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Fatehabad News: सीएमआर डेडलाइन बीती, भंडारण संकट के बीच फंसी चावल की आपूर्ति
Tue, 30 Jun 2026 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 30 Jun 2026 10:50 PM IST
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शहर की अनाज मंडी में पड़ा धान। फाइल फोटो
फतेहाबाद। सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) योजना के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को चावल जमा कराने की निर्धारित समय सीमा 30 जून को समाप्त हो गई लेकिन जिले की राइस मिलों पर अब भी करीब 1.70 लाख मीट्रिक टन चावल की आपूर्ति बकाया है। एफसीआई के गोदामों में भंडारण क्षमता की कमी और चावल की धीमी उठान के कारण मिल संचालकों की परेशानी बढ़ गई है।
इस बीच प्रदेशभर के राइस मिल संचालकों ने प्रदेश सरकार से सीएमआर जमा कराने के लिए एक माह की अतिरिक्त मोहलत देने की मांग की है। जिले में इस सीजन के दौरान हैफेड, एफसीआई, वेयर हाउस व खाद्य एवं आपूर्ति खरीद एजेंसियों ने 11 लाख 2 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की थी। यह धान जिले की करीब 250 राइस मिलों को मिलिंग के लिए आवंटित किया गया।
सीएमआर योजना के नियमों के अनुसार मिल संचालकों को प्राप्त धान से 67 प्रतिशत चावल तैयार कर एफसीआई को वापस देना अनिवार्य होता है। ऐसे में जिले से कुल 7 लाख 38 हजार 753 मीट्रिक टन चावल एफसीआई को जमा कराया जाना था। अब तक राइस मिलों की ओर से 5 लाख 69 हजार मीट्रिक टन चावल जमा कराया जा चुका है जबकि करीब 1 लाख 70 हजार मीट्रिक टन चावल अभी भी बकाया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर शेष चावल की आपूर्ति पूरी करना अधिकांश मिल संचालकों के लिए चुनौती बना हुआ है।
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मिल संचालकों को राहत नहीं मिली तो होगी कार्रवाई
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के नियमों के अनुसार यदि निर्धारित समय सीमा तक चावल एफसीआई को जमा नहीं कराया जाता है तो संबंधित राइस मिलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें रिकवरी, जुर्माना और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। ऐसे में जिले के राइस मिल संचालकों की निगाहें अब सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। यदि समय सीमा बढ़ाई जाती है तो उन्हें राहत मिलेगी, अन्यथा लंबित चावल जमा न करने वाली मिलों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
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भंडारण के लिए एफसीआई के पास नहीं है जगह
एफसीआई के गोदामों में पहले से ही चावल का पर्याप्त स्टॉक भरा हुआ है जिससे नए चावल के भंडारण के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है। यही कारण है कि कई स्थानों पर अधिकारी नए सीएमआर चावल की डिलीवरी लेने में भी हिचकिचा रहे हैं। राइस मिल संचालकों का कहना है कि भंडारण क्षमता की कमी के चलते चावल की उठान और जमा प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे निर्धारित समय सीमा के भीतर आपूर्ति पूरी करना और अधिक कठिन हो गया है।
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जिले की करीब 250 मिलों द्वारा मिलिंग का कार्य किया जा रहा है। एफसीआई की ओर अभी तक चावल की डिलीवरी के लिए जगह नहीं उपलब्ध करवाई जा रही है। ऐसे में राइस मिल संचालकों ने डिलीवरी के लिए सरकार ने एक माह का समय मांगा है।
-- - कुशलपाल बूरा, डीएफएससी, फतेहाबाद।
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इस बीच प्रदेशभर के राइस मिल संचालकों ने प्रदेश सरकार से सीएमआर जमा कराने के लिए एक माह की अतिरिक्त मोहलत देने की मांग की है। जिले में इस सीजन के दौरान हैफेड, एफसीआई, वेयर हाउस व खाद्य एवं आपूर्ति खरीद एजेंसियों ने 11 लाख 2 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की थी। यह धान जिले की करीब 250 राइस मिलों को मिलिंग के लिए आवंटित किया गया।
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सीएमआर योजना के नियमों के अनुसार मिल संचालकों को प्राप्त धान से 67 प्रतिशत चावल तैयार कर एफसीआई को वापस देना अनिवार्य होता है। ऐसे में जिले से कुल 7 लाख 38 हजार 753 मीट्रिक टन चावल एफसीआई को जमा कराया जाना था। अब तक राइस मिलों की ओर से 5 लाख 69 हजार मीट्रिक टन चावल जमा कराया जा चुका है जबकि करीब 1 लाख 70 हजार मीट्रिक टन चावल अभी भी बकाया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर शेष चावल की आपूर्ति पूरी करना अधिकांश मिल संचालकों के लिए चुनौती बना हुआ है।
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मिल संचालकों को राहत नहीं मिली तो होगी कार्रवाई
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के नियमों के अनुसार यदि निर्धारित समय सीमा तक चावल एफसीआई को जमा नहीं कराया जाता है तो संबंधित राइस मिलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें रिकवरी, जुर्माना और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। ऐसे में जिले के राइस मिल संचालकों की निगाहें अब सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। यदि समय सीमा बढ़ाई जाती है तो उन्हें राहत मिलेगी, अन्यथा लंबित चावल जमा न करने वाली मिलों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
भंडारण के लिए एफसीआई के पास नहीं है जगह
एफसीआई के गोदामों में पहले से ही चावल का पर्याप्त स्टॉक भरा हुआ है जिससे नए चावल के भंडारण के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है। यही कारण है कि कई स्थानों पर अधिकारी नए सीएमआर चावल की डिलीवरी लेने में भी हिचकिचा रहे हैं। राइस मिल संचालकों का कहना है कि भंडारण क्षमता की कमी के चलते चावल की उठान और जमा प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे निर्धारित समय सीमा के भीतर आपूर्ति पूरी करना और अधिक कठिन हो गया है।
जिले की करीब 250 मिलों द्वारा मिलिंग का कार्य किया जा रहा है। एफसीआई की ओर अभी तक चावल की डिलीवरी के लिए जगह नहीं उपलब्ध करवाई जा रही है। ऐसे में राइस मिल संचालकों ने डिलीवरी के लिए सरकार ने एक माह का समय मांगा है।