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बायोमैट्रिक मशीनें नाकाम, नई से लगेगी हाजिरी
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
Updated Wed, 02 Dec 2015 12:00 AM IST
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स्कूलों में बिना योजना बनाए पहले एजुसेट सिस्टम शुरू किया गया जो आज धूल फांक रहा है। स्कूलों में जनरेटर लगाए गए तो वो आज स्कूलों में सफेद हाथी की तरह पड़े हैं।
अब सरकारी स्कूलों में लगने के लिए नई तकनीक की बायोमैट्रिक मशीनें पहुंची और पुरानी खराब घोषित कर दिया गया है। जिसमें साफ जाहिर है कि अध्यापकों की हाजिरी ऑनलाइन करने के पीछे गोलमाल सामने आ रहा है।
स्कूलों में लाखों रुपये की कीमत से लगी मशीनों को विभाग ने नकार दिया है और अब उनकी जगह नई मशीनें लगाने की तैयारी चल रही है। जिला शिक्षा विभाग में मशीनें आ चुकी हैं।
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विभाग के अधिकारी स्कूलों में पहले से लगी मशीनों को खराब बता रहे हैं। जबकि असलियत यह है कि काफी स्कूलों में मशीनें चालू हालत में हैं फर्क सिर्फ इतना है कि वह मशीनें मैनुअल है और वर्तमान में लगने वाली मशीनों की हाजिरी ऑनलाइन है।
विभाग की तरफ से स्कूलों में अध्यापकों पर नजर रखने के लिए जिला मुख्यालय में 700 मशीनें पहुंची है। जिसमें से 385 मशीनें सीनियर सेकेंडरी व हाई तथा 315 मशीनें मिडिल व प्राइमरी स्कूल में लगाई जानी है।
इस मशीन पर स्कूल में तैनात स्टाफ चाहे वह ठेके पर लगा है उसकी भी हाजिरी लगाई जाएगी और इस मशीन से स्टाफ का आधार कार्ड लिंक किया जाएगा। जिसके बाद उनकी ऑनलाइन हाजिरी लगेगी।
इससे पहले पिछली सरकार में भी स्कूलों में बायोमैट्रिक मशीनें लगी थी जो ट्रांसलाइन हैं अब इन मशीनों को सरकार ने नकारा घोषित कर दिया है और इनकी जगह नई मशीनें लगेगी।
विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि मशीनें लगाने के बाद कामयाब नहीं हुई और सभी मशीनें बेकार हैं जबकि असलियत यह है कि मशीनें काम कर रही हैं।
सवाल यह है कि क्या मोटे कमीशन या फिर किसी कंपनी को फायदा उठाने के चक्कर में विभाग यह कदम उठा रहा है। अगर पहले से लगी मशीनें कामयाब नहीं हुई तो उसे बिना जांच के लगाया क्यों गया।
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अब सरकारी स्कूलों में लगने के लिए नई तकनीक की बायोमैट्रिक मशीनें पहुंची और पुरानी खराब घोषित कर दिया गया है। जिसमें साफ जाहिर है कि अध्यापकों की हाजिरी ऑनलाइन करने के पीछे गोलमाल सामने आ रहा है।
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स्कूलों में लाखों रुपये की कीमत से लगी मशीनों को विभाग ने नकार दिया है और अब उनकी जगह नई मशीनें लगाने की तैयारी चल रही है। जिला शिक्षा विभाग में मशीनें आ चुकी हैं।
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विभाग के अधिकारी स्कूलों में पहले से लगी मशीनों को खराब बता रहे हैं। जबकि असलियत यह है कि काफी स्कूलों में मशीनें चालू हालत में हैं फर्क सिर्फ इतना है कि वह मशीनें मैनुअल है और वर्तमान में लगने वाली मशीनों की हाजिरी ऑनलाइन है।
विभाग की तरफ से स्कूलों में अध्यापकों पर नजर रखने के लिए जिला मुख्यालय में 700 मशीनें पहुंची है। जिसमें से 385 मशीनें सीनियर सेकेंडरी व हाई तथा 315 मशीनें मिडिल व प्राइमरी स्कूल में लगाई जानी है।
इस मशीन पर स्कूल में तैनात स्टाफ चाहे वह ठेके पर लगा है उसकी भी हाजिरी लगाई जाएगी और इस मशीन से स्टाफ का आधार कार्ड लिंक किया जाएगा। जिसके बाद उनकी ऑनलाइन हाजिरी लगेगी।
इससे पहले पिछली सरकार में भी स्कूलों में बायोमैट्रिक मशीनें लगी थी जो ट्रांसलाइन हैं अब इन मशीनों को सरकार ने नकारा घोषित कर दिया है और इनकी जगह नई मशीनें लगेगी।
विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि मशीनें लगाने के बाद कामयाब नहीं हुई और सभी मशीनें बेकार हैं जबकि असलियत यह है कि मशीनें काम कर रही हैं।
सवाल यह है कि क्या मोटे कमीशन या फिर किसी कंपनी को फायदा उठाने के चक्कर में विभाग यह कदम उठा रहा है। अगर पहले से लगी मशीनें कामयाब नहीं हुई तो उसे बिना जांच के लगाया क्यों गया।