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Fatehabad: दिवंगत शुभकरण की अस्थियों का हुआ रोझांवाली में विसर्जन, आंदोलन में गोली लगने से हुई थी मौत

Wed, 20 Mar 2024 12:25 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 20 Mar 2024 12:25 PM IST
सार

किसान फतेहाबाद के गांव अयाल्की में एकजुट हुए। ट्रैक्टर ट्रालियों व अपने निजी वाहनों के साथ रोझांवाली भाखड़ा नहर पर पहुंचे। इस दौरान भारी संख्या में किसानों ने दिवंगत किसान शुभकरण को श्रद्धांजलि दी और उनकी अस्थियों को भाखड़ा नहर में विसर्जित किया।

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Ashes of late Shubhakaran immersed in Rojhanwali In Fatehabad, he died due to bullet injury during movement
किसान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

खनौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली लगने से काल का ग्रास बने दिवंगत किसान शुभकरण की अस्थियों को बुधवार को अखिल भारतीय खेती बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने रतिया के गांव रोझांवाली के पास विसर्जित किया। इससे पहले भारी संख्या में किसान फतेहाबाद के गांव अयाल्की में एकजुट हुए। दोपहर को 12 बजे सभी किसान ट्रैक्टर ट्रालियों व अपने निजी वाहनों के साथ रोझांवाली भाखड़ा नहर पर पहुंचे।

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इस दौरान भारी संख्या में किसानों ने दिवंगत किसान शुभकरण को श्रद्धांजलि दी और उनकी अस्थियों को भाखड़ा नहर में विसर्जित किया। इस दौरान किसानों ने गांव रोझांवाली में लगे नाके को खुलवाने की भी मांग की। इस अवसर पर अपने संबोधन में भारतीय किसान यूनियन खेती बचाओ के प्रदेश प्रवक्ता राम जाट ने कहा कि दिवंगत शुभकरण युवा किसान था और अपने हकों की मांग को लेकर वह खनौरी बॉर्डर पर गया था, लेकिन सरकार ने निरंकुशता दिखाते हुए किसानों पर गोलियां बरसानी आरंभ कर दी और इस गोलीबारी में सिर में गोली लगने के कारण शुभकरण का देहांत हो गया।
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रोझांवाली के पास नाका हटाने की मांग
इस दौरान किसानों ने गांव रोझांवाली के पास लगाए गए नाके को हटाने की मांंग की। उन्होंने बताया कि इस नाके के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को पैदल पंजाब सीमा व फतेहाबाद की सीमा तक आना पड़ रहा है। इस क्षेत्र के अनेक लोगों की पंजाब के इलाके में रिश्तेदारी है और उनको आने जाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने मांग की कि इस नाके को खोला जाए, क्योंकि किसान शांतिपूर्वक अपना प्रदर्शन करना चाहते हैं। आम जनता को परेशान करने की किसानों की कोई सोच नहीं है।

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