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Fatehabad News: फर्जी हस्ताक्षर करके सीएम विंडो शिकायत बंद करने पर स्वास्थ्य महानिदेशक, मनोचिकित्सक समेत तीन के खिलाफ मामला दर्ज
Mon, 08 Sep 2025 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 08 Sep 2025 11:01 PM IST
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फतेहाबाद/भूना। शहर पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर भूना के जनता अस्पताल के संचालक डॉ. संजीव की शिकायत पर सोमवार को तत्कालीन सीएमओ एवं मौजूदा स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल, नागरिक अस्पताल में मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश, क्लर्क भानूप्रताप के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। सिविल सर्जन कार्यालय में सीएम विंडो की शिकायत को फर्जी हस्ताक्षर करके दफ्तर दाखिल करने के मामले में यह कार्रवाई की गई है।
आरोप है कि उन्होंने प्राइवेट अस्पताल संचालक के फर्जी साइन करवा कर उसकी सीएम विंडो की शिकायत फाइल करवा दी थी। फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की जांच में हस्ताक्षर फर्जी मिले थे। मामले के मुताबिक भूना शहर के जनता अस्पताल के संचालक डॉ. संजीव कुमार ने सीजेएम कोर्ट में इस्तगासा दायर किया था। डॉ. संजीव कुमार व उनकी पत्नी डॉ. नीलम पर एमटीपी एक्ट के तहत साल 2017 में भूना थाने में केस दर्ज करवाया गया था।
डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि वे पिछले 30 साल से भूना में अस्पताल चला रहे हैं। साल 2017 में तत्कालीन सीएमओ डॉ. मनीष बंसल, मेडिकल ऑफिसर डॉ. गिरीश ने उन पर एमटीपी एक्ट के तहत भूना थाने में झूठा केस दर्ज करवा दिया। उक्त दोनों अधिकारी उनसे पैसों की मांग करते थे। जब उन्होंने नहीं दिए तो उन पर मामला दर्ज करवाया गया। उन्हें व उसकी पत्नी को काफी समय तक जेल में रहना पड़ा।
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जनवरी 2020 में लगाई सीएम विंडो
डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने 27 जनवरी 2020 को आरपीओसी रेगुलरली यानी आफ्टर अबॉर्शन एनी काम्प्लीकेशन बारे में सीएम विंडो लगाई थी। जिसकी जांच तत्कालीन सीएमओ डॉ. मनीष बंसल ने की। जांच के दौरान 3 फरवरी 2023 को उसे सीएमओ कार्यालय फतेहाबाद बुलाया गया। जहां पर जांच के दौरान क्लर्क भानु प्रताप ने डॉ. गिरीश की मौजूदगी में अपने हाथ में लिए पेन से बयान लिख दिया। मगर वह उनके बयान से संतुष्ट नहीं था। इसलिए उसने उस पर साइन करने से मना कर दिया और वापस आ गए। इसके बाद उन्हें पता चला कि डॉ. मनीष बंसल ने डॉ. गिरीश कुमार व क्लर्क भानु प्रताप के साथ मिलकर डॉ. गिरीश को फायदा पहुंचाने की नीयत से क्लर्क द्वारा लिखे गए बयान पर उनके फर्जी साइन कर दिए। इसके बाद सीएम विंडो की शिकायत फाइल कर दी। न ही उस पर सीएम विंडो के किसी एमिनेंट पर्सन के साइन करवाए। उन्होंने सीएम विंडो शिकायत ऑनलाइन चेक की तो वह बंद हो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने आरटीआई से डॉक्यूमेंट लिए और हिसार में फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट से जांच करवाई तो उनकी रिपोर्ट में उनके साइन फर्जी पाए गए।
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शहर पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
डॉ. संजीव ने बताया कि इसके बाद उन्होंने इनकी शिकायत एडीजीपी हिसार को दी। 14 सितंबर 2023 को भूना पुलिस ने उसे व आरोपी क्लर्क भानु प्रताप को जांच में शामिल किया। इसके बाद जांच फतेहाबाद शहर थाने में रिपोर्ट के साथ भेज दी। फिर 22 दिसंबर 2023 को फतेहाबाद शहर थाना ने यह कहकर जांच डिस्पोज ऑफ कर दी कि इस मामले में डॉ. मनीष बंसल का कोई निजी हित नहीं था। इसके बाद उन्होंने एडवोकेट नरेश सोनी के जरिए कोर्ट में इस्तगासा दायर किया। अब सीजेएम कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन सीएमओ डॉ. मनीष बंसल, मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश कुमार व क्लर्क भानु प्रताप के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। शहर थाना प्रभारी सुरेंद्रा का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर तीन लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की फिलहाल जांच की जाएगी।
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आरोप है कि उन्होंने प्राइवेट अस्पताल संचालक के फर्जी साइन करवा कर उसकी सीएम विंडो की शिकायत फाइल करवा दी थी। फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की जांच में हस्ताक्षर फर्जी मिले थे। मामले के मुताबिक भूना शहर के जनता अस्पताल के संचालक डॉ. संजीव कुमार ने सीजेएम कोर्ट में इस्तगासा दायर किया था। डॉ. संजीव कुमार व उनकी पत्नी डॉ. नीलम पर एमटीपी एक्ट के तहत साल 2017 में भूना थाने में केस दर्ज करवाया गया था।
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डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि वे पिछले 30 साल से भूना में अस्पताल चला रहे हैं। साल 2017 में तत्कालीन सीएमओ डॉ. मनीष बंसल, मेडिकल ऑफिसर डॉ. गिरीश ने उन पर एमटीपी एक्ट के तहत भूना थाने में झूठा केस दर्ज करवा दिया। उक्त दोनों अधिकारी उनसे पैसों की मांग करते थे। जब उन्होंने नहीं दिए तो उन पर मामला दर्ज करवाया गया। उन्हें व उसकी पत्नी को काफी समय तक जेल में रहना पड़ा।
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जनवरी 2020 में लगाई सीएम विंडो
डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने 27 जनवरी 2020 को आरपीओसी रेगुलरली यानी आफ्टर अबॉर्शन एनी काम्प्लीकेशन बारे में सीएम विंडो लगाई थी। जिसकी जांच तत्कालीन सीएमओ डॉ. मनीष बंसल ने की। जांच के दौरान 3 फरवरी 2023 को उसे सीएमओ कार्यालय फतेहाबाद बुलाया गया। जहां पर जांच के दौरान क्लर्क भानु प्रताप ने डॉ. गिरीश की मौजूदगी में अपने हाथ में लिए पेन से बयान लिख दिया। मगर वह उनके बयान से संतुष्ट नहीं था। इसलिए उसने उस पर साइन करने से मना कर दिया और वापस आ गए। इसके बाद उन्हें पता चला कि डॉ. मनीष बंसल ने डॉ. गिरीश कुमार व क्लर्क भानु प्रताप के साथ मिलकर डॉ. गिरीश को फायदा पहुंचाने की नीयत से क्लर्क द्वारा लिखे गए बयान पर उनके फर्जी साइन कर दिए। इसके बाद सीएम विंडो की शिकायत फाइल कर दी। न ही उस पर सीएम विंडो के किसी एमिनेंट पर्सन के साइन करवाए। उन्होंने सीएम विंडो शिकायत ऑनलाइन चेक की तो वह बंद हो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने आरटीआई से डॉक्यूमेंट लिए और हिसार में फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट से जांच करवाई तो उनकी रिपोर्ट में उनके साइन फर्जी पाए गए।
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शहर पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
डॉ. संजीव ने बताया कि इसके बाद उन्होंने इनकी शिकायत एडीजीपी हिसार को दी। 14 सितंबर 2023 को भूना पुलिस ने उसे व आरोपी क्लर्क भानु प्रताप को जांच में शामिल किया। इसके बाद जांच फतेहाबाद शहर थाने में रिपोर्ट के साथ भेज दी। फिर 22 दिसंबर 2023 को फतेहाबाद शहर थाना ने यह कहकर जांच डिस्पोज ऑफ कर दी कि इस मामले में डॉ. मनीष बंसल का कोई निजी हित नहीं था। इसके बाद उन्होंने एडवोकेट नरेश सोनी के जरिए कोर्ट में इस्तगासा दायर किया। अब सीजेएम कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन सीएमओ डॉ. मनीष बंसल, मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश कुमार व क्लर्क भानु प्रताप के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। शहर थाना प्रभारी सुरेंद्रा का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर तीन लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की फिलहाल जांच की जाएगी।