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डर एवं खौफ से भरे रहे ब्लास्ट के बाद वो 20 मिनट
fatehabad
Updated Wed, 08 Jun 2016 01:17 AM IST
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भूना के पास चलती बस में विस्फोट
- फोटो : amar ujala
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विकास छिम्पा । मंगलवार सुबह 11 बजे के करीब भूना में प्राइवेट बस में हुए विस्फोट के बाद बस में सवार यात्रियों के लिए वो 20 मिनट बेहद डर एवं खौफ से भरे रहे। धमाके, धुएं के बाद मची अफरा-तफरी से घबराए बच्चों को उनके परिजन ढांढस बंधा रहे थे। इस हादसे के चलते कुछ लोग तो इतना सहम गए कि अपनी छुट्टियों की प्लानिंग कैंसल कर वापस घर की ओर लौट गए। हादसे के बाद वो खुद को संभाल ही नहीं पाए थे कि अचानक पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने आते ही उनसे तरह-तरह के सवाल करने शुरु कर दिए। इससे भी महिला यात्री और उनके साथ आए बच्चे घबरा गए।
भूना की रहने वाली सिमरन अपने आधा दर्जन परिजनों के साथ स्कूल की छुटिटयां मनाने के लिए सिरसा जा रही थी, लेकिन भूना से कुछ दूर आते ही ये हादसा हो गया। सिमरन के मन में ऐसा डर बैठा कि वह आगे जाने की बजाए वापस अपने घर चली गई। दूसरी ओर खासा पठाना निवासी मनिन्द्र सिंह अपनी माता सुखबीर कौर के साथ गर्मियों की छुट्टियों का आनंद लेने के लिए गांव से चला था। लेकिन विस्फोट में उसका हाथ में फ्रैक्चर हो गया है इसलिए वह भी छुट्टियों का मजा लेने की बजाए अपने घर की ओर जाने को मजबूर हो गया।
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खेतों से भी लोग मौके पर पहुंचे दौड़कर :-
जिस वक्त बस में विस्फोट हुआ, आस पास के खेतों में तकरीबन आधा दर्जन लोग काम कर रहे थे। इनमें शामिल राजेंद्र, कृष्ण, और रामकुमार ने बताया कि धमाके की आवाज और यात्रियों की चीख-पुकार सुनते ही वो लोग अपना काम छोड़कर बस की ओर दौड़े। बस के करीब पहुंचते ही उन्होंने देखा कि बस में धुआं ही धुआं भरा है। बस में यात्रियों के होने की जानकारी मिलते ही वो सभी लोग बस में घुस गए और चालक-परिचालक के साथ मिलकर यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की।
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स्पीड बस दी अधिक होंदी तां पता नहीं की हो जांदा :-
बस के चालक सुखविंद्र सिंह उर्फ सुखा ने बताया कि स्पीड बस दी अधिक होंदी तंा पता नहीं की हो जांदा। पर जी दा रब राखा ओहनू कोई आंच नहीं आंदी। उन्होंने कहा कि भूना से जांडली के बीच की दूरी मात्र पांच किलोमीटर है। इस दौरान चालक से सभी यात्रियों की टिकट नहीं कट पाती। इसके कारण बस की स्पीड मात्र 50-55 किलोमीटर प्रति घंटा पर थी। इसलिए विस्फोट के बावजूद बस को अनियंत्रित नहीं होने दिया। सुखा के मुताबिक विस्फोट में केमिकल सल्फर नाइट्रेट, जो पोटास जैसा पीला पाउडर था ।
धमाके के चलते सुन्न हो गए थे कान : राजबाला
प्राइवेट बस में जिस जगह धमाका हुआ, उससे अगली सीट पर कनौह निवासी राजबाला अपने पति भागीरथ और ननद शिमला के साथ बैठी थी। विस्फोट के बाद उसके और उसके पति के पैरों में चोट आई। धमाके के केमिकल से उसके कपड़े भी जल गए। राजबाला ने उस दृश्य को याद करते हुए बताया कि अचानक हुए धमाके से वो सीट से नीचे गिर गए और अफरा-तफरी मचने के कारण कई लोग उनके ऊपर से गुजरते गए। बाद में उसके घायल पति ने उसे सहारा देकर बस से नीचे उतारा।