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यातना देने के आरोप में भट्टू के तत्कालीन थानाध्यक्ष व पुलिसकर्मी कोर्ट में तलब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Feb 2022 11:01 PM IST
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Bhattu's then SHO and policemen summoned in court for torturing
फतेहाबाद। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामअवतार पारिक की अदालत ने भट्टू कलां में जूस की रेहड़ी लगाने वाले रोहित कुमार को प्रताड़ित करने के मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर माना है। सीजेएम ने इस मामले में आरोपी भट्टू थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष मुकेश बेनीवाल, मुंशी रतन, हेड कांस्टेबल कालुराम, संदीप व पीड़ित के पड़ोसी पांडव सिंह को समन जारी कर 7 अप्रैल को अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं।
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रेहड़ी चालक रोहित ने अदालत में अपने वकील रमेश बागड़ी के जरिये इस्तगासा दायर किया था। जिसमें रोहित ने बताया कि वह भट्टू कलां के फतेहाबाद रोड पर गन्ने के जूस की रेहड़ी लगाता है। भारतीय खाद्य निगम का कर्मचारी पांडव सिंह उसका धक्का बस्ती प्रताप नगर में पड़ोसी हैं। आरोप है कि 23 जून 2017 को पांडव सिंह घर के बाहर प्लास्टिक जला रहा था। रोहित ने उसे ऐसा करने से रोका, क्योंकि रोहित की बेटी को सांस संबंधी एलर्जी है। जब पांडव सिंह नहीं रुका तो रोहित ने आग को बुझा दिया। इस पर पांडव सिंह ने उसे देख लेने की धमकी दीअ। अगले दिन सुबह 11 बजे पांडव सिंह पुलिस की जीप में थानाध्यक्ष व अन्य पुलिसकर्मियों के साथ उसकी रेहड़ी पर आ गया। थानाध्यक्ष ने उसे रेहड़ी बंद कर साथ चलने को कहा। आरोप है कि जब रोहित ने कारण पूछा तो उसकी पिटाई कर जीप में डाल लिया गया। थाने लाकर उसे लठों से मारा गया, जिससे उसका पैर टूट गया। पुलिसकर्मी उसे अस्पताल छोड़ गए। आरोप है कि डॉक्टरों ने पुलिस के दबाव में एक्सरे नहीं किया। जब उसका दर्द ठीक नहीं हुआ तो वह अग्रोहा मेडिकल कॉलेज गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसके पैर की हड्डी टूट गई है। रोहित का आरोप है कि अग्रोहा मेडिकल में भी पुलिसकर्मी पहुंच गए और उसे धमकाया कि वह इस चोट को पुलिस की पिटाई नहीं बताएगा। इस पर उसने डॉक्टरों को बताया कि वह सीढ़ियों से गिरा है। रोहित का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने उसका धंधा चौपट कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर लगता है। इसलिए अदालत की ओर से तत्कालीन थानाध्यक्ष व अन्य पुलिसकर्मियों को समन जारी कर 7 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए गए हैं।
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