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Fatehabad News: अस्थमा एक अनुवांशिक बीमारी, परहेज रखकर किया जा सकता है नियंत्रित

Tue, 07 May 2024 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Tue, 07 May 2024 12:57 AM IST
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Asthma is a genetic disease, can be controlled by maintaining diet
डॉ.मनीष टुटेजा, विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल
विश्व अस्थमा दिवस विशेष
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फतेहाबाद। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के चलते मौसम में बदलाव और प्रदूषण बढ़ते ही वायरल इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम, खांसी, अस्थमा और बुखार के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इस मौसम में अस्थमा के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। क्योंकि अस्थमा एक अनुवांशिक बीमारी है जिसे परहेज रखकर नियंत्रित किया जा सकता है। हर साल मई माह के पहले मंगलवार को वर्ल्ड अस्थमा डे मनाया जाता है।
नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी और ओपीडी में रोजाना अस्थमा के 15 से 20 मरीज आ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक अस्थमा का समय सीजनल होता है। मौसम में परिवर्तन, फसल की कटाई या प्रदूषण बढ़ने पर अस्थमा की समस्या बढ़ने लगती है। अगर किसी को पुरानी खांसी है तो वह एलर्जी से होती है, लेकिन समय पर इलाज न किया तो सांस की दिक्कत भी हो जाती है। वह धीरे-धीरे अस्थमा का रूप ले लेती है। मौसम में बदलाव के कारण वायरल बीमारियों का सबसे ज्यादा असर भी देखा जा सकता है।
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सर्दी, जुकाम या वायरल बुखार बढ़ने पर निमोनिया में भी बदल सकता है। यहां तक बच्चे भी अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं। प्रदूषण बढ़ने पर ओपीडी में ओपीडी में चार से पांच बच्चे अस्थमा के रोजाना आ जाते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक अस्थमा एक अनुवांशिक बीमारी है। अगर घर के किसी सदस्य को अस्थमा, एलर्जी, सांस की समस्या, स्किन की समस्या है तो बच्चे को अस्थमा हो सकता है। समय पर इलाज न मिलने से फेफड़े खराब होने का खतरा बना रहता है। कुछ बच्चों में एक से तीन साल की उम्र में अस्थमा के लक्षण आने लगते हैं।
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अस्थमा बीमारी से बचने के सामान्य उपाय
- ऐसी जगहों पर न जाएं जहां पर धूल व मिट्टी का प्रभाव ज्यादा है।
- एलर्जी वाली जगह पर जाना पड़े तो मास्क लगाकर जाएं।
- सुबह और शाम के समय घर से बाहर निकलने से बचें।
- घर में अगर सफाई हो रही है तो मास्क लगाकर रखें।
- चिकित्सक के परामर्श से समय पर उपचार लें।
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बचपन में हुई अस्थमा की बीमारी 18 साल की उम्र में खत्म या हो सकती है कम
चिकित्सकों का कहना है कि अस्थमा अनुवांशिक बीमारी होती है। बचपन में अगर बच्चे को अस्थमा बीमारी हुई है तो कई केस में 18 या 19 साल तक खत्म या फिर कम हो सकती है। इसके अलावा कई केस में बीमारी 18 साल में शुरू होती है जिसे दवाइयों के सहारे नियंत्रित किया जा सकता है।

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मौसम में बदलाव या प्रदूषण बढ़ने पर अस्थमा के केस बढ़ जाते हैं। अब भी ओपीडी में रोजाना 15 से 20 केस आ रहे हैं। अस्थमा बीमारी में मरीज परहेज करके नियंत्रित कर सकते हैं। ठंडे-गर्म का परहेज रखना जरूरी होता है। अगर किसी की दवाई चल रही है तो वह नियमित उपचार लें। मौसम में बदलाव के दौरान सुरक्षा के साथ बाहर निकलें।
- डॉ. मनीष टुटेजा, विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल
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