक होने वाले से अधिक 19800 मिला।

 

विनोद ने बताया कि वह टेस्ट रिपोर्ट डिलिवरी रूम में लेकर गया तो उसे कहा कि अस्पताल के ब्लड बैंक से खून ले आओ। जब वह ब्लड बैंक में गया तो उसे 12 बजे के बाद मिलना कहकर वापस भेज दिया गया। उसने स्टाफ से कहा कि रिपोर्ट बना दो वह निजी जगह से खून ले आएगा तथा इलाज शुरू कर दो।


एक घंटे तक कोई इलाज नहीं किया
पीड़ित के अनुसार, उन्होंने एक घंटे तक कोई इलाज नहीं किया, जिसके चलते उसकी पत्नी की ब्लीडिंग बंद नहीं हुई। सिर्फ कपड़े बदलकर सिंपल ग्लूकोज लगा दी गई। उसने बताया कि करीब दस बजे डॉ. सचिन आया और जांच की तो पाया कि मरीज का ब्लड प्रेशर ज्यादा है। मरीज की देखभाल न होने के कारण उसका रक्तचाप कम नहीं हो पाया।

 

उसके बाद वह दोबारा ब्लड बैंक गया तो उसे ब्लड नहीं दिया गया। जबकि उसने बार-बार कहा कि इमरजेंसी है अभी दे दो। पीड़ित ने बताया कि वह जल्दबाजी में चिकित्सक के पास गया कहा कि इलाज कर सकते हैं तो कीजिए नहीं तो मरीज को रेफर कर दो। आरोप है कि मरीज को 20-25 मिनट तक डाक्टर ने रेफर नहीं किया। उसने कहा कि जब उसकी ऑक्सीजन न होने से उसकी पत्नी का शरीर ठंडा पड़ने लगा तो उसकी घरवाली को रेफर कर दिया। उसने बताया कि जब वे उसकी पत्नी को निजी अस्पताल में आरएमसी में लेकर गए तो चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

महिला का शव लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचे परिजन

मृतका के पति ने बताया कि वे दोबारा उसकी पत्नी के शव को नागरिक अस्पताल में ले आए जहां उसने डॉक्टर से कहा कि आपकी लापरवाही से मरीज की मौत हुई है तो वे वहां लगी खिड़की से भागने लगे। उसने आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी घरवाली प्रियंका की मौत का जिम्मेवार डॉक्टर सचिन है क्योंकि बगैर ट्रीटमेंट के उसकी मौत हुई है। पुलिस ने मृतका के पति के बयान पर आरोपी चिकित्सक डॉ. सचिन के खिलाफ लापरवाही से इलाज करने व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


मौके पर पहुंचे कई पार्टियों के नेता
मामले की सूचना पाकर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता देवेंद्र सिंह बबली सबसे पहले नागरिक अस्पताल में पहुंचे। इस दौरान परिजनों ने अस्पताल के गेट को बंद कर दिया और अपनी समस्या को देवेंद्र बबली के समक्ष रखा। परिजनों ने बबली को बताया कि चिकित्सक की लापरवाही के चलते प्रियंका की मौत हुई है। इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले की सूचना पाकर जजपा प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह व कांग्रेस में पूर्व मंत्री रहे परमवीर सिंह पहुंचे। इस दौरान सभी नेताओं ने कहा कि अस्पताल में लापरवाही के चलते मरीज की मौत हुई है, सरकार को मामले पर एक्शन लेते हुए जांच करवानी चाहिए।

यह कहना है डॉक्टर का

इस बारे में डॉ. सचिन ने बताया कि महिला की पौने सात बजे डिलिवरी हो गई थी और उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि मरीज की सामान्य ब्लीडिंग हो रही थी और कुछ समय बाद जब उसे दौरा पड़ा तो उसे निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। भ्रष्टाचार के आरोप पर डॉ. सचिन ने कहा कि झूठे आरोप लगाए गए हैं, मरीज के परिजनों ने उसके साथ मारपीट की जिसके दौरान उसके गले की सोने की चेन भी गायब हो गई।


डीएसपी का कहना
इस बारे में डीएसपी उमेद सिंह ने बताया कि मृतका के पति के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके बाद कार्रवाई करते हुए चिकित्सक डॉ. सचिन के खिलाफ लापरवाही से इलाज करने और भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
 

आईएमए ने मीटिंग कर की हड़ताल
नागरिक अस्पताल में चिकित्सक पर हमले के बाद आईएमए की मीटिंग का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता सचिव राहुल बंसल ने की। मीटिंग में चिकित्सक पर हमले की कड़ी निंदा करते हुए आईएमए ने हड़ताल की घोषणा कर दी और अस्पतालों में ओपीडी को बंद कर दिया। जिससे दिनभर मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ा।

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